Unnao News: BJP चेयरमैन का भ्रष्टाचार का 'सिक्सर': गाय के चारे से लेकर डस्टबिन घोटालों का कीर्तिमान

Unnao News: उन्नाव में बीजेपी चेयरमैन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। गाय के चारे से लेकर डस्टबिन खरीद में हुए घोटालों के इस 'सिक्सर' की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

Newstrack Network
Published on: 9 Jun 2026 6:56 PM IST (Updated on: 9 Jun 2026 6:58 PM IST)
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Unnao News: खजूर के पेड़ से लेकर गायों के चारे तक... अवैध खनन से लेकर कूड़े के डस्टबिन तक... नियुक्तियों से लेकर पड़ाव अड्डों से अवैध वसूली तक उन्नाव नगरपालिका मे घोटालो का ऐसा कीर्तिमान बनाया है जिसे देखने मे बाद शायद CM योगी मंचो से भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टोलरेंस के दावे करना अब छोड़ देंगे क्योंकि योगी सरकार के माथे पर घोटालो की ये कलंक कथा किसी और ने नहीं बल्कि उनकी अपनी ही पार्टी की उन्नाव नगरपालिका की चेयरमैन श्वेता मिश्रा ने लिखी है और ये महज़ कोई आरोप नहीं बल्कि जाँच मे भ्रष्टाचार के ऐसे प्रमाण मिले है जो ना सिर्फ नगरपालिका मे हुई महा लूट की गवाही दे रहे है बल्कि सूबे की योगी सरकार के मुंह पर कालिख पोत दी है

दरहसल साल 2023 मे लगभग 18 सालो बाद बीजेपी ने उन्नाव नगरपालिका मे अपना परचम लहराया था और श्वेता मिश्रा विकास की गंगा बहाने के दावे के साथ कुर्सी पर बैठी थी लेकिन सिर्फ शपथ ग्रहण तक....उसके बाद उनके पति भानु मिश्रा ने मैडम की चरण पादुका रखकर पूरी नगरपालिका को भ्रष्टाचार मे ऐसा डुबो दिया की मात्र 3 सालो मे घोटालो का ऐसा सिक्सर लगाया की गायों का चारा तक नहीं छोड़ा... एक के बाद एक चेयरमैन पति भ्रष्टाचार का कीर्तिमान बनाते चले गये अवैध खनन से लेकर पड़ाव अड्डों से अवैध वसूली तक भ्रष्टाचार का ऐसा खेल खेला गया की नगर पालिका "नरक" पालिका मे तब्दील हो गयी वही पालिका के इस भ्रष्टाचार की शिकायत ज़ब शासन मे हुई तो जाँच टीम गठित की गयी और 17 बिन्दुओ पर हुई जाँच मे 6 गंभीर आरोपों की जाँच मे पुष्टि हुई चलिए आप भी देखिये पत्नी की चरण पादुकाओ को रखकर चेयरमैन पति भानु मिश्रा ने आखिर घोटालो के कौन से कीर्तिमान बनाये है

श्रमिक आपूर्ति टेंडर में नियमों की अनदेखी

जांच में पाया गया कि श्रमिक आपूर्ति के लिए जेम पोर्टल पर जारी निविदाओं में शासनादेशों का पूर्ण पालन नहीं किया गया। कम दर देने वाली फर्मों को बिना स्पष्ट कारण बाहर कर निविदाएं निरस्त की गई। समिति ने माना की पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई और शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए।

गौशाला के लिए भूसा खरीद में गड़बड़ी

गौशाला के लिए भूसा और हरा चारा खरीद मामले में भी नगर पालिका द्वारा जेम की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया पहले जारी निविदाओं को निरस्त कर पुनः टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई जिसमें नियमों की अनदेखी सामने आई जांच समिति ने इस आरोप को भी पूरी तरह सिद्ध माना है।

खजूर के पेड़ों की खरीद पर उठे सवाल

अकरमपुर से गांधीनगर तिराहे और सरदार पटेल प्वॉइंट पर लगाए गए खजूर के पेड़ों की खरीद प्रक्रिया में भी गड़बड़ी सामने आई जांच में रिश्तेदारी का आरोप तो सिद्ध नहीं हुआ लेकिन समिति ने माना की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से होनी चाहिए थी जबकि ऐसा नहीं किया गया इस प्रक्रियागत अनियमितता माना गया है।

अवैध खनन का आरोप भी साबित

हुसैन नगर स्थित नगर पालिका के डंपिंग स्थल से अवैध खनन के आरोप की जांच में खान निरीक्षक ने लगभग 600 घनमीटर मिट्टी निकालने की पुष्टि की। नगर पालिका या नहीं बता सकी की निकल गई मिट्टी का उपयोग कहां किया गया। इसके चलते समिति ने इस आरोप को पूरी तरह सिद्ध माना है।

पड़ाव अड्डा संचालन में नियमों का उल्लंघन

सबसे गंभीर टिप्पणियों में से एक पड़ाव अड्डा संचालन से जुड़ी है जांच में पाया गया कि वर्ष 2024 - 25 में नियमित निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और पूर्व की फर्मों को कार्य विस्तार दे दिया गया। कुछ फर्मों को प्रतिबंधित करने में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया जिससे वह निविदा में भाग लेने से वंचित रहे समिति ने स्पष्ट कहा कि नियमों का पूर्ण पालन नहीं किया गया और आरोप सिद्ध होता है

स्वच्छ भारत मिशन में खर्च पर उठ रहे सवाल

स्वच्छ भारत मिशन के तहत डस्टबिन और अन्य सामग्री वितरण के मामले में पालिका द्वारा 4000 डस्टबिन खरीदने के दस्तावेज प्रस्तुत किए गए लेकिन वितरण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका इस आधार पर समिति ने इस आरोप को आंशिक रूप से सही माना है वही उन्नाव मेडिकल सेंटर,आशा हॉस्पिटल और सिटी गेस्ट हाउस जैसे प्रतिष्ठानों के गृहकर और जलकर निर्धारण की जांच में पाया गया कि निर्धारण गलत था शिकायत के बाद पुनः सही निर्धारण किया गया। समिति ने इस मामले में अनियमितता परिलक्षित होने की बात कही है।

15 दिन में जवाब नहीं तो करवाई

शासन ने नोटिस में कहा है कि अध्यक्ष के विरुद्ध प्रथम दृष्टया सिद्ध आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। यदि 15 दिनों के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया तो उपलब्ध अभिलेख और तथ्यों के आधार पर उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 48 के अंतर्गत कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।

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