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UP चुनाव से पहले कांग्रेस-SP में फूट के संकेत? मलाई वाले बयान पर आमने-सामने सपा सांसद और इमरान मसूद
UP Election 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस और सपा के बीच सीट शेयरिंग को लेकर खींचतान बढ़ती दिख रही है। इमरान मसूद के ‘मलाई-छाछ’ बयान से गठबंधन की मुश्किलें सामने आई हैं।
Image Source- Social Media
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अब करीब छह महीने का वक्त बचा है और कांग्रेस (Congress) व समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के बीच गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन सीटों के बंटवारे से लेकर नेताओं की बयानबाजी और आपसी तकरार तक, कई ऐसे सवाल हैं जो इस गठबंधन की राह मुश्किल बना रहे हैं।
सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद (Imran Masood) और सलेमपुर के सपा सांसद रामाशंकर विद्यार्थी राजभर (Ramashankar Vidyarthi Rajbhar) के बीच सामने आई तल्खी ने भी गठबंधन के अंदर की खींचतान को उजागर कर दिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा के बीच ‘बड़े भाई’ बनने की जंग कहीं गठबंधन की गाड़ी के पहिये ही न रोक दे।
‘मलाई कोई और खाए, हमें छाछ मंजूर नहीं’
इस विवाद की ताजा शुरुआत 3 सितंबर 2026 को मथुरा में हुए एक कार्यक्रम से हुई। यहां कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा के साथ सीट शेयरिंग (Seat Sharing) को लेकर खुलकर अपनी बात रखी।
इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, लेकिन किसी की दया पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने साफ कहा कि अगर 2027 में बीजेपी (BJP) को हराना है तो अभी से सीटों का बंटवारा करना होगा, नहीं तो बाद में बहुत देर हो जाएगी।
इमरान ने 2024 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) के नतीजों का श्रेय राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) को दिया। उनका कहना था कि भारत जोड़ो यात्रा ने देश का माहौल बदला, जिसका फायदा उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस गठबंधन को मिला और गठबंधन ने बड़ी सफलता हासिल की।
उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। इमरान के मुताबिक उस समय कांग्रेस बेहद कमजोर स्थिति में थी, फिर भी पार्टी ने 107 सीटों पर चुनाव लड़ा था। अब कांग्रेस पहले से काफी मजबूत है, इसलिए 2027 में उसकी हिस्सेदारी भी उसी ताकत के हिसाब से तय होनी चाहिए।
इसी दौरान इमरान मसूद ने कहा, ‘मलाई कोई और खाए, हमें छाछ मंजूर नहीं।’ उनके इस बयान को सीधे तौर पर इस संकेत के तौर पर देखा गया कि कांग्रेस कम सीटों पर समझौता करने के लिए तैयार नहीं है और वह गठबंधन में बराबरी का हिस्सा चाहती है।
दामाद के सपा में जाने से भी बढ़ी तल्खी
इमरान मसूद के लिए यह मामला सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं है। 20 अगस्त 2026 को उनके दामाद शायान मसूद (Shayan Masood) ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था।
इमरान ने इसे अपने लिए निजी और राजनीतिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी छह महीने से घर पर बैठी है और एक पिता के तौर पर उसकी स्थिति को समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सियासत के लिए किसी का घर बर्बाद करना ठीक नहीं है।
जब इमरान से पूछा गया कि क्या वह इसके लिए अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) को जिम्मेदार मानते हैं, तो उन्होंने कहा कि वह किसे दोषी ठहराएं, वह तो वक्त को दोषी ठहरा रहे हैं।
सपा सांसद रामाशंकर राजभर का पलटवार
इमरान मसूद के बयानों पर सपा सांसद रामाशंकर राजभर (Ramashankar Rajbhar) ने भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सीटें तो लेती है, लेकिन चुनावी नतीजों की समीक्षा नहीं करती।
राजभर के इस बयान का सीधा इशारा कांग्रेस की चुनावी जिम्मेदारी की ओर था। उनका कहना था कि कांग्रेस सीटों की मांग तो करती है, लेकिन जब चुनावी नतीजे सामने आते हैं तो उनकी जिम्मेदारी नहीं लेती।
इससे पहले भी रामाशंकर राजभर इमरान मसूद पर हमला कर चुके हैं। उन्होंने इमरान को ‘छुट्टभैया’ नेता बताते हुए आरोप लगाया था कि वह असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) और पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) के रास्ते पर चल रहे हैं।
सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है तनाव
गौरतलब हो कि कांग्रेस और सपा के बीच तनाव सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है। यहां 19 अगस्त 2026 को सहारनपुर में हुई डीआईएसएचए मीटिंग (DISHA Meeting) के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक (Ashu Malik) के बीच सार्वजनिक तौर पर झड़प भी हुई थी।
यह विवाद ‘यूपी के लड़के’ या ‘यूपी के लड़ाके’ जैसे शब्दों को लेकर हुआ था। हालांकि, इस टकराव को दोनों दलों के बीच चल रहे सीट शेयरिंग के तनाव के एक और संकेत के तौर पर देखा गया।
आखिर ‘बड़े भाई’ बनने की लड़ाई क्यों?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस और सपा के बीच असली खींचतान सीटों के बंटवारे को लेकर है। कांग्रेस 115 से 120 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, जबकि सपा उसे 70 से 80 सीटों तक सीमित रखना चाहती है। यानी दोनों दलों की मांग के बीच करीब 40 से 50 सीटों का अंतर है।
जुलाई 2026 में भी इमरान मसूद ने अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा था कि अगर मुख्यमंत्री बनना है तो दिल बड़ा करना होगा और अगर गठबंधन करना है तो जमीन पर उतरना होगा। उन्होंने कहा था कि सिर्फ टीवी पर बयान देने से काम नहीं चलेगा। इमरान ने यह भी कहा था कि 2024 में सपा ने कांग्रेस को सिर्फ 17 लोकसभा सीटें दी थीं, जबकि वह 60 सीटें दे सकती थी।
2024 की जीत का श्रेय भी बना विवाद
असल में दोनों दलों के बीच एक और बड़ी लड़ाई 2024 के लोकसभा चुनाव की सफलता का श्रेय लेने को लेकर भी है। सपा अपने 37 सांसदों के दम पर खुद को गठबंधन की बड़ी ताकत मानती है। वहीं कांग्रेस राहुल गांधी की लोकप्रियता और भारत जोड़ो यात्रा के असर को अपनी ताकत के तौर पर देखती है।
इसको लेकर इमरान मसूद का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा को 37 सीटें राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की वजह से मिली थीं। यानी कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि यूपी में सपा की सफलता के पीछे कांग्रेस और राहुल गांधी की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मुस्लिम वोटों को लेकर भी खींचतान
वहीं दोनों दलों के बीच मुस्लिम वोट (Muslim Vote) को लेकर भी खींचतान दिखाई दे रही है। इमरान मसूद ने सपा पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सपा मुस्लिम नेताओं को किनारे कर रही है।
वहीं रामाशंकर राजभर ने इमरान पर ऐसे बयान देने का आरोप लगाया है, जिनसे बीजेपी को फायदा पहुंच सकता है। इस तरह गठबंधन के अंदर सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं है, बल्कि वोट बैंक और राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी दोनों दलों में खींचतान दिखाई दे रही है।
कांग्रेस की 150 सीटों तक की मांग
आपको बताते चलें कि इमरान मसूद और यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम (Rajendra Pal Gautam) की ओर से 150 सीटों तक की मांग की जा रही है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 50 फीसदी सीटें उसके हिस्से में आएं।
हालांकि पार्टी 115 से 120 सीटों से नीचे जाने के लिए तैयार नहीं है। दूसरी तरफ सपा 70 से 80 सीटों के आसपास कांग्रेस को रोकना चाहती है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर बड़ा अंतर बना हुआ है।
वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि गठबंधन का फॉर्मूला ‘जीत चाहिए, सीटें नहीं’ होगा। यानी सपा का जोर सीटों की संख्या से ज्यादा उन सीटों पर जीत हासिल करने पर है, जहां गठबंधन को मजबूत उम्मीदवार उतारने का फायदा मिल सके।
‘चुनाव नजदीक आएगा तो बंटवारा हो जाएगा’
इसी बीच सपा नेता एमएच खान (M H Khan) ने कहा है कि चुनाव नजदीक आने दीजिए, सीटों का बंटवारा हो जाएगा। उन्होंने मध्य प्रदेश वाला फॉर्मूला सामने रखते हुए कहा कि जिस तरह पहले मध्य प्रदेश के चुनाव में सीटों का बंटवारा हुआ था, उसी तरह यहां भी रास्ता निकाला जा सकता है। यानी सपा फिलहाल सीट शेयरिंग को लेकर जल्दबाजी के मूड में नहीं दिख रही, जबकि कांग्रेस लगातार पहले से फॉर्मूला तय करने पर जोर दे रही है।
‘ज्यादा देर हुई तो बिखर भी सकता है गठबंधन’
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई (Rashid Kidwai) के मुताबिक यह सिर्फ इमरान मसूद और सपा के किसी एक नेता के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सपा-कांग्रेस गठबंधन के अंदर चल रही गहरी कलह की झलक है।
एक टीवी चैनल को उन्होंने बताया कि, अगर अक्टूबर-नवंबर 2026 तक सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो जाता है तो यह गठबंधन बीजेपी को कड़ी टक्कर दे सकता है। लेकिन अगर विवाद दिसंबर 2026 तक भी जारी रहा तो गठबंधन की गाड़ी इसी तरह न्यूट्रल गियर में चलती रहेगी और चुनाव से पहले बिखर भी सकती है।
रशीद किदवई के मुताबिक जितनी देर होगी, दोनों दलों के बीच अविश्वास उतना ही गहरा होगा और इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस और सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि आपसी भरोसा बनाए रखना भी है।


