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विस्थापित हिंदू बंगाली परिवारों के लिए योगी सरकार का बड़ा फैसला, 90 साल के पट्टे पर मिलेगी जमीन!
योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला! पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 107 हिंदू बंगाली परिवारों को मिलेगा स्थायी आशियाना। मेरठ से कानपुर देहात में होगा पुनर्वास, प्रत्येक परिवार को मिलेगी आधा एकड़ जमीन और 90 साल का पट्टा।
UP Cabinet rehabilitation displaced Hindu families: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए दशकों से दर-दर भटक रहे विस्थापित परिवारों के लिए खुशियों का द्वार खोल दिया है। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से विस्थापित होकर मेरठ में रह रहे 107 हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह फैसला उन परिवारों के लिए एक नई सुबह की तरह है जो पिछले कई दशकों से अनिश्चितता के साये में जी रहे थे।
40 साल का इंतजार खत्म
मेरठ जनपद की मवाना तहसील के अंतर्गत ग्राम नगला गोसाई में ये परिवार लंबे समय से झील की भूमि पर अस्थायी रूप से निवास कर रहे थे। चूंकि यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में झील के रूप में दर्ज थी, इसलिए यहां उनका निवास अवैध माना जाता था। कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, इन परिवारों को अब वहां से हटाकर कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में स्थायी रूप से बसाया जाएगा। रिकॉर्ड के मुताबिक, कुल 107 परिवारों में से 8 परिवार पिछले कई वर्षों से रोजगार के सिलसिले में कहीं और रह रहे हैं, जबकि वर्तमान में वहां रह रहे सभी 99 परिवारों को तत्काल प्रभाव से पुनर्वासित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि शेष 8 परिवारों के वापस लौटने पर उनके लिए भी पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी।
90 साल का अधिकार
खेती के लिए जमीन और पक्के आवास की गारंटी, सरकार ने इन विस्थापितों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक बेहद मजबूत योजना तैयार की है। प्रत्येक परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आधा एकड़ कृषि भूमि आवंटित की जाएगी। पुनर्वासन की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
लंबी अवधि का पट्टा
यह जमीन प्रारंभिक रूप से 30 वर्ष के पट्टे (Lease) पर दी जाएगी। इस पट्टे को 30-30 वर्ष के लिए दो बार रिन्यू करने का प्रावधान है, जिससे ये परिवार कुल 90 वर्ष तक उस भूमि पर अपना अधिकार रख सकेंगे। कानपुर देहात में नया आशियाना: इन परिवारों को कानपुर देहात के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग की भूमि पर बसाया जाएगा।
'सम्मानजनक जीवन' का संकल्प
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लिया गया यह निर्णय केवल जमीन का आवंटन नहीं है, बल्कि उन विस्थापितों को 'सम्मानजनक जीवन' देने की कोशिश है जो विभाजन और विस्थापन का दंश झेलकर भारत आए थे। मेरठ की 'रामगढ़ बंगाली बस्ती' के नाम से मशहूर इस इलाके के लोग लंबे समय से स्थायी पट्टे की मांग कर रहे थे। इस योजना से न केवल पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील झील की भूमि अतिक्रमण मुक्त होगी, बल्कि विस्थापित परिवारों को खेती के लिए पर्याप्त जमीन और सिर पर पक्की छत भी नसीब होगी। सरकार का यह कदम देशभर में विस्थापित हिंदुओं के पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।


