TRENDING TAGS :
UP Election 2027: अखिलेश यादव से कितनी सीटें मांगेगी कांग्रेस? प्रियंका गांधी के घर बनी रणनीति
UP Election 2027: प्रियंका गांधी के आवास पर यूपी चुनाव को लेकर बड़ी बैठक हुई। कांग्रेस सपा से 125-140 सीटों की संभावित सूची के साथ सीट बंटवारे पर बातचीत की तैयारी में है।
UP Congress meeting at Priyanka Gandhi home (PC: X post)
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। प्रियंका गांधी वाड्रा के आवास पर हुई अहम बैठक में संभावित सीटों की सूची तैयार करने और सपा के सामने कांग्रेस का दावा मजबूती से रखने की रणनीति पर मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस 125 से 140 सीटों तक की सूची तैयार कर सपा नेतृत्व को सौंप सकती है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और गठबंधन का औपचारिक फॉर्मूला अभी तय नहीं हुआ है।
सपा-कांग्रेस की सीट शेयरिंग पर बातचीत जल्द
कांग्रेस की ताजा रणनीति के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं। 19 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस अगले सप्ताह समाजवादी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग पर औपचारिक बातचीत शुरू कर सकती है। उत्तर प्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि बातचीत के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है और वरिष्ठ नेताओं की एक समिति बनाई जा रही है।
प्रियंका गांधी के आवास पर हुई बैठक को इसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी अब केवल गठबंधन की बात करने के बजाय उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करना चाहती है, जहां कांग्रेस अपनी संगठनात्मक ताकत और सपा के समर्थन के सहारे जीत की मजबूत संभावना देखती है।
125-140 सीटों की सूची में किन क्षेत्रों पर रहेगा जोर?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अगले दो दिनों में संभावित सीटों पर आंतरिक मंथन पूरा कर सूची को अंतिम रूप देने की तैयारी में है। इसके बाद तीन से चार दिनों के भीतर सूची सपा नेतृत्व को सौंपे जाने की योजना है।
सीटों के चयन में इन पहलुओं पर जोर रहने की संभावना है:
- जीतने की क्षमता: उन सीटों को प्राथमिकता, जहां कांग्रेस का उम्मीदवार मुकाबले में मजबूत स्थिति में हो।
- जातीय समीकरण: पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यक मतदाताओं के प्रभाव को ध्यान में रखना।
- परंपरागत सीटें: उन क्षेत्रों पर दावा, जहां कांग्रेस का ऐतिहासिक आधार और स्थानीय संगठन मौजूद है।
- पिछले चुनावों का प्रदर्शन: पिछले नतीजों, हार-जीत के अंतर और संभावित उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन।
- सीटों पर लचीलापन: बातचीत में जीत की संभावना के आधार पर सीटों की अदला-बदली और संख्या में बदलाव की गुंजाइश रखना।
हालांकि, 125 से 140 सीटों की यह संभावित सूची कांग्रेस की अंतिम मांग या सपा के साथ तय हुआ समझौता नहीं है।
कांग्रेस पहले ही कर चुकी है 150 सीटों से कम न लड़ने का दावा
सीटों की संख्या को लेकर कांग्रेस की रणनीति में एक अहम पहलू सामने आया है। सितंबर के अंत में राजेंद्र पाल गौतम ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि कांग्रेस गठबंधन में कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। उन्होंने 403 सदस्यीय विधानसभा में आधी सीटों पर दावेदारी का तर्क भी दिया था।
ऐसे में 125-140 सीटों की संभावित सूची और 150 सीटों के पुराने दावे के बीच अंतर को समझना जरूरी है। एक सूची पार्टी की प्राथमिकता वाली सीटों की पहचान के लिए हो सकती है, जबकि दूसरी संख्या उसकी राजनीतिक दावेदारी को दर्शाती है। दोनों के बीच अंतिम संबंध क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस का तर्क है कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा केवल संख्याओं के आधार पर नहीं, बल्कि जीत की संभावना और संगठन की मजबूती के आधार पर होना चाहिए। पार्टी चाहती है कि उसे ऐसी सीटें मिलें, जहां वह अपने दम पर मुकाबला कर सके और सपा के वोटों का भी लाभ उठा सके।
अखिलेश यादव के सामने भी सीटों का पेच
दूसरी ओर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने गठबंधन को एकजुट रखने के साथ अपने संगठन और सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है। सपा की रणनीति पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA समीकरण को मजबूत करने पर केंद्रित है। पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक के साथ दूसरे सामाजिक वर्गों और युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
18 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर भी भाजपा पर आरोप लगाए और पार्टी कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची की निगरानी में सतर्क रहने की अपील की। इससे साफ है कि सपा चुनावी तैयारी में संगठन और मतदाता आधार को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है।
सीट बंटवारे पर दोनों दलों के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं। कांग्रेस जल्द समझौता चाहती है, जबकि सपा सीटों का फैसला राजनीतिक ताकत, संगठन और जीत की संभावना के आधार पर करने की बात करती रही है।
नई प्रदेश टीम पर भी दांव लगा रही कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के तहत संगठन में बदलाव भी किए हैं। आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। नई टीम से संगठन को मजबूत करने और सपा के साथ बातचीत में कांग्रेस का पक्ष प्रभावी ढंग से रखने की उम्मीद है।
इमरान मसूद ने भी सीट बंटवारे की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की जरूरत बताई थी। उनका कहना रहा है कि कांग्रेस गठबंधन में सपा को नेतृत्वकारी भूमिका देने के लिए तैयार है, लेकिन पार्टी के सम्मान और हिस्सेदारी का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
2024 के प्रदर्शन से कांग्रेस को बढ़ी उम्मीद
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में INDIA गठबंधन के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था। दोनों दलों के प्रदर्शन ने भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश की। इसी अनुभव के आधार पर कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन को आगे बढ़ाना चाहती है।
लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समीकरण अलग होते हैं। विधानसभा चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, जातीय समीकरण, बूथ स्तर का संगठन और क्षेत्रीय नेतृत्व अधिक निर्णायक हो सकते हैं। इसलिए कांग्रेस के लिए केवल अधिक सीटें हासिल करना ही नहीं, बल्कि उन सीटों का चयन करना भी अहम होगा, जहां पार्टी वास्तव में जीत की स्थिति में हो।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अखिलेश यादव कांग्रेस की 125-140 सीटों वाली संभावित सूची पर सहमत होंगे या सीटों की संख्या और चयन को लेकर नई बातचीत होगी। अगले सप्ताह प्रस्तावित वार्ता से इस दिशा में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। हालांकि, दोनों दलों के बीच अंतिम सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।


