Sonbhadra News: धरती बचाने की मुहिम को मिला बल, 2750 किसानों ने सीखा प्राकृतिक खेती का नया मंत्र

Sonbhadra News: सोनभद्र में प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें 2750 किसानों ने जैविक खेती, जीवामृत, बीजामृत और कम लागत वाली कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 18 Jun 2026 7:52 PM IST
Sonbhadra News: धरती बचाने की मुहिम को मिला बल, 2750 किसानों ने सीखा प्राकृतिक खेती का नया मंत्र
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Sonbhadra News: रसायन-मुक्त खेती को जनआंदोलन बनाने और किसानों को प्राकृतिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के उद्देश्य से गुरुवार को मंगुराही स्थित उप कृषि निदेशक कार्यालय परिसर में भव्य प्राकृतिक खेती कार्यशाला एवं जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। भारत सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में जनपद के 22 प्राकृतिक खेती क्लस्टरों से जुड़े 2750 किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम का शुभारंभ घोरावल विधायक अनिल कुमार मौर्य, भाजपा जिलाध्यक्ष नंद लाल गुप्ता, ब्लॉक प्रमुख रॉबर्ट्सगंज अजित रावत, पूर्व सांसद रामसकल, जिलामंत्री प्रसन्न पटेल सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान किसानों में प्राकृतिक खेती को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।

प्राकृतिक खेती से बदलेगी खेती की तस्वीर

उप कृषि निदेशक राजकुमार ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की लागत घटाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत सुधारने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि जनपद में संचालित 22 प्राकृतिक खेती क्लस्टरों के माध्यम से 2750 किसान इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उन्होंने जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, दशपर्णी अर्क और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक उत्पादों के प्रयोग की जानकारी देते हुए किसानों को रसायनों के दुष्प्रभावों से अवगत कराया।

कम लागत, अधिक लाभ का रास्ता

पूर्व सांसद रामसकल ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत कम करती है, बल्कि कृषि को टिकाऊ और लाभकारी भी बनाती है। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड, फसल बीमा और अन्य सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की सलाह दी।कार्यशाला में प्रगतिशील कृषक विद्यापति ने प्राकृतिक खेती से प्राप्त अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि गोबर की खाद और प्राकृतिक तकनीकों के उपयोग से फसलों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है तथा उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने सब्जी उत्पादन में मिली सफलता के उदाहरण प्रस्तुत कर किसानों का उत्साह बढ़ाया।

स्वस्थ समाज और पर्यावरण का आधार है प्राकृतिक खेती

विधायक अनिल कुमार मौर्य ने कहा कि आज की आवश्यकता ऐसी खेती है जो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित वातावरण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा सके। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक कृषि अपनाने का आह्वान करते हुए मोटे अनाजों के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।

हरी खाद से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत

कार्यक्रम में दिनेश बियार सहित अन्य वक्ताओं ने किसानों को सनई और ढैंचा जैसी फसलों को हरी खाद के रूप में उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इससे भूमि की उर्वरता बढ़ती है, रासायनिक खादों की आवश्यकता घटती है और खेती अधिक टिकाऊ बनती है।कार्यक्रम के समापन पर जिला कृषि अधिकारी वीरेन्द्र कुमार ने विभागीय योजनाओं, गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता तथा किसानों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने सभी अतिथियों, किसानों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्राकृतिक खेती को जनपद के प्रत्येक गांव तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।

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