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UP में चिराग की एंट्री से किसका बिगड़ेगा खेल? इस वोट बैंक पर नजर, सियासी समीकरण बदलने की तैयारी
UP Assembly Election 2027: यूपी में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। पार्टी की नजर गैर-जाटव दलित वोट बैंक पर है और एनडीए से सम्मानजनक सीटों की उम्मीद है।
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UP Assembly Election 2027: बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान अब अपनी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) यानी एलजेपी (आर) के विस्तार की तैयारी कर रहे हैं। पार्टी की नजर अब उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों पर है। एलजेपी (आर) को उम्मीद है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के तहत दोनों राज्यों में उसे चुनाव लड़ने के लिए सम्मानजनक सीटें मिल सकती हैं। पार्टी की ओर से इन दोनों राज्यों में संगठन को मजबूत करने और राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं।
चिराग पासवान पिछले कुछ समय से लगातार उत्तर प्रदेश और पंजाब का दौरा कर रहे हैं। उनकी सक्रियता को पार्टी के विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी कड़ी में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में भी चिराग पासवान मौजूद रहे। वाराणसी से गुजरात के वडनगर तक जाने वाली बाइक यात्रा को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाई थी।
गैर-जाटव दलितों पर बड़ा दांव
उत्तर प्रदेश की राजनीति में दलित वोट बैंक का महत्व किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में एलजेपी (आर) की नजर राज्य के गैर-जाटव दलित मतदाताओं पर बताई जा रही है। पार्टी को उम्मीद है कि बहुजन समाज पार्टी यानी बीएसपी के कमजोर होते जनाधार के बीच गैर-जाटव दलित मतदाताओं के बीच उसके लिए जगह बन सकती है।
चिराग पासवान खुद युवा और दलित नेता के तौर पर अपनी पहचान को आगे बढ़ाते रहे हैं। एलजेपी (आर) इसी पहचान को उत्तर प्रदेश में अपने विस्तार के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। पार्टी का फोकस ऐसे दलित मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर है, जो मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बीच नए विकल्प की तलाश में हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति लंबे समय से चुनावी समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। एलजेपी (आर) की कोशिश अब इसी सामाजिक आधार में अपनी जगह बनाने की है। पार्टी संगठन के विस्तार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं को सक्रिय करने पर भी जोर दे रही है।
पंजाब में भी दलित वोट पर नजर
उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब भी चिराग पासवान की रणनीति में महत्वपूर्ण जगह रखता है। पंजाब में करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी बताई जाती है। यही वजह है कि एलजेपी (आर) यहां भी दलित मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी को लगता है कि चिराग पासवान की युवा और दलित नेता की छवि पंजाब में भी उसके लिए राजनीतिक आधार तैयार करने में मदद कर सकती है। एनडीए के भीतर भी पार्टी की भूमिका को इसी सामाजिक समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
एलजेपी (आर) के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र कुमार मुन्ना ने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ही करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर एनडीए में सीटों का बंटवारा होता है तो पार्टी अपने उम्मीदवारों के साथ-साथ पूरे गठबंधन की जीत के लिए पूरी ताकत लगाएगी।
धीरेन्द्र कुमार मुन्ना ने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश और पंजाब के दलित समाज को चिराग पासवान के रूप में एक विश्वसनीय चेहरे से काफी उम्मीदें हैं। पार्टी का कहना है कि दोनों राज्यों में दलित समाज के बीच चिराग पासवान की स्वीकार्यता बढ़ रही है।
सीट बंटवारे पर टिकी नजर
एलजेपी (आर) की आगे की रणनीति काफी हद तक एनडीए के भीतर होने वाले सीट बंटवारे पर निर्भर करेगी। पार्टी की उम्मीद है कि गठबंधन में उसे दोनों राज्यों में सम्मानजनक हिस्सेदारी मिलेगी। हालिया बयानों में भी पार्टी ने चुनाव लड़ने की तैयारी और गठबंधन के विकल्प खुले रखने की बात कही है।
यानी चिराग पासवान की पार्टी सिर्फ बिहार तक सीमित रहने के बजाय अब हिंदी पट्टी के दूसरे बड़े राज्यों में भी अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहती है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और पंजाब में विधानसभा चुनाव, दोनों को पार्टी अपने विस्तार के मौके के तौर पर देख रही है।
24 सितंबर से बिहार में युवाओं से संवाद
यूपी और पंजाब में संगठन मजबूत करने से पहले चिराग पासवान अपने गृह राज्य बिहार में युवाओं को जोड़ने के लिए एक नया जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रहे हैं। इस अभियान का नाम ‘युवा बोले तो’ रखा गया है।
24 सितंबर से पटना में इस विशेष युवा संवाद कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके जरिए चिराग पासवान सीधे युवाओं से संवाद करेंगे। वह युवाओं की समस्याओं को सुनने के साथ-साथ रोजगार और करियर से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत करेंगे।
इस अभियान को पार्टी के लिए युवा मतदाताओं के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। चिराग पासवान की राजनीति में युवा चेहरा उनकी प्रमुख पहचान में शामिल रहा है और अब इसी छवि को व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने की तैयारी है। ‘युवा बोले तो’ के जरिए पार्टी युवाओं से सीधे जुड़ने और उनकी समस्याओं को राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनाने की कोशिश करेगी।
हिंदी भाषी राज्यों में विस्तार की तैयारी
चिराग पासवान की पार्टी का यह पूरा अभियान ऐसे समय में सामने आ रहा है जब क्षेत्रीय राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। बिहार में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने के बाद एलजेपी (आर) अब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।
उत्तर प्रदेश में पार्टी की नजर खास तौर पर गैर-जाटव दलित मतदाताओं पर है, जबकि पंजाब में करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी को अपने लिए बड़ा सामाजिक आधार मानकर रणनीति तैयार की जा रही है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इन राज्यों में संगठन को कितना मजबूत कर पाती है और एनडीए के भीतर सीट बंटवारे में उसे कितनी जगह मिलती है।
चिराग पासवान की लगातार यात्राएं, दलित वोट बैंक पर फोकस और युवाओं के बीच ‘युवा बोले तो’ जैसे अभियान से साफ है कि एलजेपी (आर) अब अपनी राजनीति को बिहार से बाहर ले जाने की तैयारी में है। पार्टी की नजर सिर्फ चुनाव लड़ने पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और पंजाब में लंबे समय के लिए अपना संगठन और राजनीतिक आधार तैयार करने पर भी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एनडीए के भीतर सीट बंटवारे में एलजेपी (आर) को कितनी जगह मिलती है और पार्टी जिन सामाजिक समूहों पर भरोसा कर रही है, उनमें वह अपनी राजनीतिक पकड़ कितनी मजबूत कर पाती है। चिराग पासवान के लिए यूपी और पंजाब का विस्तार उनकी पार्टी की राष्ट्रीय पहचान को बढ़ाने की दिशा में अगला बड़ा कदम साबित हो सकता है।


