Nitish की राह पर CM योगी? UP चुनाव 2027 से पहले महिलाओं और कर्मचारियों पर बड़े ऐलान से बढ़ी सियासी हलचल

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में काफी अंतर है। दोनों राज्यों का जातीय समीकरण, राजनीतिक इतिहास और मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग हैं। इसके बावजूद चुनाव से पहले बड़े सामाजिक वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाने वाली घोषणाओं का पैटर्न दोनों राज्यों में दिखाई दे रहा है।

Priya Singh Bisen
Published on: 8 Sept 2026 10:10 PM IST
UP Election 2027
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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सरकार के हालिया फैसलों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं अभी से शुरू हो गई हैं। खासतौर पर महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, रसोइयों, शिक्षामित्रों और समाज के दूसरे वर्गों से जुड़े फैसलों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चुनावी रणनीति से मिलता-जुलता रास्ता अपना रहे हैं?

हालांकि, उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति में काफी अंतर है। दोनों राज्यों का जातीय समीकरण, राजनीतिक इतिहास और मतदाताओं की प्राथमिकताएं अलग हैं। इसके बावजूद चुनाव से पहले बड़े सामाजिक वर्गों को सीधे लाभ पहुंचाने वाली घोषणाओं का पैटर्न दोनों राज्यों में दिखाई दे रहा है।

योगी सरकार ने बढ़ाया कई वर्गों का मानदेय

योगी सरकार ने हाल के दिनों में अलग-अलग वर्गों के लिए आर्थिक राहत से जुड़े कई फैसले किए हैं। रसोइयों के मानदेय में 1,000 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 3,000 रुपये किया गया है। शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपये करने का ऐलान हुआ है। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाकर 12,000 रुपये करने की घोषणा की गई है।

इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं और ग्राम चौकीदारों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की घोषणा की जा चुकी है। इन फैसलों का सीधा संबंध उन वर्गों से है, जिनकी बड़ी संख्या गांवों और छोटे शहरों में मौजूद है।

महिलाओं पर खास फोकस

योगी सरकार की हालिया घोषणाओं में महिलाओं को लेकर भी खास जोर दिखाई दे रहा है। अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के लिए कई बड़े फैसलों का ऐलान किया। इनमें 5 लाख रुपये तक का हेल्थ कवर, साड़ियों की संख्या बढ़ाना, स्मार्टफोन और तकनीक के माध्यम से रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराना तथा आंगनबाड़ी केंद्रों को स्मार्ट बनाने की दिशा में काम शामिल है।

वहीं, 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की योजना को भी मंजूरी दी गई है। ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ के तहत बुजुर्ग महिलाओं को राज्य की रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा देने का फैसला किया गया है।

Bihar में नीतीश कुमार ने क्या किया था?

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने महिलाओं, गरीबों, बुजुर्गों और दूसरे सामाजिक वर्गों को ध्यान में रखते हुए कई घोषणाएं की थीं। इनमें मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना सबसे ज्यादा चर्चा में रही। इसके तहत हर परिवार की एक महिला को रोजगार शुरू करने के लिए शुरुआती आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई थी। चुनाव से पहले बड़ी संख्या में महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये की राशि भी भेजी गई।

नीतीश सरकार ने बुजुर्गों, विधवा महिलाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, रसोइयों और दिव्यांगों से जुड़े वर्गों के लिए भी कई आर्थिक फैसले किए थे। इसी वजह से अब यूपी में योगी सरकार के हालिया फैसलों की तुलना बिहार के चुनावी मॉडल से की जा रही है।

50,000 रुपये वाली योजना की भी चर्चा

अगस्त 2026 में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि उत्तर प्रदेश सरकार महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता वाली योजना पर विचार कर रही है। संभावित मॉडल में चुनाव से पहले 20 हजार रुपये और बाद में 10-10 हजार रुपये की तीन किस्तों की चर्चा थी।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 50 हजार रुपये की इस संभावित योजना की योगी सरकार ने अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव महिलाओं को सालाना 40 हजार रुपये देने का वादा कर चुके हैं।

2024 के झटके के बाद BJP की बड़ी तैयारी

2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में BJP को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। BJP की सीटें 62 से घटकर 33 रह गईं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 और कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है, जहां लोकसभा चुनाव में विपक्ष को बढ़त मिली थी।

इसी रणनीति के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में ऐसे 115 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 38 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया है। ऐसे में सरकार की घोषणाओं और विकास परियोजनाओं को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या महिलाओं और अलग-अलग सामाजिक वर्गों को राहत देने वाला यह सिलसिला 2027 तक और तेज होगा? अगर ऐसा होता है तो यूपी का चुनावी मुकाबला सिर्फ जातीय समीकरणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी योजनाओं और सीधे लाभ पहुंचाने वाली घोषणाओं का असर भी अहम भूमिका निभा सकता है।

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Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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