Sonbhadra News : सोनभद्र-मिर्जापुर में गरजे शंकराचार्य, बोले— गाय हमारी कॉमन मां है

Sonbhadra News :सोनभद्र और मिर्जापुर में जगद्गुरु शंकराचार्य ने गौरक्षा धर्मयुद्ध के तहत विशाल जनसभाओं को संबोधित किया।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 11 May 2026 10:02 PM IST (Updated on: 11 May 2026 10:04 PM IST)
Sonbhadra News : सोनभद्र-मिर्जापुर में गरजे शंकराचार्य, बोले— गाय हमारी कॉमन मां है
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Sonbhadra News: गौरक्षा को लेकर चल रहे 81 दिवसीय “गविष्टि (गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध)” के नवम दिन सोमवार को सोनभद्र और मिर्जापुर की धरती वैदिक घोष, गौभक्ति और धर्म चेतना से गूंज उठी। उत्तराम्नाय ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ ने पांच विधानसभा क्षेत्रों में विशाल जनसभाओं को संबोधित करते हुए गौ माता को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताया और कहा कि “गाय हमारी common मां है, इसलिए हम सब बंधु हैं।

जो गाय को मां नहीं मानता, उससे हमारा कोई बंधुत्व नहीं हो सकता।”ज्येष्ठ कृष्ण नवमी, विक्रम संवत 2083 के अवसर पर आयोजित इस धर्मयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” का सामूहिक उच्चारण कर गौ रक्षा का संकल्प लिया। पूरे दिन चले कार्यक्रमों में श्रद्धा, आस्था और धर्म चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला।

पांच विधानसभाओं में हुआ भव्य स्वागत

धर्मयात्रा का आरंभ रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र स्थित अर्जुन लॉन से हुआ, जहां जगद्गुरु शंकराचार्य का भव्य अभिनंदन किया गया। इसके बाद दुद्धी विधानसभा के हाथीनाला में विशाल जनसभा आयोजित हुई। ओबरा विधानसभा क्षेत्र के मानस भवन श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।

इसके पश्चात पुनः रॉबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र के विंध्य हीरो एजेंसी पिपरी रोड और घोरावल शाहगंज स्थित शिव देवी महाविद्यालय में कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां गौ पूजन भी संपन्न कराया गया। दिनभर की यात्रा के बाद मिर्जापुर जनपद की मड़िहान विधानसभा स्थित एसबी पैलेस में रात्रि विश्राम किया गया।

“बन्धुः स्नेहेन मनो बध्नाति यः” का अर्थ समझाया

अपने ओजस्वी उद्बोधन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने “बन्धु” शब्द की शास्त्रीय व्याख्या करते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्नेह से मन को बांध ले, वही वास्तविक बंधु होता है। उन्होंने कहा कि जन्म देने वाली माताएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति ने गौ माता, गंगा माता और सीता माता के रूप में हम सभी को एक साझा मां दी है।

उन्होंने कहा कि “गौ माता आपकी भी है और हमारी भी, इसलिए हम सब भाई-बहन हैं।” इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जो लोग गाय को मां नहीं मानते, उनसे सामाजिक और सांस्कृतिक बंधुत्व संभव नहीं है।

शास्त्रों में बताए गए बंधु के पांच लक्षण

महाराजश्री ने कहा कि शास्त्रों में बंधु के पांच प्रमुख लक्षण बताए गए हैं— उत्सव में साथ देना, विपत्ति में सहयोग करना, अकाल में भोजन देना, प्राण संकट में रक्षा करना और मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार में सहभागी बनना। उन्होंने दावा किया कि गाय इन सभी कसौटियों पर खरी उतरती है, इसलिए भारतीय संस्कृति में गाय को सबसे बड़ा बंधु माना गया है।

उन्होंने कहा कि जिस घर में गाय नहीं होती, उसे शास्त्रों में “बंधु रहित घर” कहा गया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गाय की सेवा केवल दूध प्राप्ति के लिए करना अंग्रेजी सोच का प्रभाव है, जबकि भारतीय परंपरा में गाय की सेवा आशीर्वाद और धर्म रक्षा के लिए की जाती रही है।

पंचमुखी हनुमान और गौरक्षा की कथा सुनाई

सभा के दौरान शंकराचार्य ने पंचमुखी हनुमान की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अहिरावण ने एक हजार गायों की बलि देने की तैयारी की, तब हनुमान जी ने पंचमुखी स्वरूप धारण कर उसका वध किया और गायों की रक्षा की। उन्होंने कहा कि इसी कारण दक्षिण भारत में हनुमान जी को “गवरक्षक हनुमान” के रूप में भी पूजा जाता है।

“उत्तर प्रदेश से होता है सबसे अधिक गोमांस निर्यात”

अपने संबोधन में शंकराचार्य ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के कुल गोमांस निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश से जुड़ा है। उन्होंने चिंता जताई कि प्रदेश में गायों की संख्या लगातार घट रही है। उन्होंने कहा कि यह धर्मयुद्ध समाज के सामने एक स्पष्ट रेखा खींचने के लिए है— एक तरफ गाय की पूजा करने वाले और दूसरी तरफ गाय का वध करने वाले।

उन्होंने गेरुआ वस्त्र धारण कर मांस व्यापार को संरक्षण देने वालों पर भी तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ऐसे लोग गेरुआ धारण करने के अधिकारी नहीं हैं।

“धर्म परेशान हो सकता है, पराजित नहीं”

जगद्गुरु शंकराचार्य ने कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है, बल्कि सभी दलों के लिए एक अवसर है कि वे गौ माता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध करें। उन्होंने सत्ता पक्ष से गौ माता को “राज्य माता” अथवा “राष्ट्र माता” घोषित करने की मांग की, जबकि विपक्षी दलों से लिखित शपथपत्र जारी करने की अपील की कि सत्ता में आने पर पहला कार्य गौ रक्षा का होगा।

उन्होंने कहा, “धर्म परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित कभी नहीं होता। अधर्म के पास केवल परेशान करने की शक्ति है, अंतिम विजय धर्म की ही होती है।”

“एक वोट, एक नोट” अभियान की घोषणा

गौधाम निर्माण को लेकर भी शंकराचार्य ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में भव्य और दिव्य गौधाम बनाए जाएंगे। इसके लिए “एक वोट, एक नोट” अभियान चलाया जाएगा, जिसमें हर नागरिक से 1 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की श्रद्धा राशि ली जाएगी और दाताओं का नाम विशेष रजिस्टर में उनके हस्तलेख से दर्ज किया जाएगा।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 81 दिनों की यह धर्मयात्रा समाप्त होने तक सरकार की ओर से गौ रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 24 जुलाई को लखनऊ में “अक्षौहिणी सेना” के साथ अगले चरण के आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

धर्म चेतना और गौरक्षा का बना केंद्र

सोनभद्र और मिर्जापुर में आयोजित इस धर्मयात्रा ने पूरे क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक विमर्श को नई दिशा दी। जनसभाओं में बड़ी संख्या में साधु-संत, गौभक्त, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान गौ माता की जय, हर-हर महादेव और वैदिक मंत्रों के उद्घोष से वातावरण धर्ममय बना रहा।

Shalini Rai

Shalini Rai

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