Sonbhadra News: सोनभद्र में रेणुका नदी पर संकट? खनन और धारा मोड़ने के आरोपों से उठे सवाल

Sonbhadra News: विश्व पर्यावरण दिवस पर सोनभद्र की रेणुका नदी में अवैध खनन और नदी की धारा मोड़ने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो के बाद पर्यावरण प्रेमियों ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

Mithilesh Dev Pandey
Published on: 5 Jun 2026 11:09 PM IST (Updated on: 5 Jun 2026 11:09 PM IST)
Sonbhadra News: सोनभद्र में रेणुका नदी पर संकट? खनन और धारा मोड़ने के आरोपों से उठे सवाल
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Sonbhadra News: विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां नदियों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की बातें की जा रही हैं, वहीं सोनभद्र की जीवनदायिनी रेणुका नदी के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडराने के आरोप सामने आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने प्रशासनिक तंत्र और खनन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि नदी की मूल धारा को जगह-जगह से मोड़कर रास्ते बनाए गए हैं और नदी के बीचों-बीच पोकलेन मशीनें उतारकर बालू का खनन किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, रेणुका नदी में बालू खनन का पट्टा छत्तीसगढ़ की ओमेक्स मिनरल प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित है। कंपनी पहले से ही विवादों में रही है। आरोप है कि कंपनी ने निदेशक पद से हटाए जा चुके व्यक्ति के हस्ताक्षर के आधार पर खनन पट्टा हासिल किया और वर्तमान में भी उसी पुराने निदेशक के हस्ताक्षरों पर खनन से जुड़ी कई प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं। इस मामले की शिकायत होने के बाद जिलाधिकारी ने जांच की जिम्मेदारी खान विभाग को सौंपी थी, लेकिन अब तक जांच का परिणाम सार्वजनिक नहीं हो सका है।

इस बीच पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामने आए वीडियो ने मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में कथित तौर पर नदी की धारा के बीच भारी मशीनों से खुदाई होती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदी की प्राकृतिक प्रवाह व्यवस्था को प्रभावित करते हुए कई स्थानों पर धारा को मोड़ा गया है, जिससे नदी के पारिस्थितिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नदी की धारा से छेड़छाड़ न केवल जल प्रवाह को प्रभावित करती है बल्कि भूजल स्तर, जलीय जीव-जंतुओं और आसपास की कृषि व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक असर डालती है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि नदी के भीतर पोकलेन मशीनों से खनन और धारा परिवर्तन जैसी गतिविधियां हो रही थीं तो उनकी निगरानी के लिए तैनात विभागीय अधिकारियों और जिम्मेदार एजेंसियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। खनन क्षेत्र की नियमित मॉनिटरिंग, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और राजस्व हितों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है।

पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेने के दिन ही रेणुका नदी से जुड़े इन आरोपों ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। क्षेत्र के लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते नदी को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में रेणुका नदी का प्राकृतिक स्वरूप गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है, जिसकी भरपाई करना संभव नहीं होगा।

अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं कि क्या रेणुका नदी के साथ कथित खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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