Suvendu Adhikari PA Murder Case: जिसे पुलिस ने समझा कातिल, वो निकला बेकसूर! CBI की एंट्री के बाद बलिया का राज सिंह रिहा

Suvendu Adhikari PA Murder Case: शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बड़ा ट्विस्ट! CBI ने माना बंगाल पुलिस ने बलिया के बेकसूर राज सिंह को गिरफ्तार किया था, कोर्ट के आदेश के बाद वह रिहा।

Shivam
Published on: 21 May 2026 5:15 PM IST (Updated on: 21 May 2026 5:26 PM IST)
Suvendu Adhikari PA Murder Case: जिसे पुलिस ने समझा कातिल, वो निकला बेकसूर! CBI की एंट्री के बाद बलिया का राज सिंह रिहा
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Suvendu Adhikari PA Murder Case: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत के सामने यह स्वीकार कर लिया है कि पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष जांच टीम (एसटीएफ) ने उत्तर प्रदेश से एक गलत व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया था। इस खुलासे के बाद बारासात अदालत ने बलिया के रहने वाले निर्दोष राज सिंह को तुरंत रिहा करने का आदेश दे दिया है, जिससे जांच एजेंसियों की शुरुआती कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

यह पूरा मामला ६ मई की रात का है, जब पूर्व एयरफोर्स कर्मी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बेहद करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मध्यमग्राम (बारासात) में उनकी कार के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के ठीक बाद और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले हुई थी, जिसकी वजह से इसे एक गंभीर राजनीतिक हत्या माना जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घटना के पांच दिन बाद यानी ११ मई को उत्तर प्रदेश के अयोध्या से बलिया निवासी राज सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया।

सीबीआई ने जब केस हाथ में लेकर बारीकी से जांच शुरू की, तो पूरी कहानी ही बदल गई। एजेंसी ने बारासात अदालत में एक याचिका दायर कर बताया कि जिस राज सिंह को पुलिस ने मुख्य आरोपियों में समझकर उठाया था, वह हत्या वाले दिन ६ मई को पश्चिम बंगाल में मौजूद ही नहीं था। राज सिंह के परिवार ने जांच एजेंसी के सामने उसके बेकसूर होने के अकाट्य और पुख्ता सबूत पेश किए थे।

जांच में यह साफ हो गया कि राज सिंह ७ मई को बलिया के आनंद नगर निवासी एमएलसी पप्पू सिंह की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए लखनऊ गया हुआ था। शादी समारोह में हिस्सा लेने के बाद वह एक गेस्ट हाउस में रुका था। इसके अगले दिन उसका परिवार अंबेडकर नगर स्थित मखदूम अशरफ बाबा के मंदिर में दर्शन करने गया और वहां से वे लोग अयोध्या पहुंचे। जब वे अयोध्या में भोजन करने के बाद वहां से निकल रहे थे, तभी पुलिस की टीम ने उन्हें घेर लिया और राज सिंह को हिरासत में ले लिया। परिवार की ओर से सौंपे गए सीसीटीवी फुटेज, गेस्ट हाउस के बिल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को यूपी पुलिस और एसटीएफ ने भी पूरी तरह सही पाया, जिसके बाद सीबीआई को अदालत से उसकी रिहाई की गुहार लगानी पड़ी।

अपनी इस शुरुआती चूक को सुधारते हुए सीबीआई ने अब अपना पूरा ध्यान इस वारदात के असली मास्टरमाइंड और शूटरों पर केंद्रित कर दिया है। केंद्रीय एजेंसी इस मामले में अब तक कई अन्य महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां कर चुकी है। जांच टीम ने गाजीपुर के देवरिया गांव के रहने वाले ट्रक ट्रांसपोर्ट कारोबारी विनय राय उर्फ पमपम को वाराणसी से गिरफ्तार किया है, जिसका लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। इसके अलावा, मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा से हरिद्वार से लौटते समय बलिया के रत्तोपुर निवासी राजकुमार सिंह को दबोचा गया है, जिसे सीबीआई इस हत्याकांड का मुख्य शूटर मान रही है। मामले में मयंक मिश्रा और विक्की मौर्य जैसे अन्य आरोपियों को भी पहले ही दबोचा जा चुका है।

सीबीआई की अब तक की तफ्तीश में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या एक सोची-समझी और पेशेवर 'कॉन्ट्रैक्ट किलिंग' यानी सुपारी देकर कराई गई हत्या थी। हालांकि, इस पूरी साजिश को रचने वाला मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड अभी भी कानून की गिरफ्त से दूर है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब आरोपियों के बीच हुए पैसों के लेन-देन, यूपीआई ट्रेल, उनके आपसी नेटवर्क और इस वारदात के पीछे छिपे संभावित राजनीतिक कनेक्शन को खंगालने में जुटी है ताकि जल्द से जल्द हत्या की इस बड़ी साजिश का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके।

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Shivam is a multimedia journalist.

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