Sonbhadra News: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का उबाल, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

Sonbhadra News: सोनभद्र और पूर्वांचल के बिजली कर्मियों ने निजीकरण और विभागीय कार्रवाइयों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 25 May 2026 6:31 PM IST
Sonbhadra News: निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का उबाल, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
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Sonbhadra News: प्रदेश की बिजली व्यवस्था को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सड़क पर दिखाई देने लगी है। निजीकरण, कर्मचारियों पर बढ़ती कार्रवाई और विभागीय दबाव के विरोध में सोमवार को वाराणसी के भिखारीपुर स्थित पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम मुख्यालय पर बिजली कर्मियों का गुस्सा उबाल बनकर फूट पड़ा। पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों से पहुंचे सैकड़ों कर्मचारियों ने विरोध सभा और जनजागरण रैली निकालकर सरकार और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी।

सभा के दौरान कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग को चरणबद्ध तरीके से निजी कंपनियों के हवाले करने की तैयारी चल रही है। संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि एक ओर भीषण गर्मी में बिजली कर्मी दिन-रात उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रबंधन कर्मचारियों पर कार्रवाई, तबादले और अनुशासनात्मक दबाव बढ़ाने में लगा है।

“निजीकरण से जनता पर पड़ेगा सीधा बोझ”

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की कोशिशें बिजली व्यवस्था को कमजोर कर देंगी। ओबरा और अनपरा तापीय परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के जरिए निजी हाथों में सौंपने और ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (TBCB) लागू करने को लेकर भी कर्मचारियों ने तीखा विरोध जताया।नेताओं ने कहा कि जिन शहरों में निजी कंपनियों को बिजली व्यवस्था सौंपी गई, वहां उपभोक्ताओं की परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ी हैं। ग्रेटर नोएडा और आगरा का उदाहरण देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियां केवल मुनाफे पर ध्यान देती हैं, जबकि आम जनता को महंगी बिजली और खराब सेवाओं का सामना करना पड़ता है।

पुराने समझौते भूली सरकार, कर्मचारियों में उबाल

सभा में वर्ष 2022 में ऊर्जा मंत्री और संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि सरकार ने अपने ही लिखित समझौते को लागू नहीं किया, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ तबादले और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को लेकर भी कर्मचारियों ने कड़ा विरोध जताया। संघर्ष समिति ने मांग की कि सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए।

“बिना सुनवाई नौकरी खत्म करने का नियम तानाशाही”

सभा में मई 2025 में बदले गए सेवा नियमों पर भी कर्मचारियों ने तीखा हमला बोला। नेताओं ने कहा कि बिना जांच और बिना सुनवाई कर्मचारियों को नौकरी से हटाने का प्रावधान पूरी तरह कर्मचारी विरोधी और अलोकतांत्रिक है।फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में शामिल कर्मचारियों के तबादले, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर कार्रवाई और सरकारी आवासों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने जैसे फैसलों को लेकर भी बिजली कर्मियों ने नाराजगी जाहिर की।

संविदा कर्मियों की बहाली की उठी मांग

संघर्ष समिति ने कहा कि डाउनसाइजिंग और वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाया गया है, जिससे बिजली व्यवस्था पर असर पड़ा है। कर्मचारियों ने सभी संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली और आंदोलन से जुड़े मुकदमों को खत्म करने की मांग की।सभा के अंत में संघर्ष समिति के नेताओं ने जनता और किसानों से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कर्मचारियों की नहीं बल्कि सस्ती, सुलभ और भरोसेमंद बिजली व्यवस्था बचाने की लड़ाई है।विरोध सभा को जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, मायाशंकर तिवारी, अंकुर पांडेय, ओपी सिंह, चंद्र भूषण उपाध्याय और राम कुमार झा समेत कई नेताओं ने संबोधित किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण और उत्पीड़न का सिलसिला नहीं रुका तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

Shalini singh

Shalini singh

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उप संपादक | डिजिटल मीडिया पत्रकार

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