Sonbhadra News: निजीकरण पर आर-पार की लड़ाई! बिजली कर्मियों के समर्थन में उतरे 27 लाख कर्मचारी

Sonbhadra News: सोनभद्र में बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन तेज हो गया है। एआईपीईएफ ने यूपी के बिजली कर्मियों के समर्थन में 27 लाख कर्मचारियों के साथ देशव्यापी आंदोलन और हड़ताल की चेतावनी दी है।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 12 Jun 2026 8:18 PM IST
Sonbhadra News: निजीकरण पर आर-पार की लड़ाई! बिजली कर्मियों के समर्थन में उतरे 27 लाख कर्मचारी
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Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण निगमों के निजीकरण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को अब राष्ट्रीय स्तर का बड़ा समर्थन मिल गया है। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों और अभियंताओं के संघर्ष के साथ खड़े होने का ऐलान करते हुए साफ कर दिया है कि यदि निजीकरण की प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो देशभर के बिजली कर्मचारी सड़क से संसद तक संघर्ष छेड़ देंगे। साथ ही प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 के खिलाफ भी राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

बेंगलुरु में 12 जून को आयोजित एआईपीईएफ की संघीय कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से पारित प्रस्तावों में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया गया। संघर्ष समिति ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के इस समर्थन से प्रदेश के कर्मचारियों और अभियंताओं का मनोबल और मजबूत हुआ है।

562 दिनों से जारी है निजीकरण विरोधी संघर्ष

एआईपीईएफ ने अपने प्रस्ताव में कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ प्रदेश के बिजली कर्मचारी और अभियंता पिछले 562 दिनों से लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। बिजली पंचायतों, महापंचायतों, विशाल रैलियों और जनसभाओं के जरिए यह आंदोलन अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें आम उपभोक्ताओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है।फेडरेशन ने आंदोलन के दौरान हजारों कर्मचारियों के तबादले, संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त किए जाने तथा बिना आरोप पत्र और स्पष्टीकरण का अवसर दिए कार्रवाई किए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने का प्रयास बताया है।

"यूपी के बिजली कर्मियों पर हमला, पूरे देश पर हमला माना जाएगा"

एआईपीईएफ ने स्पष्ट कहा है कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों और अभियंताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर किसी भी प्रकार का हमला पूरे देश के बिजली कर्मचारियों पर हमला माना जाएगा। संगठन ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता उत्तर प्रदेश के समर्थन में एकजुट होकर राष्ट्रीय आंदोलन चलाएंगे।फेडरेशन ने मांग की है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला तत्काल वापस लिया जाए तथा आंदोलन के दौरान कर्मचारियों के खिलाफ की गई सभी दमनात्मक कार्यवाहियां बिना शर्त समाप्त की जाएं। साथ ही 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री और संघर्ष समिति के बीच हुए समझौते को पूरी तरह लागू करने की भी मांग उठाई गई है।

विद्युत संशोधन विधेयक-2025 को बताया निजीकरण का नया हथियार

बैठक में पारित दूसरे महत्वपूर्ण प्रस्ताव में एआईपीईएफ ने प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 का कड़ा विरोध किया। संगठन का कहना है कि यह विधेयक सार्वजनिक वितरण कंपनियों को कमजोर कर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का माध्यम बनेगा। एक ही क्षेत्र में कई वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देने और लाभकारी उपभोक्ताओं की चुनिंदा आपूर्ति जैसे प्रावधान सार्वजनिक बिजली कंपनियों को आर्थिक रूप से कमजोर कर देंगे।फेडरेशन का दावा है कि इस कानून के लागू होने से घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों, छोटे व्यापारियों और समाज के कमजोर वर्गों को मिलने वाली सस्ती बिजली पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था कमजोर होने से आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।

संसद में बिल पेश हुआ तो होगी 'लाइटनिंग स्ट्राइक'

एआईपीईएफ की संघीय कार्यकारिणी ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी मानसून सत्र में विद्युत (संशोधन) विधेयक-2025 संसद के किसी भी सदन में पेश किया गया तो राष्ट्रीय समन्वय समिति (एनसीसीओईईई) और अन्य संगठनों के साथ मिलकर देशव्यापी विरोध कार्यक्रम चलाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर अल्प सूचना पर राष्ट्रव्यापी "लाइटनिंग स्ट्राइक" सहित बड़े आंदोलनात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निजीकरण के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब केवल एक प्रदेश का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, उपभोक्ताओं, किसानों और बिजली कर्मियों के अधिकारों की रक्षा का राष्ट्रीय अभियान बन चुका है। उन्होंने प्रदेश सरकार और ऊर्जा निगम प्रबंधन से निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेने, कर्मचारियों पर हो रहे उत्पीड़न को रोकने तथा संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

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