Sonbhadra News: निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का जनजागरण अभियान शुरू, पूर्वांचल में विरोध तेज

Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली के निजीकरण और कर्मचारियों के उत्पीड़न के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने जनजागरण अभियान शुरू किया।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 18 May 2026 6:35 PM IST
Sonbhadra News: निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का जनजागरण अभियान शुरू, पूर्वांचल में विरोध तेज
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Sonbhadra News: बिजली व्यवस्था के निजीकरण, कर्मचारियों के उत्पीड़न और दमनात्मक कार्रवाइयों के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने सोमवार से पूर्वांचल में बड़े जनजागरण अभियान की शुरुआत कर दी। अभियान का आगाज बस्ती और गोरखपुर में विरोध सभाओं के साथ हुआ, जबकि जल्द ही ओबरा और अनपरा समेत पूर्वांचल की बड़ी विद्युत परियोजनाओं में भी विशाल सभाएं आयोजित की जाएंगी।

जनसमर्थन जुटाने उतरे बिजली कर्मी

संघर्ष समिति ने साफ कहा कि यह लड़ाई केवल बिजली कर्मचारियों की नहीं, बल्कि प्रदेश की सस्ती, सुलभ और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है। निजीकरण लागू होने पर उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होगी।विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, मोहम्मद वसीम और प्रेमनाथ राय ने संबोधित किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि 03 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का अब तक पालन नहीं किया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

मार्च 2023 आंदोलन के बाद बढ़ा असंतोष

उन्होंने कहा कि मार्च 2023 के आंदोलन के बाद बिजली कर्मियों पर दमनात्मक कार्रवाई की गई। कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज की गईं, निलंबन किए गए, दूरस्थ स्थानों पर तबादले हुए और अनुशासनात्मक कार्रवाइयों का सिलसिला अब तक जारी है। संघर्ष समिति ने मांग की कि 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कदम तत्काल वापस लिए जाएं।

संविदा कर्मियों की बहाली की मांग

समिति ने यह भी आरोप लगाया कि डाउनसाइजिंग और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाया गया है। मांग की गई कि सभी संविदा कर्मियों की बहाली की जाए और आउटसोर्स कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित किया जाए।

स्मार्ट मीटर और वेतन कटौती पर नाराजगी

बिजली कर्मियों ने फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में शामिल होने पर बड़े पैमाने पर तबादले, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और कर्मचारियों के सरकारी आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाने जैसी कार्यवाहियों पर भी कड़ा विरोध जताया। साथ ही ट्रांसफार्मर खराब होने पर अभियंताओं और जूनियर इंजीनियरों से वसूली के आदेश को अवैधानिक बताते हुए उसे तत्काल वापस लेने की मांग की गई।

जनता और किसानों से समर्थन की अपील

संघर्ष समिति ने प्रदेश की जनता, किसानों और उपभोक्ताओं से इस आंदोलन में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि निजीकरण से आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ेगा। समिति ने भरोसा दिलाया कि आंदोलन के दौरान भी बिजली कर्मी उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे और सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी।

Shalini singh

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