राहुल गांधी मानहानि मामले में नया मोड़, स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने तलब की निचली अदालत की पत्रावली

Rahul Gandhi Defamation Case: सुल्तानपुर में राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में नया मोड़ आया है। स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने निचली अदालत से पूरी पत्रावली तलब की है और अगली सुनवाई 5 जून को निर्धारित की गई है।

Taaquweem Fatma
Published on: 30 May 2026 5:59 PM IST
राहुल गांधी मानहानि मामले में नया मोड़, स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने तलब की निचली अदालत की पत्रावली
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Rahul Gandhi Defamation Case

Rahul Gandhi Defamation Case: कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित मानहानि मामले में एक नया कानूनी मोड़ आ गया है। आज स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए लोवर एमपी-एमएलए कोर्ट से मुकदमे की पूरी पत्रावली तलब कर ली है। अब इस रिवीजन याचिका पर अगली सुनवाई 5 जून को होगी।पूरा मामला भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा दायर मानहानि वाद से जुड़ा है, वादी पक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी द्वारा दिए गए कथित बयान(गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी) से उनकी प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची है, जिसके संबंध में न्यायालय में परिवाद दाखिल किया गया था।

इस मामले में पूर्व में लोवर एमपी-एमएलए कोर्ट में वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पाण्डेय ने एक प्रार्थना पत्र दाखिल कर राहुल गांधी की आवाज के नमूने (वॉयस सैंपल) और न्यायालय में प्रस्तुत सीडी में दर्ज आवाज का विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) से मिलान कराने की मांग की थी। वादी पक्ष का कहना था कि मामले के निष्पक्ष निस्तारण के लिए आवाज का वैज्ञानिक परीक्षण आवश्यक है।हालांकि, निचली अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और वॉयस सैंपल तथा सीडी की आवाज के मिलान संबंधी अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत के इस आदेश से असंतुष्ट होकर वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पाण्डेय ने स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की।

रिवीजन याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के दौरान स्पेशल कोर्ट ने मामले के सभी अभिलेखों का परीक्षण करने के उद्देश्य से लोवर एमपी-एमएलए कोर्ट से वाद की संपूर्ण पत्रावली तलब कर ली है। अदालत अब यह परखेगी कि निचली अदालत द्वारा वॉयस सैंपल और ऑडियो मिलान संबंधी अर्जी को खारिज किए जाने का आदेश विधिसम्मत था या नहीं।

कानूनी जानकारों के अनुसार, स्पेशल कोर्ट के समक्ष दायर रिवीजन का निर्णय आगे की सुनवाई की दिशा तय कर सकता है। यदि अदालत निचली अदालत के आदेश में कोई त्रुटि पाती है, तो वह मामले में नए निर्देश भी जारी कर सकती है।उधर, मानहानि वाद के मूल मुकदमे की सुनवाई भी जारी है। मामले में मूल परिवाद की अगली सुनवाई 17 जून को निर्धारित की गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें 5 जून को होने वाली रिवीजन याचिका की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत निचली अदालत के आदेश की वैधता पर विचार करेगी।

Shalini singh

Shalini singh

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उप संपादक | डिजिटल मीडिया पत्रकार

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