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मेघनाद के शक्तिप्रहार से मूर्छित लक्ष्मण, संजीवनी लेकर पहुंचे हनुमान, गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
Sonbhadra News: सोनभद्र के रेणुकूट में हिंडाल्को रामलीला परिषद की रामलीला के आठवें दिन मेघनाद के शक्तिप्रहार से लक्ष्मण के मूर्छित होने और हनुमान के संजीवनी बूटी लाने का भावपूर्ण मंचन किया गया।
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Sonbhadra News: जनपद के रेणुकूट में हिंडाल्को रामलीला परिषद के तत्वावधान में आयोजित रामलीला के आठवें दिन युद्धभूमि में शौर्य, संकट और भक्ति का ऐसा दृश्य साकार हुआ कि दर्शक भावविभोर हो उठे। अंगद-रावण संवाद से शुरू हुई लीला में मेघनाद के शक्तिप्रहार से लक्ष्मण के मूर्छित होने तक रणभूमि का तनाव और उनके पुनर्जीवित होने पर रामदल में उमड़ा उल्लास आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों ने प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन कर रामायण की घटनाओं को जीवंत कर दिया।
लंका पहुंचकर अंगद ने रावण को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अहंकार में डूबे रावण ने उनकी बात नहीं मानी। अंगद लौटकर भगवान राम के पास पहुंचे और लंका की स्थिति से अवगत कराते हुए युद्ध की तैयारी का आग्रह किया। इसके बाद रामदल ने लंका पर चढ़ाई की तैयारी शुरू कर दी। दूसरी ओर, रामसेना के आक्रमण की सूचना से रावण की चिंता बढ़ गई। उसने युद्ध की जिम्मेदारी मेघनाद को सौंप दी।
मेघनाद के शक्तिप्रहार से रणभूमि में पसरा सन्नाटा
युद्ध का बिगुल बजते ही दोनों ओर की सेनाएं आमने-सामने आ गईं। लक्ष्मण ने भी युद्ध में उतरने की इच्छा जताई। इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के बीच भीषण संग्राम हुआ। दोनों ओर से प्रहार और प्रतिकार के बीच युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। इसी दौरान मेघनाद ने दिव्य शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण पर प्रहार कर दिया। शक्ति लगते ही लक्ष्मण मूर्छित होकर रणभूमि में गिर पड़े।लक्ष्मण की यह दशा देखकर भगवान राम व्याकुल हो उठे। पूरी वानर सेना में शोक छा गया और रामदल में चिंता की लहर दौड़ गई। संकट की इस घड़ी में हनुमान ने लंका से सुषेन वैद्य को लाकर भगवान राम के समक्ष उपस्थित किया। सुषेन वैद्य ने लक्ष्मण की स्थिति का परीक्षण करने के बाद बताया कि यदि रात में ही द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर उन्हें दी जाए, तभी उनके प्राण बचाए जा सकते हैं।
संजीवनी की तलाश में निकले हनुमान, कालनेमि का किया अंत
लक्ष्मण के प्राण बचाने की जिम्मेदारी मिलते ही हनुमान संजीवनी बूटी की तलाश में निकल पड़े। उनके मार्ग में रावण द्वारा भेजा गया कालनेमि बाधा बनकर सामने आया। हालांकि, हनुमान ने उसकी चाल को विफल करते हुए उसका वध कर दिया और अपनी यात्रा जारी रखी। द्रोणागिरी पर्वत पर पहुंचने के बाद संजीवनी बूटी की पहचान नहीं कर पाने पर उन्होंने पूरा पर्वत ही उठा लिया और रामदल की ओर चल पड़े।हनुमान के संजीवनी सहित पहुंचते ही सुषेन वैद्य ने बूटी का प्रयोग किया। इसके प्रभाव से लक्ष्मण की मूर्छा दूर हुई और उनके स्वस्थ होते ही रामदल में खुशी की लहर दौड़ गई। कुछ ही देर पहले जहां शोक और चिंता का माहौल था, वहीं अब जय श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस प्रसंग ने दर्शकों को भक्ति, साहस और संकट में धैर्य बनाए रखने का संदेश दिया।
वैदिक पूजन के साथ हुआ मंचन का शुभारंभ
रामलीला के आठवें दिन मंचन का शुभारंभ हिंडाल्को प्राइमरी स्कूल यूनिट-2 की प्रधानाध्यापिका दीपान्विता रॉय तथा आदित्य बिड़ला इंटरमीडिएट कॉलेज के उपप्रधानाचार्य विजय भगवत पाटिल ने अपनी पत्नी के साथ वैदिक विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन कर किया। इसके बाद रामलीला की शुरुआत हुई।इस अवसर पर रामलीला परिषद के अध्यक्ष पी.के. उपाध्याय, सचिव आदित्य प्रकाश पांडे, कोषाध्यक्ष पद्माकर मिश्रा तथा निर्देशक राजेन्द्र सिंह शेखावत उपस्थित रहे। लक्ष्मण शक्ति और संजीवनी प्रसंग के मंचन ने रामलीला की आठवीं रात को यादगार बना दिया।


