Sonbhadra News: बेटे की मौत का सच जानने के इंतजार में पिता की पथराई आंखें, चार साल से दर-दर भटक रहा

Sonbhadra News : सोनभद्र में बेटे की संदिग्ध मौत के मामले में पिता पिछले चार वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 3 Jun 2026 9:42 AM IST
Sonbhadra News: बेटे की मौत का सच जानने के इंतजार में पिता की पथराई आंखें, चार साल से दर-दर भटक रहा
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Sonbhadra Ramanuj Pandey Death Case

Sonbhadra News: किसी भी पिता के लिए जवान बेटे को खोने का दर्द जीवनभर का घाव होता है। लेकिन जब उस बेटे की मौत के पीछे छिपे सच पर सवाल खड़े हों और वर्षों बाद भी न्याय की उम्मीद अधूरी रह जाए, तो वह पीड़ा और गहरी हो जाती है। सोनभद्र जनपद के रॉबर्ट्सगंज नगर निवासी डॉ. बनारसी पांडे पिछले लगभग पौने चार वर्षों से अपने बेटे रामअनुज पांडे की मौत के मामले में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि यह कोई साधारण हादसा नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी, जिसकी निष्पक्ष जांच आज तक नहीं हो सकी।

हर तरफ थी खुशियों के बीच गम में डूब गया पिता:

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 15 अगस्त 2022 को रामअनुज पांडे अपने मित्र विक्की उर्फ मसदुल के साथ घर से निकले थे। दोपहर बाद परिवार को सूचना मिली कि धधरौल बांध में डूबने से रामअनुज की मौत हो गई है। सूचना मिलते ही परिजन घटनास्थल पहुंचे, जहां पुलिस शव को बाहर निकलवा चुकी थी। मृतक के पिता डॉ. बनारसी पांडे शुरू से ही इस घटना को संदिग्ध बताते रहे हैं। उनका कहना है कि, घटनास्थल और शव की स्थिति कई ऐसे सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब आज तक नहीं मिला।

घटना के बाद उठे सवाल?

परिजनों के अनुसार यदि रामअनुज सेल्फी लेते समय असंतुलित होकर बांध में गिर गए थे, तो उनका मोबाइल फोन जेब में सुरक्षित कैसे मिला? उनके सीने पर गमछा किसने बांधा था? सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट तथा खून के निशान कैसे आए? डॉ. पांडे का दावा है कि इन महत्वपूर्ण बिंदुओं की गंभीर जांच कभी नहीं की गई। उनका आरोप है कि तत्कालीन रामपुर बरकोनिया थाना प्रभारी द्वारा मामले को दुर्घटना मानते हुए जल्दबाजी में कार्रवाई की गई और बाद में भी जांच में कई अहम पहलुओं की अनदेखी की गई।

मरने के बाद व्हाट्सएप चैट डिलीट कैसे?

मृतक के पिता का कहना है कि, रामअनुज का मोबाइल फोन घटना के 15 से 20 दिन बाद परिवार को सौंपा गया। पुलिस की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि रामअनुज का व्हाट्सएप चैट डिलीट था और उसी दिन नया व्हाट्सएप अकाउंट बनाया गया था। यहीं से संदेह और गहरा हो जाता है। परिवार पूछ रहा है कि यदि रामअनुज की मृत्यु हो चुकी थी, तो उनके मोबाइल से व्हाट्सएप चैट किसने डिलीट किया? नया व्हाट्सएप अकाउंट किसने बनाया? इन सवालों के जवाब आज तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं।

अदालत दे रही आदेश पर आदेश

वहीं पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मामले में अंतिम रिपोर्ट लगाते हुए इसे दुर्घटनावश हुई मौत बताया। इससे असंतुष्ट होकर डॉ. बनारसी पांडे ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई बिंदुओं पर पुनः जांच के निर्देश दिए। लेकिन पिता का आरोप है कि पुनर्विवेचना के दौरान भी न्यायालय द्वारा उठाए गए तकनीकी और तथ्यात्मक सवालों की अनदेखी की गई। पहली पुनर्विवेचना में भी मामले को दुर्घटना मानते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसके बाद पुनः न्यायालय की शरण ली गई और फिर से जांच के निर्देश दिए गए। वर्तमान में मामले की विवेचना चल रही है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि अब तक की कार्रवाई में न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन नहीं किया गया।

त्यौहार खुश नहीं, दे रहे हैं गम

वहीं बकरीद के त्योहार को लेकर डॉ. बनारसी पांडे का दर्द एक बार फिर छलक उठा। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर उन्हें अपने बेटे की हत्या का संदेह है, वह ईद, बकरीद और अन्य त्योहार खुशी से मना रहा है, जबकि उनके घर में पिछले पौने चार वर्षों से कोई त्योहार पहले जैसा नहीं रहा। उनका कहना है कि जवान बेटे की मौत ने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है। हर त्योहार उन्हें उस दर्द की याद दिलाता है, जिसे वे आज तक भूल नहीं पाए हैं। डॉ. बनारसी पांडे का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उनका विश्वास है कि देर भले हो, लेकिन सच एक दिन सामने अवश्य आएगा।

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