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अखिलेश की पीठ में खंजर घोंपेंगे राहुल! आजम परिवार से दोस्ती के बीच क्या है कांग्रेस का मास्टर प्लान?
Congress Azam Khan Strategy: रामपुर में स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अदीब से मुलाकात की। राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस दौरे से कांग्रेस और आजम खान को लेकर चर्चा तेज है।
Image Source- Social Media
Congress Azam Khan Strategy: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) में अभी वक्त है, लेकिन प्रदेश की सियासी शतरंज पर चालें तेज होती दिखाई दे रही हैं। चुनाव से पहले ही अलग-अलग दलों की ओर से सियासी बिसात पर अपने मोहरों को फिट करने की कोशिश शुरू हो गई है। इसी बीच रविवार को सामने आई एक तस्वीर ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (RSSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य रविवार को रामपुर पहुंचे। उनकी रामपुर यात्रा इसलिए खास रही, क्योंकि उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) के वरिष्ठ नेता आजम खान के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद यूपी के सियासी गलियारों में सवाल उठने लगा कि क्या कांग्रेस (Congress) आजम खान को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।
रामपुर में आजम खान के परिवार से मुलाकात
रविवार को स्वामी प्रसाद मौर्य रामपुर पहुंचे और उन्होंने आजम खान के परिवार से मुलाकात की। स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब से करीब 45 मिनट तक बातचीत की।
मुलाकात के बाद से ही इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि आखिर स्वामी प्रसाद मौर्य ने आजम खान के परिवार से इस वक्त मुलाकात क्यों की। खासकर इसलिए क्योंकि कुछ दिनों पहले ही स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी पार्टी को इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) में शामिल होने की बात कही थी।
यही वजह है कि उनकी रामपुर यात्रा को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बन रहे संभावित सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जाने लगा है।
राहुल और प्रियंका से भी हो चुकी है मुलाकात
स्वामी प्रसाद मौर्य की आजम खान के परिवार से मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाकात कर चुके हैं।
हालांकि स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसके बावजूद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद उनका सीधे रामपुर पहुंचना और आजम खान के परिवार से मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है।
इसी क्रम में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस आजम खान को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है और क्या स्वामी प्रसाद मौर्य इस पूरे सियासी समीकरण में किसी भूमिका में हैं।
मुलाकात पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने क्या कहा?
आजम खान के परिवार से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रदेश सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आजम खान के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की जा रही है, उसका लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।
हालांकि जब उनसे राहुल गांधी के साथ हुई हालिया मुलाकात को लेकर सवाल किया गया तो स्वामी प्रसाद मौर्य इस सवाल से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी रामपुर यात्रा पूरी तरह शिष्टाचार और परिवार का हालचाल जानने के लिए थी।
यानी स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुलाकात को सियासी रंग देने से इनकार किया, लेकिन उनकी यात्रा की टाइमिंग ने यूपी की राजनीति में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।
सपा से आजम खान के रिश्तों में आई तल्खी
आजम खान और समाजवादी पार्टी के बीच रिश्तों को लेकर भी लंबे समय से अलग-अलग चर्चाएं होती रही हैं। अक्टूबर 2023 में जब आजम खान जेल से बाहर आ रहे थे, तब मीडिया ने उनसे जेल में रहने के दौरान महसूस किए गए अनुभव को लेकर सवाल किया था।
इस सवाल के जवाब में आजम खान ने कहा था, "पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा, हाल हमारा जाने है।"
बॉलीवुड के मशहूर गाने और मीर की इस गजल की अगली लाइन है, "जाने न जाने गुल ही न जाने, बाग तो सारा जाने है।" आजम खान के इस शेर को उस समय उनके और अखिलेश यादव के रिश्तों से जोड़कर देखा गया था।
कभी मुलायम के बाद दूसरे नंबर पर माने जाते थे आजम
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले राज्यों में से एक है और आजम खान की गिनती प्रदेश के कद्दावर नेताओं में होती रही है। वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं।
आजम खान को लंबे समय तक मुलायम सिंह यादव के बाद समाजवादी पार्टी के दूसरे नंबर के नेता के तौर पर देखा जाता रहा। हालांकि अखिलेश यादव के पार्टी की कमान संभालने के बाद आजम खान और उनके बीच रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
दोनों नेताओं के बीच तल्खी का असर 2024 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) के दौरान भी देखने को मिला। उस समय जेल में बंद आजम खान ने चिट्ठी भेजकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
रामपुर सीट पर अखिलेश के फैसले से बढ़ी थी नाराजगी
2024 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने जेल में बंद आजम खान की इच्छा के विपरीत रामपुर से मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को प्रत्याशी बनाया था।
इस फैसले को भी आजम खान और अखिलेश यादव के बीच रिश्तों में आई तल्खी से जोड़कर देखा गया। रामपुर लंबे समय से आजम खान और उनके परिवार की राजनीतिक पहचान का मजबूत केंद्र रहा है। ऐसे में उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर किसी भी हलचल पर सियासी नजरें टिकना स्वाभाविक माना जाता है।
मुस्लिम वोटों पर सभी दलों की नजर
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी लगभग 20 प्रतिशत है। यही वजह है कि बीजेपी (BJP) के अलावा दूसरे राजनीतिक दल भी आजम खान जैसे प्रभावशाली मुस्लिम नेता और उनके राजनीतिक प्रभाव को महत्वपूर्ण मानते हैं।
रामपुर में आजम खान और उनके परिवार का अच्छा प्रभाव रहा है। ऐसे में समाजवादी पार्टी से उनके खराब होते रिश्तों के बीच अगर कांग्रेस आजम खान पर दांव लगाने की कोशिश करती है तो उसके लिए रामपुर से शुरू हुई यह मुलाकात महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।
फिलहाल कांग्रेस की ओर से आजम खान को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी अपनी रामपुर यात्रा को शिष्टाचार मुलाकात बताया है। लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से उनकी हालिया मुलाकात और इसके बाद आजम खान के परिवार से हुई बातचीत ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में सियासी समीकरणों को लेकर जिस तरह गतिविधियां बढ़ रही हैं, उसमें रामपुर की यह मुलाकात आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है, इस पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।


