आप यूपी से हैं तो कहीं अगला नंबर आपका तो नहीं! बस एक कॉल में बैंक खाता हो रहा खाली

UP में 6 महीने में करीब 1.85 लाख साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हुईं। जानिए फोन पर कौन सी 5 गलतियां आपका बैंक अकाउंट खाली करा सकती हैं और ठगी होने पर तुरंत क्या करें।

Snigdha Singh
Published on: 24 Sept 2026 12:58 PM IST
आप यूपी से हैं तो कहीं अगला नंबर आपका तो नहीं! बस एक कॉल में बैंक खाता हो रहा खाली
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Cyber Fraud in UP: फोन बजा... सामने वाले ने कहा, आपके नाम से एक पार्सल पकड़ा गया है। दूसरा फोन आया, आपका बैंक खाता बंद होने वाला है, तुरंत KYC अपडेट कीजिए। WhatsApp पर मैसेज आया - आपका बिजली बिल बाकी है, आज रात कनेक्शन कट जाएगा। किसी ने कहा, घर बैठे निवेश कीजिए, हर महीने मोटा रिटर्न मिलेगा। और कई बार स्क्रीन पर पुलिस अधिकारी जैसी वर्दी पहने कोई शख्स दिखाई देता है और कहता है आपके खिलाफ केस है, वीडियो कॉल मत काटिए।

इन सभी कहानियों में किरदार अलग हो सकते हैं लेकिन मकसद एक ही है आपको डराना या लालच देना और आपके बैंक खाते तक पहुंचना। उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए साइबर फ्रॉड का खतरा कितना बड़ा हो चुका है, इसका अंदाजा 2026 के शुरुआती छह महीनों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है।जनवरी से जून 2026 के बीच देशभर में साइबर फ्रॉड की 12.71 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें सबसे ज्यादा करीब 1.85 लाख शिकायतें अकेले उत्तर प्रदेश से थीं। यानी शिकायतों की संख्या के मामले में UP देश में सबसे ऊपर रहा। और मामला सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं है। इसी अवधि में उत्तर प्रदेश में साइबर फ्रॉड से जुड़े Reported Fraudulent Transactions की रकम करीब ₹734.19 करोड़ रही। पूरे देश में यह आंकड़ा ₹10,178 करोड़ से अधिक था।

साइबर अपराधी कभी बैंक अधिकारी बनकर फोन कर रहे हैं, कभी KYC अपडेट करने के नाम पर लिंक भेज रहे हैं तो कभी पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखा रहे हैं। निवेश पर मोटे मुनाफे का लालच भी ठगी का बड़ा जरिया बन चुका है। ऐसे में फोन इस्तेमाल करते समय आपकी पांच छोटी गलतियां बैंक अकाउंट पर भारी पड़ सकती हैं।

पहली गलती- अनजान लिंक पर क्लिक करना

'आपकी KYC खत्म हो गई', 'बिजली कनेक्शन कट जाएगा', 'FASTag बंद होने वाला है' या 'आपका पार्सल अटक गया है' ऐसे मैसेज के साथ आए लिंक पर तुरंत क्लिक न करें। लिंक असली बैंक या सरकारी वेबसाइट जैसा दिखाई दे सकता है लेकिन आपको फर्जी पेज पर ले जाकर बैंकिंग जानकारी चुरा सकता है।

दूसरी गलती- OTP और UPI PIN बता देना

OTP, UPI PIN, CVV और बैंकिंग पासवर्ड किसी को न बताएं। सामने वाला खुद को बैंक कर्मचारी या अधिकारी बताए तब भी जानकारी शेयर न करें। बैंक संबंधी कोई संदेह हो तो फोन काटकर बैंक के आधिकारिक नंबर पर खुद कॉल करें।

तीसरी गलती- पैसे लेने के लिए UPI PIN डालना

इस बात को गांठ बांध लीजिए कि सामान्य UPI लेनदेन में पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। ठग refund या prize के नाम पर QR code scan करवाकर PIN डलवा सकते हैं। PIN डालते ही पैसे आने के बजाय आपके खाते से जा सकते हैं।

चौथी गलती- अनजान ऐप डाउनलोड करना

आपकी समस्या अभी ठीक कर देता हूं, यह ऐप डाउनलोड कीजिए' इस तरह की बात सुनकर सावधान हो जाएं। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर remote-access या screen-sharing ऐप इंस्टॉल न करें। इससे फोन की स्क्रीन पर दिखाई देने वाली संवेदनशील जानकारी खतरे में पड़ सकती है।

पांचवीं गलती- ‘Digital Arrest’ से डरकर पैसे भेजना

अगर कोई वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, CBI या दूसरी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर कहता है कि आप ‘Digital Arrest’ में हैं और verification के लिए पैसे ट्रांसफर करने होंगे तो पैसे न भेजें। फोन काटकर संबंधित एजेंसी के आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करें।

पैसे कट गए तो सबसे पहले क्या करें?

साइबर ठगी होने के बाद सबसे बड़ी गलती शर्म या डर के कारण शिकायत में देरी करना है। वित्तीय साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और National Cyber Crime Reporting Portal पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, संदिग्ध रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की प्रक्रिया उतनी जल्दी शुरू हो सकती है।

देशभर में जनवरी-जून 2026 के दौरान Reported Fraudulent Transactions की रकम 10,178 करोड़ रुपये से अधिक रही। इसमें करीब 2,968 करोड़ रुपये पर banks ने lien/hold लगाया।

इसलिए मोबाइल चलाते समय एक छोटा सा फॉर्मूला याद रखिए OTP-PIN किसी को नहीं, अनजान लिंक पर क्लिक नहीं, पैसे पाने के लिए PIN नहीं, अनजान ऐप डाउनलोड नहीं और ‘Digital Arrest’ के नाम पर पैसा ट्रांसफर नहीं। क्योंकि साइबर ठग को हमेशा आपका फोन हैक करने की जरूरत नहीं होती। कई बार आपके बैंक खाते तक पहुंचने के लिए आपका एक क्लिक ही काफी होता है।

अगली घंटी आपके फोन पर भी बज सकती है। फर्क सिर्फ इतना होगा कि सामने वाले की कहानी सुनकर आप घबराते हैं या फोन काटकर पहले उसकी सच्चाई जांचते हैं।

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