Sonbhadra: सोनभद्र में 1.61 करोड़ पौधों का लक्ष्य: तीज-त्योहारों से जुड़ेगा वृक्षारोपण महाभियान 2026

Sonbhadra News: अभियान को तीज-त्योहारों, सामाजिक सहभागिता और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए जिले में विशेष वन, ग्रीन चौपाल और मिशन छाया जैसी योजनाएं शुरू की जाएंगी।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 12 Jun 2026 3:36 PM IST
Sonbhadra: सोनभद्र में 1.61 करोड़ पौधों का लक्ष्य: तीज-त्योहारों से जुड़ेगा वृक्षारोपण महाभियान 2026
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Sonbhadra News: जलवायु परिवर्तन, बढ़ती गर्मी और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच सोनभद्र को हरियाली की नई पहचान देने की दिशा में प्रदेश सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। पौधरोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी की गई है। इसी कड़ी में जिले में इस वर्ष 1 करोड़ 61 लाख 69 हजार 686 पौधे रोपने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

योगी सरकार की मंशा है कि पौधरोपण केवल एक दिन का आयोजन न बनकर लोगों की जीवनशैली और सामाजिक परंपराओं का हिस्सा बने। यही वजह है कि इस बार वृक्षारोपण अभियान को तीज-त्योहारों, सांस्कृतिक आयोजनों और सामाजिक सहभागिता से जोड़ा जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि जब पौधे जनभावनाओं से जुड़ेंगे तो उनकी सुरक्षा और संरक्षण भी स्वाभाविक रूप से सुनिश्चित होगा।

सोनभद्र में बनेंगे छह विशेष हरित केंद्र

जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने शुक्रवार को बताया कि पौधरोपण महाभियान-2026 के तहत जिले में कई विशिष्ट वन और एक विशेष वाटिका विकसित की जाएगी। इनका उद्देश्य केवल हरित क्षेत्र बढ़ाना नहीं बल्कि पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता को भी मजबूती देना है।योजना के तहत महर्षि चरक औषधि वन में औषधीय गुणों से भरपूर पौधों और जड़ी-बूटियों का रोपण किया जाएगा। वहीं समरस वन सामाजिक एकता का संदेश देगा, जबकि समृद्धि वन आर्थिक एवं पर्यावरणीय समृद्धि का प्रतीक बनेगा। इसके अतिरिक्त कपि वन और ऊर्जा वन भी विकसित किए जाएंगे। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वंदेमातरम वाटिका की स्थापना होगी, जहां स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े प्रिय पौधों का रोपण किया जाएगा।

रक्षाबंधन पर भाई-बहन लगाएंगे पौधे

इस वर्ष पौधरोपण अभियान को सामाजिक रिश्तों से भी जोड़ने की तैयारी है। 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर जिले भर में भाई-बहन वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इस पहल के तहत भाई और बहन मिलकर पौधे लगाएंगे तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेंगे।प्रशासन का मानना है कि यदि पौधों को भावनात्मक रिश्तों से जोड़ा जाए तो उनके जीवित रहने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि अभियान में परिवारों, विद्यार्थियों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।पौधरोपण अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। उद्यान विभाग द्वारा आम भंडारा आयोजित कर लोगों को फलदार वृक्षों के महत्व से अवगत कराया जाएगा। वहीं वन विभाग प्रत्येक विकास खंड में सहजन भंडारा आयोजित करेगा।सहजन को औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है। प्रशासन का उद्देश्य लोगों को इसके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी देना और अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना है।

हर ग्राम पंचायत में लगेगी ग्रीन चौपाल

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्रीन चौपाल आयोजित की जाएगी। इन चौपालों के माध्यम से ग्रामीणों को पौधरोपण के लाभ, पेड़ों की कटाई से होने वाले नुकसान तथा बदलते पर्यावरणीय हालात की जानकारी दी जाएगी।प्रशासन का मानना है कि जब तक ग्रामीण स्तर पर जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक हरित अभियान के लक्ष्य पूरी तरह सफल नहीं हो सकते। इसलिए चौपालों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश घर-घर पहुंचाया जाएगा।

मिशन छाया से बदलेंगी सड़कों की तस्वीर

भीषण गर्मी और हीटवेव के बढ़ते खतरे को देखते हुए प्रदेश सरकार ने ‘मिशन छाया’ शुरू किया है। इस योजना के तहत सड़कों के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे।जिलाधिकारी ने बताया कि पौधरोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा की भी विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि भविष्य में ये पौधे विशाल वृक्ष बनकर राहगीरों को छाया प्रदान कर सकें। इससे न केवल सड़कों का तापमान कम होगा बल्कि हीटवेव के प्रभाव को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

हरियाली को जनआंदोलन बनाने की तैयारी

प्रशासन का कहना है कि इस वर्ष का अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पौधों को जीवित रखने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी विकसित करने पर भी पूरा जोर दिया जाएगा। “एक पेड़ गुरु के नाम”, “अविरल धारा वृक्षारोपण”, “भाई-बहन वृक्षारोपण” और “मिशन छाया” जैसे कार्यक्रम इसी सोच का हिस्सा हैं।स्पष्ट है कि सोनभद्र में इस बार पौधरोपण अभियान महज औपचारिकता नहीं बल्कि हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनने जा रहा है। यदि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप पौधे रोपे गए और उनका संरक्षण सुनिश्चित हुआ तो आने वाले वर्षों में सोनभद्र प्रदेश के सबसे हरित जिलों में शामिल हो सकता है।

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