Sonbhadra News :पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला, दो मासूम बच्चियों से अपराध में दोषी को उम्रकैद

Sonbhadra News: सोनभद्र पॉक्सो कोर्ट ने दो नाबालिग बच्चियों से गंभीर लैंगिक अपराध में दोषी को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक उम्रकैद और 73 हजार जुर्माना दिया।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 11 Aug 2026 8:02 PM IST
Sonbhadra News :पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला, दो मासूम बच्चियों से अपराध में दोषी को उम्रकैद
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Sonbhadra News: दो नाबालिग बच्चियों के साथ गंभीर लैंगिक अपराध के मामले में मंगलवार को सोनभद्र की पॉक्सो अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए अभियुक्त अली फैयाज उर्फ फैज पुत्र सलीमुद्दीन अंसारी, निवासी अनपरा को दोषसिद्ध कर दिया। अदालत ने उसे उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही विभिन्न धाराओं में कुल 73 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। मामले में आरोप विरचित होने के महज चार माह चार दिन में सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाना इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता रही।

अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सोनभद्र ओमकार शुक्ला की अदालत ने यह फैसला थाना अनपरा के मुकदमा अपराध संख्या 70/2026 में सुनाया। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के साथ होने वाले गंभीर लैंगिक अपराधों के प्रति सख्त न्यायिक रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

दो नाबालिग बच्चियों को बनाया था निशाना

अभियोजन के अनुसार अभियुक्त ने दो नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर उनके साथ लैंगिक अपराध किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियुक्त के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m), 65(2), 75(1)(i), 351(3) तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5(m)/6, 5L/6, 9L/10 एवं 9m/10 के तहत आरोप विरचित किए गए थे।

सुनवाई के दौरान अभियोजन ने पीड़िताओं के महत्वपूर्ण बयानों के साथ चिकित्सकीय साक्ष्य, जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज, पुलिस विवेचना और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र परीक्षण करने के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषी पाया।

अपराध की गंभीरता पर अदालत ने अपनाया कड़ा रुख

सजा के प्रश्न पर न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख किया। अदालत ने अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता, पीड़िताओं पर पड़े प्रभाव और समाज पर उसके प्रभाव को दंड निर्धारण में महत्वपूर्ण माना। न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों और अपराध की गंभीरता को देखते हुए माना कि अभियुक्त को कठोर दंड दिया जाना आवश्यक है।

इसी आधार पर पॉक्सो एक्ट के गंभीर अपराधों के लिए अभियुक्त को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा विभिन्न धाराओं में कुल 73 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया गया है।

आरोप तय होने के चार माह चार दिन में फैसला

मामले की सबसे अहम बात यह रही कि अभियुक्त पर आरोप विरचित होने के महज चार माह चार दिन में सुनवाई पूरी कर उसे दोषसिद्ध करते हुए सजा सुना दी गई। पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध में इतनी कम अवधि में सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाए जाने को त्वरित न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

न्यायालय के इस फैसले से यह संदेश भी गया है कि नाबालिग बच्चियों के साथ गंभीर लैंगिक अपराध करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। मामले में अभियोजन की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि एवं नीरज कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए कठोर दंड सुनाया।

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