TRENDING TAGS :
UP 2027 चुनाव से पहले BJP का बड़ा धमाका! कटेगा 200 विधायकों के टिकट... Vinod Tawde बना रहे रिपोर्ट कार्ड
UP Elections 2027: पार्टी इस बार बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों यानी सीटिंग विधायकों (Sitting MLAs) के टिकट काट सकती है। खबर के अनुसार, लगभग 200 सीटिंग विधायकों के टिकट काटे जाने की तैयारी है।
UP Elections 2027
UP Elections 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Election 2027) को लेकर भाजपा (BJP) ने अपनी तैयारियां अब तेज करती नज़र आ रही हैं। सत्ता में लगातार तीसरी बार वापसी के लिए पार्टी का मुख्य फोकस अब 10 साल की एंटी इनकंबेंसी (Anti-Incumbency) को खत्म करने पर बताया जा रहा है। इसी रणनीति के अंतर्गत BJP राज्य और केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर निरंतर कार्य कर रही है।
बताया जा रहा है कि पार्टी इस बार बड़ी संख्या में मौजूदा विधायकों यानी सीटिंग विधायकों (Sitting MLAs) के टिकट काट सकती है। खबर के अनुसार, लगभग 200 सीटिंग विधायकों के टिकट काटे जाने की तैयारी है। हालांकि, किन विधायकों का टिकट कटेगा, इसकी अंतिम लिस्ट अभी सामने नहीं आई है।
विनोद तावड़े तैयार कर रहे विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
BJP के UP प्रभारी बनाए गए विनोद तावड़े (Vinod Tawde) को विधायकों के प्रदर्शन और जमीनी स्थिति का आकलन करने की जिम्मेदारी दिए जाने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि भले ही उन्हें प्रदेश प्रभारी बनाए जाने की औपचारिक ऐलान बीते मंगलवार को हुआ हो, लेकिन वह बीते लगभग 6 महीने से उत्तर प्रदेश में जिलेवार जमीनी सच्चाई समझने में जुटे हुए थे।
इसी दौरान पार्टी की ओर से विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में उनकी स्थिति और जनता के बीच उनकी पकड़ को लेकर रिपोर्ट कार्ड (MLA Report Card) तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है। BJP सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि कई क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों को लेकर लोगों में नाराजगी है।
200 विधायकों के टिकट काटने की चर्चा तेज
बताया जा रहा है कि BJP ने अपने स्तर पर एक आंतरिक सर्वे (Internal Survey) भी कराया है। इस सर्वे में कई सीटिंग विधायकों के खिलाफ लोगों में नाराजगी सामने आने की बात कही जा रही है। जमीनी स्तर पर लोगों की शिकायत यह बताई गई कि कई विधायकों ने बीते 10 साल में अपने विधानसभा क्षेत्रों के लिए अपेक्षित काम नहीं किया।
जानकारी के अनुसार, कुछ वोटर्स का मानना रहा कि चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के नाम पर वोट मिल जाता है, इसलिए कई विधायक चुनाव जीतने के बाद अपने क्षेत्रों में सक्रिय नहीं रहे। पार्टी के सर्वे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली और स्थानीय विधायकों की सक्रियता के बीच अंतर महसूस किए जाने की बात कही गई है।
केशव प्रसाद मौर्य ने भी दी टिकट कटने के स्पष्ट संकेत
सीटिंग विधायकों के टिकट काटे जाने की चर्चा पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने भी प्रतिक्रिया दी है। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि BJP का आंतरिक सर्वे मीडिया में सामने नहीं आ सकता। उन्होंने यह भी कहा कि हर चुनाव में 403 विधानसभा सीटों में से बड़ी संख्या में विधायकों के टिकट कटते हैं और नए लोगों को अवसर दिया जाता है।
केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि किसका टिकट कटेगा और किसे मौका मिलेगा, इसका निर्णय वह या उत्तर प्रदेश BJP अकेले नहीं करती है। उन्होंने कहा कि साल 2017 जैसी जीत हासिल करने के लिए पार्टी स्तर पर जिन निर्णयों की आवश्यकता होगी, वे लिए जा रहे हैं।
साल 2024 लोकसभा चुनाव से BJP ने लिया सबक
BJP के इस संभावित निर्णयों के पीछे 2024 लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) का अनुभव भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उस चुनाव में पार्टी को अपने सांसदों के खिलाफ एंटी इनकंबेंसी का नुकसान उठाना पड़ा था। कई क्षेत्रों में लोगों की शिकायत थी कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काम से संतुष्ट हैं, लेकिन स्थानीय सांसदों ने क्षेत्र में अपेक्षित काम नहीं किया।
इसी नाराजगी का प्रभाव चुनावी भतीजों में भी देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और कांग्रेस (Congress) गठबंधन ने 43 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। अब विधानसभा चुनाव में BJP ऐसी स्थिति दोहराना नहीं चाहती। यही कारण है कि पार्टी मौजूदा विधायकों की जमीनी स्थिति को लेकर अधिक गंभीर दिखाई दे रही है।
SP-Congress गठबंधन और PDA पर केशव मौर्य का हमला
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संभावित गठबंधन को लेकर भी केशव प्रसाद मौर्य ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों दल साल 2017 में भी साथ मिलकर चुनाव लड़ चुके हैं और उसका नतीजा सभी के सामने है।
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के पीडीए फॉर्मूले (PDA Formula) पर भी केशव मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के फॉर्मूले को पूरी तरह असफल बताया और कहा कि अखिलेश यादव इसका फुल फॉर्म बदलते रहते हैं। उन्होंने अखिलेश यादव पर पिछड़ों और दलितों के लिए पर्याप्त रूप से कार्य ना करने का आरोप भी लगाया और PDA को लेकर अपनी आलोचना जारी रखी।
2027 से पहले BJP का बड़ा संगठनात्मक प्लान
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP अपने मौजूदा विधायकों की स्थिति को लेकर बड़े स्तर पर समीक्षा करती दिखाई दे रही है। लगभग 200 सीटिंग विधायकों के टिकट काटे जाने की चर्चा ने पार्टी के अंदर और बाहर बड़ी सियासी हलचल बढ़ा दी है। विनोद तावड़े की तरफ से विधायकों की रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात सामने आ रही है, जबकि आखिरी निर्णय पार्टी नेतृत्व को करना है।
फिलहाल, BJP का मुख्य उद्देश्य मौजूदा विधायकों के खिलाफ नाराजगी को कम करना और एंटी इनकंबेंसी (Anti-Incumbency) का प्रभाव रोकना बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी कितने मौजूदा विधायकों के टिकट काटती है और किन नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारती है।


