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सोनभद्र में पहली बार हुई नौका दौड़, गंडक के नाविकों ने मारी बाजी; चोपन घाट पर महाआरती
Sonbhadra News: सोनभद्र के चोपन घाट पर गंगा उत्सव-2026 में पहली बार नौका दौड़ का रोमांच दिखा। गंडक के नाविकों ने बाजी मारी और भव्य महाआरती से घाट जगमगा उठा।
Sonbhadra News: जनपद में सोन नदी का शांत तट बुधवार की शाम को आस्था, रोमांच और लोकसंस्कृति के अनूठे संगम का गवाह बना। चोपन स्थित छठ घाट पर आयोजित गंगा उत्सव-2026 में पहली बार नौका दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। नदी की लहरों पर नाविकों के बीच हुए रोमांचक मुकाबले में गंडक नदी के नाविकों ने प्रथम स्थान हासिल कर बाजी मारी। वहीं शाम को आयोजित भव्य महागंगा आरती ने पूरे घाट को भक्तिमय बना दिया।
दीपों की जगमगाहट, आदिवासी लोक कलाकारों के करमा और परसोना नृत्य तथा स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया।जिला गंगा समिति, सोनभद्र के तत्वावधान में आयोजित इस उत्सव में नदी संरक्षण, स्वच्छता और जनभागीदारी के साथ जिले की समृद्ध आदिवासी लोकसंस्कृति को प्रमुखता दी गई। दिनभर चले कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सहभागिता की।
पहली बार नौका दौड़ में दिखा नाविकों का दमखम
गंगा उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण जनपद में पहली बार आयोजित नौका दौड़ प्रतियोगिता रही। सोन नदी की सहायक नदियों के नाम पर आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न नदियों से जुड़े नाविकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। बजरंग घाट से छठ घाट, चोपन तक आयोजित मुकाबले में नाविकों ने अपनी नावों की रफ्तार और कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही और नावों के आगे बढ़ने के साथ दर्शकों का उत्साह भी बढ़ता गया।
रोमांचक मुकाबले में गंडक नदी के नाविकों ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि पांडु नदी के नाविक दूसरे और बिजुल नदी के नाविक तीसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा सोन, रिहंद, कर्मनाशा, कनहर और बेलन सहित अन्य नदियों के नाविकों ने भी प्रतियोगिता में भाग लिया। विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन ने अलग-अलग नदियों से जुड़े नाविकों को एक साझा मंच प्रदान करने के साथ उनकी पारंपरिक आजीविका और नदी से उनके जुड़ाव को भी सामने रखा।
महाआरती से आध्यात्मिक रंग में रंगा सोन नदी का तट
सायंकाल छठ घाट पर भव्य महागंगा आरती का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष कुमार जायसवाल और विशिष्ट अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष उस्मान अली ने दीप प्रज्वलित कर महाआरती का शुभारंभ किया। आरती के दौरान दीपों की रोशनी से पूरा घाट जगमगा उठा। भक्तिमय वातावरण और धार्मिक अनुष्ठान ने सोन नदी के तट को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया। उपस्थित लोगों ने इस मनोहारी दृश्य का आनंद लिया।
करमा और परसोना नृत्य ने बिखेरे लोकसंस्कृति के रंग
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सोनभद्र की आदिवासी लोकपरंपराओं की विशेष झलक देखने को मिली। स्थानीय लोक कलाकारों ने पारंपरिक करमा और परसोना नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों पर कलाकारों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों की ओर से बनाई गई आकर्षक रंगोलियों ने आयोजन स्थल की सुंदरता बढ़ाई।
नदी संरक्षण का संकल्प, उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित
गंगा उत्सव के माध्यम से नदियों को स्वच्छ और संरक्षित रखने का संदेश भी दिया गया। गंगा एवं उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और संवर्धन के लिए अतिथियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों तथा आमजन को शपथ दिलाई गई। हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को नदी संरक्षण की मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। नदी एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी आशुतोष कुमार जायसवाल, विशिष्ट अतिथि नगर पंचायत अध्यक्ष उस्मान अली, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत चोपन अखिलेश, उप प्रभागीय वनाधिकारी शत्रुघ्न त्रिपाठी, उप प्रभागीय वनाधिकारी कपिल, क्षेत्रीय वनाधिकारी अभिषेक यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक जयराम सिंह, जिला गंगा समिति के जिला परियोजना अधिकारी महेंद्र गौतम तथा नगर पंचायत चोपन के लिपिक अंकित पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और आमजन उपस्थित रहे।
गंगा उत्सव-2026 के जरिए जिला गंगा समिति ने यह संदेश दिया कि नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, आजीविका और जीवन का आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकारी प्रयासों के साथ आमजन की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। जनपद में पहली बार आयोजित नौका दौड़ ने इस आयोजन को नई पहचान दी। आस्था, परंपरा, रोमांच और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ चोपन का यह आयोजन लोगों के लिए यादगार बन गया।


