UP News: 2 साल की कानूनी जंग जीते, पर सिस्टम से हारे: लखनऊ में आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों का न्याय के लिए हल्लाबोल

UP News: उत्तर प्रदेश में आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट भर्ती 2024 को लेकर अभ्यर्थियों ने लखनऊ में आयुष राज्यमंत्री आवास का घेराव किया। कोर्ट से पक्ष में फैसला मिलने के बावजूद परीक्षा तिथि न जारी होने से नाराजगी बढ़ी।

Ashutosh Tripathi
Published on: 4 Jun 2026 2:07 PM IST (Updated on: 4 Jun 2026 2:07 PM IST)
Lucknow Protest
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Lucknow Protest

UP News: उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को एक तरफ जहां सरकार बेहतर बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ भविष्य के आयुर्वेदिक फार्मासिस्ट आज सड़कों पर पुलिस की लाठियां और हिरासत झेलने को मजबूर हैं। गुरुवार को राजधानी के वीआईपी इलाके डालीबाग में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब भारी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों ने आयुष राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र दयालू के आवास का घेराव कर दिया।

हवा में गूंजते योगी बाबा न्याय करो, न्याय करो के नारों के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया। लेकिन इस प्रदर्शन ने प्रदेश की आयुष स्वास्थ्य सेवाओं की एक ऐसी हकीकत सामने ला दी है, जो बेहद चिंताजनक है।


​कोर्ट से तो जीते, मगर तारीख के फेर में फंसा भविष्य

दरअसल, साल 2024 में आयुर्वेदिक फार्मासिस्टों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो आवेदन के तुरंत बाद ही कानूनी दांव-पेच में उलझ गई। अभ्यर्थियों ने हार नहीं मानी और पूरे 2 साल तक माननीय अदालत में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।

​हाल ही में कोर्ट का फैसला अभ्यर्थियों के पक्ष में आया, अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद भी विभागीय सुस्ती के कारण न तो अब तक परीक्षा का सिलेबस जारी हुआ है और न ही एग्जाम की डेट घोषित की गई है। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि जब कोर्ट से न्याय मिल चुका है, तो सरकार और अधिकारी इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में देरी क्यों कर रहे हैं?

​उम्मीदें टूट रही हैं...कंधों पर बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी

​प्रदर्शन में शामिल मयंक राय ने कहा कि बूढ़े माता-पिता ने पेट काटकर हमें पढ़ाया कि बेटा फार्मासिस्ट बनकर घर का सहारा बनेगा। पूरे परिवार की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर है। अगर यह नौकरी समय पर नहीं मिली, तो हमारे घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा। हम मंत्री जी के दरवाजे पर भीख मांगने नहीं, अपना हक और इंसाफ मांगने आए थे।

Ashutosh Tripathi
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Ashutosh Tripathi

आशुतोष त्रिपाठी जन्म 17 अप्रैल 1988 एक भारतीय फोटोग्राफर और फोटो जर्नलिस्ट हैं। पत्रकारिता जीवन की शुरुआत बतौर रिपोर्टर वॉइस ऑफ़ मूवमेंट में हुई, इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। आशुतोष त्रिपाठी ने 2007 में एमिटी विश्वविद्यालय से मास्टर इन जर्नलिस्म एंड मास कम्युनिकेशन का कोर्स किया। 2010 में वौइस् ऑफ मूवमेंट अखबार में बतौर रिपोर्टर तीन साल काम किया। इसके बाद 2013 में नव भारत टाइम्स में एक युवा फोटो जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत थे। 2014 में एक फोटोग्राफर बने और एक साल बाद दैनिक भास्कर उत्तर प्रदेश में सीनियर फोटोजर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। 2016 से लगातार newstrack.com में चीफ फोटोजर्नलिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। 2015 में एक इनके द्वारा की गयी एक बुजुर्ग टाइपिस्ट की स्टोरी ने पूरी दुनिया ख्याति प्राप्त की। 2016 में इन्हें पत्रकारिता जगत में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए नारद पुरुस्कार से सम्मानित किया गया था । 2017 में फोटोग्राफी क्लब ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित इंटरनेशनल फोटोग्राफी कम्पटीशन में इन्होंने दूसरा स्थान हासिल किया । 2019 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित कुंभ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में इन्होंने तृतीय पुरुस्कार मिला था ।।

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