UP VIP Seats 2027: UP की इन VIP सीटों पर आज भी BJP की पकड़ कमजोर! जानिए 2027 में यहां कैसे खिलेगा कमल

UP VIP Seats 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बीजेपी ने 'मिशन हारी हुई सीटें' के तहत करहल, कुंडा और सिराथू जैसी वीआईपी सीटों पर खास घेराबंदी शुरू की है। अखिलेश यादव के गढ़ और राजा भैया के साम्राज्य को चुनौती देने के लिए क्या है बीजेपी और सपा के पीडीए (PDA) का प्लान, जानिए पूरा विश्लेषण।

Harsh Srivastava
Published on: 4 Jun 2026 10:44 AM IST
UP VIP Seats 2027: UP की इन VIP सीटों पर आज भी BJP की पकड़ कमजोर! जानिए 2027 में यहां कैसे खिलेगा कमल
X

UP VIP Seats 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति को देश की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है। यही कारण है कि साल 2027 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक, राजनीतिक बिसात बिछाई जाने लगी है। उत्तर प्रदेश फतह करने के लिए सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जहां सत्ता की हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से अपनी पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' पिछले लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित होकर बीजेपी के इस विजयी रथ को रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

इस महामुकाबले में सबसे ज्यादा चर्चा उत्तर प्रदेश की वीआईपी सीटों की हो रही है। यूपी में कई ऐसी विधानसभा सीटें हैं जो न सिर्फ राजनीतिक रूप से बेहद रसूखदार मानी जाती हैं, बल्कि वहां का चुनावी नतीजा पूरे प्रदेश का मिजाज तय करता है। हालांकि, लगातार मजबूत संगठन और बड़े चेहरों के बावजूद बीजेपी के सामने सूबे में कुछ ऐसी सीटें आज भी चुनौती बनी हुई हैं, जहां उसकी पकड़ पारंपरिक रूप से बेहद कमजोर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों और पिछले चुनावी आंकड़ों के अध्ययन से यह साफ होता है कि इन सीटों पर सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे बीजेपी के समीकरणों पर भारी पड़ते रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि वे कौन सी वीआईपी सीटें हैं जहां कमल खिलाना बीजेपी के लिए आज भी एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।

करहल विधानसभा सीट: समाजवादियों का अभेद्य किला

मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी वीआईपी सीटों में शुमार की जाती है। इस सीट को समाजवादी पार्टी का एक ऐसा अभेद्य किला माना जाता है जिसे ढहाना किसी भी विरोधी दल के लिए लगभग असंभव रहा है। यादव और मुस्लिम मतदाताओं की भारी संख्या के कारण यह सीट हमेशा सपा के पाले में रही है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव खुद यहां से मैदान में उतरे थे।

पिछले चुनाव यानी साल 2022 के आंकड़ों पर गौर करें तो इस सीट पर बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की थी। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में अखिलेश यादव को इस सीट पर 1,48,196 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के एसपी सिंह बघेल को 80,692 वोटों से संतोष करना पड़ा था। अखिलेश यादव ने यह चुनाव 67,504 वोटों के भारी अंतर से जीता था।

राजनीतिक विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, साल 2027 के चुनाव में भी इस सीट पर समीकरणों में बहुत बड़ा बदलाव होने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है। हालांकि, बीजेपी इस बार अति-पिछड़े और गैर-यादव ओबीसी मतों को अपने पक्ष में पूरी तरह एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। अनुमानों के मुताबिक, अगर बीजेपी अपनी नई रणनीति में सफल रहती है तो वह साल 2027 में अपने वोट शेयर को बढ़ाकर लगभग 95,000 से 1,00,000 वोटों तक पहुंचा सकती है, लेकिन सीट पर जीत दर्ज करने के लिए उसे अभी और भी कड़े जमीनी संघर्ष की जरूरत होगी।

कुंडा विधानसभा सीट: राजा भैया का अटूट साम्राज्य

प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग ही पहचान रखती है। इस सीट पर किसी पार्टी की लहर काम नहीं करती, बल्कि यहां सिर्फ एक नाम चलता है और वह है जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया। राजा भैया साल 1993 से लगातार इस सीट से निर्दलीय या अपनी पार्टी के बैनर तले चुनाव जीतते आ रहे हैं। बीजेपी ने इस सीट पर कई बार मजबूत उम्मीदवार उतारे, लेकिन राजा भैया के रसूख के आगे सब बेअसर साबित हुए।

साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कुंडा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था, क्योंकि समाजवादी पार्टी ने राजा भैया के पुराने साथी गुलशन यादव को मैदान में उतार दिया था। उस चुनाव में राजा भैया को कुल 99,612 वोट मिले थे। वहीं, समाजवादी पार्टी के गुलशन यादव को 69,407 वोट प्राप्त हुए थे। इस कड़े मुकाबले में बीजेपी के उम्मीदवार सिंधुजा मिश्रा महज 16,474 वोट ही हासिल कर पाए थे और उनकी जमानत तक जब्त होने की नौबत आ गई थी।

साल 2027 के आगामी चुनाव को लेकर स्थानीय राजनीतिक पंडितों का मानना है कि कुंडा में राजा भैया का व्यक्तिगत प्रभाव आज भी वैसा ही बना हुआ है। बीजेपी के लिए यहां सबसे बड़ी कमजोरी एक मजबूत स्थानीय चेहरे की कमी और सवर्ण मतदाताओं का राजा भैया के प्रति एकतरफा झुकाव है। अनुमानों के अनुसार, साल 2027 के चुनाव में बीजेपी इस सीट पर अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए किसी नए और प्रभावशाली स्थानीय चेहरे पर दांव खेल सकती है, जिससे उसका वोट बैंक बढ़कर 35,000 से 45,000 के बीच पहुंच सकता है, लेकिन राजा भैया के साम्राज्य को हिला पाना अभी भी दूर की कौड़ी नजर आता है।

सिराथू विधानसभा सीट: साख की लड़ाई और जातीय चक्रव्यूह

कौशांबी जिले की सिराथू विधानसभा सीट साल 2022 में उस समय देश भर की सुर्खियों में आ गई थी, जब यहां से उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य चुनाव मैदान में उतरे थे। यह सीट बीजेपी के लिए इतनी सुरक्षित मानी जा रही थी कि किसी ने मौर्य की हार की कल्पना तक नहीं की थी। लेकिन समाजवादी पार्टी ने अपना दल (कमेरावादी) की पल्लवी पटेल को गठबंधन के तहत उतारकर पूरा पासा ही पलट दिया।

साल 2022 के चुनाव नतीजों के अनुसार, पल्लवी पटेल ने एक बेहद कड़े और नाटकीय मुकाबले में केशव प्रसाद मौर्य को हरा दिया था। पल्लवी पटेल को कुल 1,06,278 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के कद्दावर नेता केशव प्रसाद मौर्य को 98,941 वोट मिले थे। मौर्य यह चुनाव 7,337 वोटों के मामूली अंतर से हार गए थे। इस सीट पर हार का मुख्य कारण कौशांबी इलाके में मौर्य, पटेल और दलित मतदाताओं का एक नया सामाजिक गठबंधन बनना था, जिसने बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाई थी।

साल 2027 के चुनाव के लिए बीजेपी सिराथू सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी है। पार्टी के भीतर इस सीट को वापस जीतने के लिए जमीनी स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट शुरू कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट और राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि 2027 में बीजेपी इस सीट पर गैर-यादव पिछड़े वोटों को दोबारा अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाएगी। अनुमान है कि कड़े परिश्रम की बदौलत बीजेपी यहां 2027 में अपने वोटों की संख्या को बढ़ाकर 1,10,000 के पार ले जा सकती है, जिससे वह इस सीट पर दोबारा वापसी करने में कामयाब हो सकती है।

जसकौर और रामपुर: मुस्लिम बहुल सीटों पर पकड़ मजबूत करने की चुनौती

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रामपुर और स्वार जैसी सीटें लंबे समय से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के प्रभाव में रही हैं। हालांकि, हालिया उपचुनावों में कानूनी दांवपेच के कारण बीजेपी ने यहां जीत का स्वाद चखा है, लेकिन आज भी आम चुनाव के लिहाज से इन सीटों पर बीजेपी की पकड़ को बहुत मजबूत नहीं कहा जा सकता। इसी तरह आजमगढ़ जिले की अतरौलिया और निजामाबाद जैसी सीटें भी बीजेपी के लिए हमेशा से राजनीतिक रूप से बंजर रही हैं।

आजमगढ़ की बात करें तो साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी 10 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने क्लीन स्वीप किया था। अतरौलिया सीट पर सपा के डॉ. संग्राम यादव को 82,924 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी के निषाद पार्टी गठबंधन उम्मीदवार को केवल 65,148 वोट ही मिल पाए थे। वहीं निजामाबाद सीट पर सपा के आलम बदी को 67,440 वोट मिले थे और बीजेपी के उम्मीदवार को 33,253 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था।

इन मुस्लिम और यादव बहुल सीटों पर बीजेपी की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि यहां उसका कोर वोटर अल्पसंख्यक और कुछ विशेष पिछड़ी जातियों के कड़े ध्रुवीकरण के सामने अल्पसंख्यक हो जाता है। साल 2027 के चुनाव के लिए बीजेपी ने इन सीटों पर 'पसमांदा मुस्लिम' कार्ड खेलने और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को अपने साथ जोड़ने की योजना बनाई है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह प्रयोग जमीनी स्तर पर थोड़ा भी सफल रहता है, तो साल 2027 में बीजेपी इन कमजोर सीटों पर अपने वोट प्रतिशत में 10 से 15 प्रतिशत तक का सुधार कर सकती है, जिससे इन सीटों पर मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और दिलचस्प हो जाएगा।

VIP सीटों का चुनावी गणित:

विधानसभा सीट

2022 का चुनावी नतीजा (वोट)

2027 का राजनीतिक अनुमान व चुनौती

करहल (मैनपुरी)

अखिलेश यादव (सपा): 1,48,196

प्रो. एसपी सिंह बघेल (बीजेपी): 80,692

सपा का अभेद्य किला:

BJP गैर-यादव OBC मतों को एकजुट कर वोट बैंक 1 लाख तक ले जाने की रणनीति में है।

कुंडा (प्रतापगढ़)

राजा भैया (जनसत्ता दल): 99,612

गुलशन यादव (सपा): 69,407

सिंधुजा मिश्रा (बीजेपी): 16,474

राजा भैया का एकतरफा दबदबा:

बीजेपी वोट शेयर 45,000 तक बढ़ाने के लिए नए स्थानीय चेहरे की तलाश में है।

सिराथू (कौशांबी)

पल्लवी पटेल (सपा गठबंधन): 1,06,278

केशव प्रसाद मौर्य (बीजेपी): 98,941

बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई:

गैर-यादव पिछड़े वोटों के माइक्रो-मैनेजमेंट से 1.10 लाख पार जाने का लक्ष्य।

निजामाबाद/अतरौलिया

सपा: क्लीन स्वीप (सभी 10 सीटें आजमगढ़ में)

बीजेपी: रनर-अप

मुस्लिम-यादव बाहुल्य क्षेत्र:

बीजेपी का 'पसमांदा मुस्लिम' कार्ड और सरकारी लाभार्थियों से सीधा संपर्क।


क्या रणनीति अपना रही है बीजेपी

साल 2027 के महासमर को जीतने के लिए बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इन कमजोर और वीआईपी सीटों के लिए एक विशेष योजना तैयार की है, जिसे 'मिशन हारी हुई सीटें' नाम दिया गया है। इस रणनीति के तहत पार्टी के बड़े केंद्रीय मंत्रियों और राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों को इन कमजोर विधानसभा क्षेत्रों का प्रभारी बनाया गया है। ये नेता लगातार इन क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

बीजेपी का मुख्य फोकस इस बात पर है कि विपक्षी दलों के पारंपरिक जातीय वोट बैंक में किस तरह सेंध लगाई जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे जातीय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है और कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुफ्त राशन, आवास योजना और किसान सम्मान निधि के लाभार्थियों से सीधा संपर्क साधा जा रहा है।

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी भी शांत नहीं बैठी है। वह अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और अधिक धार दे रही है ताकि बीजेपी की किसी भी कोशिश को नाकाम किया जा सके। उत्तर प्रदेश की जनता इस समय दोनों पक्षों की इस बिसात को बहुत करीब से देख रही है। यह तो साफ है कि साल 2027 का चुनाव केवल नंबरों का खेल नहीं होगा, बल्कि यह इस बात की परीक्षा होगी कि कौन सा दल जनता की नब्ज को बेहतर तरीके से टटोल पाता है। इन वीआईपी और कमजोर सीटों के परिणाम ही तय करेंगे कि लखनऊ के सिंहासन पर 2027 में किसका राजतिलक होगा।

Harsh Srivastava
ABOUT THE AUTHOR

Harsh Srivastava

Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

Next Story