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BJP क्यों खोज रही 2012 के ‘बच्चे’? 2027 में अखिलेश के सामने कैसे खड़ी होगी Gen-Z की चुनौती
UP Election 2027: BJP की नजर उन Gen-Z और युवा वोटरों पर है, जो 2012 में बच्चे थे और अखिलेश यादव की सरकार को राजनीतिक तौर पर याद नहीं करते। जानिए 2027 से पहले BJP क्यों उन्हें 2012-17 के पांच साल की याद दिलाना चाहती है और क्या है पूरा चुनावी प्लान।
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव में BJP और समाजवादी पार्टी के बीच लड़ाई सिर्फ जातीय समीकरण, उम्मीदवार और गठबंधन की नहीं होगी। एक लड़ाई याददाश्त की भी होगी।
कारण बेहद दिलचस्प है। 2027 में 18 से 22 साल की उम्र के लाखों युवा ऐसे होंगे, जो अखिलेश यादव की 2012 से 2017 वाली सरकार के समय या तो बहुत छोटे थे या स्कूल में पढ़ रहे थे। उनमें से बड़ी संख्या ने उस दौर की राजनीति को मतदाता की नजर से देखा ही नहीं। यानी BJP पिछले कई चुनावों में जिस पुराने राजनीतिक नैरेटिव 2012-17 के दौरान कानून-व्यवस्था और शासन को लेकर SP पर हमले का इस्तेमाल करती रही है, नई पीढ़ी के लिए उसकी याद स्वाभाविक नहीं है। अब BJP इसी “generation gap” को भरने की तैयारी कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश में कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक पहुंचने के लिए ‘सार्थक युवा संवाद’ नाम से एक अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं से BJP सांसद, विधायक और MLC संवाद करेंगे। सवाल यही है 2027 से पहले BJP को अचानक 2012 की कहानी क्यों याद आ रही है?
2027 का नया वोटर तब कितने साल का था?
सबसे पहले उम्र का गणित समझिए। अगर 2027 में कोई मतदाता 18 साल का होगा तो उसका जन्म लगभग 2008-09 के आसपास हुआ होगा। 2012 में वह करीब 3-4 साल का था और 2017 में लगभग 8-9 साल का। इसी तरह 2027 में 22 साल का मतदाता 2012 में करीब 7 और 2017 में लगभग 12 साल का रहा होगा। यानी 18 से 22 साल का एक बड़ा वोटर वर्ग अखिलेश सरकार के दौर को राजनीतिक अनुभव की तरह नहीं बल्कि परिवार, सोशल मीडिया, राजनीतिक दलों या बाद में सुनी गई कहानियों के जरिए जानता है।
रिपोर्ट में भी इसी बिंदु को BJP की रणनीति के केंद्र में बताया गया है। BJP युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा के मुताबिक पार्टी मानती है कि बड़ी संख्या में युवा यह समझते हैं कि आज जैसी परिस्थितियां हैं, वैसी ही 2012-17 में भी रही होंगी; इसलिए पार्टी दोनों सरकारों के रिकॉर्ड की तुलना युवाओं के सामने रखना चाहती है।
BJP का प्लान क्या है?
BJP युवा मोर्चा का प्रस्तावित अभियान सामान्य बड़ी रैलियों से थोड़ा अलग रखने की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में युवाओं के साथ सीधे संवाद करेगी। BJP के सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य इन कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं।
पार्टी जिन मुद्दों पर तुलना पेश करना चाहती है उनमें कानून-व्यवस्था, अपराध, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक सौहार्द शामिल हैं। BJP ने 2012-17 की SP सरकार के लिए लंबे समय से “जंगलराज” शब्द का इस्तेमाल किया है। यह BJP का राजनीतिक आरोप है, कोई निष्पक्ष सरकारी वर्गीकरण नहीं। पार्टी की योजना NCRB समेत दूसरे आधिकारिक आंकड़ों को इस्तेमाल कर अपने दावे को युवाओं के सामने रखने की है।
लेकिन BJP सिर्फ पुरानी सरकार की कहानी नहीं सुनाएगी
इस अभियान की दूसरी दिलचस्प बात यह है कि BJP सिर्फ अखिलेश सरकार पर हमला करने की योजना नहीं बना रही। रिपोर्ट के मुताबिक युवा मोर्चा छात्रों से उनकी मौजूदा समस्याएं और सरकार से अपेक्षाएं भी पूछना चाहता है। यानी अभियान दोतरफा होगा। एक तरफ BJP यह बताएगी कि उसके मुताबिक 2012-17 और 2017 के बाद के शासन में क्या अंतर रहा। दूसरी तरफ मौजूदा सरकार को लेकर युवाओं की नाराजगी, रोजगार, शिक्षा और दूसरे मुद्दों पर feedback लेने की भी तैयारी है। यही हिस्सा BJP के लिए सबसे महत्वपूर्ण भी हो सकता है, क्योंकि नई पीढ़ी का अपना राजनीतिक अनुभव वर्तमान सरकार से जुड़ा है, पुरानी SP सरकार से नहीं।
नई पीढ़ी BJP के लिए आसान वोटर क्यों नहीं?
यहां राजनीति का दूसरा पहलू भी समझना जरूरी है। 2027 में पहली बार विधानसभा चुनाव में वोट देने वाला युवा 2017 में बहुत छोटा था। उसने अपने किशोर और युवा जीवन का लगभग पूरा समय BJP सरकार के दौरान देखा है।
इसलिए रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, पेपर लीक, सरकारी भर्ती, शिक्षा, महंगाई, डिजिटल अवसर और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर उसका आकलन मुख्य रूप से वर्तमान शासन के अनुभव पर आधारित होगा।
यही वजह है कि BJP की रणनीति केवल “SP सरकार कैसी थी” बताने तक सीमित नहीं रह सकती। पार्टी को यह भी समझाना होगा कि मौजूदा सरकार ने युवाओं के लिए क्या किया और आगे क्या करने वाली है।
रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अभियान में युवाओं की मौजूदा अपेक्षाओं और शिकायतों को सुनने की कोशिश होगी। साथ ही CM योगी आदित्यनाथ की ओर से अगले छह महीने में एक लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां देने के वादे का भी उल्लेख है।
2024 ने भी BJP को दिया था एक संकेत
युवा वोटर पर फोकस को 2024 लोकसभा चुनाव के संदर्भ से भी समझा जा सकता है। उत्तर प्रदेश में BJP की लोकसभा सीटें 2019 की 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई थीं, जबकि SP ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीती थीं। इस नतीजे के बाद BJP ने सामाजिक और संगठनात्मक स्तर पर अलग-अलग मतदाता समूहों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति पर जोर दिया है।
युवाओं को लेकर अब शुरू हो रहा अभियान उसी बड़ी 2027 तैयारी का एक हिस्सा माना जा सकता है। यह जरूरी नहीं कि 2024 में किसी खास आयु वर्ग ने किस पार्टी को कितनी संख्या में वोट दिया उस पर अलग-अलग सर्वे अलग अनुमान देते हैं। लेकिन राजनीतिक दलों के लिए युवा मतदाताओं का आकार अपने आप में बड़ा कारण है। चुनाव आयोग के मुताबिक 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कुल 15.44 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाता थे। देशभर में उस चुनाव में 18-19 आयु वर्ग के 1.84 करोड़ से ज्यादा मतदाता पंजीकृत थे। 2027 तक इनमें नई आयु-पीढ़ियां भी जुड़ जाएंगी।
अखिलेश के लिए इसका क्या मतलब?
BJP अगर 2012-17 के शासन को फिर चुनावी मुद्दा बनाती है तो समाजवादी पार्टी के सामने भी चुनौती होगी। SP को सिर्फ BJP के आरोपों का जवाब नहीं देना होगा बल्कि उन मतदाताओं को अपनी सरकार की अपनी कहानी बतानी होगी जिन्होंने वह दौर खुद राजनीतिक रूप से देखा ही नहीं। अखिलेश यादव और SP लंबे समय से 2012-17 के अपने कार्यकाल को एक्सप्रेसवे, मेट्रो, लैपटॉप योजना, डायल-100 और दूसरे विकास कार्यों से जोड़कर पेश करते रहे हैं। इसलिए 2027 का युवा संवाद सिर्फ BJP का हमला नहीं होगा।
यह संभव है कि दोनों पार्टियां एक ही पांच साल के शासन को बिल्कुल अलग राजनीतिक कहानी के रूप में पेश करें। BJP का नैरेटिव कानून-व्यवस्था और शासन पर केंद्रित होगा। SP अपनी तरफ से विकास परियोजनाओं और योजनाओं का रिकॉर्ड सामने रख सकती है। और अंतिम फैसला उस मतदाता का होगा जो उस दौर की अपनी याद के बजाय दोनों पक्षों के दावों और आज के अनुभव को तौलेगा।
असली लड़ाई 2012 की याद या 2027 की जरूरत?
यहीं 2027 के चुनाव का सबसे दिलचस्प मोड़ छिपा है। BJP के लिए पुरानी SP सरकार का रिकॉर्ड एक स्थापित राजनीतिक हथियार रहा है। लेकिन 2027 में वह हथियार ऐसी पीढ़ी के सामने इस्तेमाल होगा जिसे वह दौर याद ही नहीं है। इसलिए BJP को पहली बार सिर्फ पुरानी सरकार पर हमला नहीं करना होगा उसे पुरानी कहानी नई पीढ़ी को समझानी भी होगी।
दूसरी तरफ SP के पास मौका होगा कि वह कहे कि 2012-17 को BJP की भाषा से नहीं बल्कि उसके विकास रिकॉर्ड से देखा जाए। और तीसरी बात, जो शायद दोनों के लिए सबसे कठिन है युवा मतदाता केवल पुराने पांच साल की बात नहीं सुनेगा। वह पूछ सकता है कि 2027 के बाद उसके लिए नौकरी कहां है, परीक्षा समय पर होगी या नहीं, शिक्षा कैसी होगी और उसकी जिंदगी में अगली सरकार क्या बदलेगी?
यही वजह है कि BJP का प्रस्तावित ‘सार्थक युवा संवाद’ सिर्फ एक प्रचार कार्यक्रम नहीं बल्कि 2027 की बड़ी चुनावी लड़ाई के एक नए मोर्चे का संकेत है। इस बार मुकाबला केवल योगी बनाम अखिलेश नहीं होगा। एक तरफ होगी 2012-17 की राजनीतिक याद, दूसरी तरफ 2017-27 का व्यक्तिगत अनुभव और बीच में खड़ा होगा वह युवा मतदाता जो पहली बार UP की सरकार चुनने जा रहा है। 2027 में यही नई पीढ़ी तय करेगी कि वह पुरानी कहानी सुनती है या अपने वर्तमान अनुभव को ज्यादा महत्व देती है।


