UP Panchayat News: यूपी में पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव, प्रधानों को मिली प्रशासक की जिम्मेदारी

UP Panchayat News: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। सरकार ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है, हालांकि उनके अधिकार सीमित रहेंगे और महत्वपूर्ण फैसलों के लिए DPRO व जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होगी।

Harsh Sharma
Published on: 25 May 2026 9:24 PM IST
UP Panchayat News: यूपी में पंचायत व्यवस्था में बड़ा बदलाव, प्रधानों को मिली प्रशासक की जिम्मेदारी
X

UP Panchayat News: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण स्थगित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे पहले राजनीतिक दल अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करने में जुटे हुए हैं। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सामान्यतः जिला प्रशासन को प्रशासक नियुक्त किया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने एक अलग निर्णय लेते हुए ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। हालांकि, प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए भी ग्राम प्रधानों के पास सीमित अधिकार होंगे। उन्हें किसी भी महत्वपूर्ण या नीतिगत निर्णय के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) और जिलाधिकारी की अनुमति पर निर्भर रहना पड़ेगा।

पिछले 30 वर्षों (1995 से 2021) में उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों के छह चक्र या तो समय पर हुए या बहुत कम विलंब के साथ पूरे किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित है और इसके बाद अधिकतम 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य होता है, जिसका राज्य में लगभग पूरी तरह पालन किया गया है। वर्ष 2020-21 में कोरोना महामारी के दौरान चुनाव टालने की मांग उठी थी, लेकिन इसके बावजूद चुनाव संपन्न कराए गए। उस समय कुछ राजनीतिक दलों और भाजपा विधायकों ने भी स्थगन की अपील की थी, लेकिन राज्य चुनाव आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया। वहीं, आरक्षण और डीलिमिटेशन से जुड़े कुछ पुराने मामलों (विशेषकर 2015 से पहले) में कोर्ट केस या सरकारी आदेशों के कारण विवाद जरूर हुए, लेकिन इनका असर पूरे चुनाव चक्र पर बड़ा विलंब पैदा करने वाला नहीं रहा।

5 वर्ष का कार्यकाल और कानूनी प्रावधान

उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 के अनुसार किसी भी ग्राम पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तिथि से अधिकतम 5 वर्ष तक होता है। यदि किसी कारणवश पंचायत का समय से पहले विघटन नहीं होता, तो उसका कार्यकाल 5 वर्ष पर स्वतः समाप्त माना जाता है। इसी अधिनियम की धारा 12 के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि पंचायत सदस्य का कार्यकाल भी पंचायत के कार्यकाल के साथ ही समाप्त हो जाता है।

विशेष परिस्थितियों में चुनाव संभव न होने पर व्यवस्था

कानून में यह भी प्रावधान है कि यदि अपरिहार्य परिस्थितियों या लोकहित में समय पर चुनाव कराना संभव न हो, तो राज्य सरकार प्रशासक या प्रशासनिक समिति नियुक्त कर सकती है। यह समिति या प्रशासक अधिकतम 6 माह तक कार्यभार संभाल सकता है। इस दौरान ग्राम पंचायत की सभी शक्तियां और जिम्मेदारियां उसके पास रहेंगी।

नई पंचायत गठन तक प्रशासक की नियुक्ति

सरकार ने निर्णय लिया है कि ग्राम पंचायत चुनाव 2026 के बाद जब तक नई पंचायतों का गठन और पहली बैठक नहीं हो जाती, तब तक मौजूदा ग्राम प्रधान को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह नियुक्ति 27 मई 2026 से प्रभावी होगी और अधिकतम 6 महीने तक या नई पंचायत के गठन तक लागू रहेगी।

नीति निर्णय पर प्रतिबंध

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रशासक के रूप में कार्यरत ग्राम प्रधान कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेगा। यदि किसी विशेष या आवश्यक स्थिति में नीति संबंधी निर्णय लेना जरूरी होगा, तो उसे जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी की अनुमति लेनी होगी।

प्रशासनिक प्रक्रिया और नियंत्रण

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग द्वारा की जाएगी। सभी जिलाधिकारियों, मंडलायुक्तों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंचायत व्यवस्था में कोई प्रशासनिक रुकावट न आए और विकास कार्य सुचारू रूप से चलते रहें, उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णय पंचायत व्यवस्था को संक्रमणकालीन अवधि में स्थिर बनाए रखने के लिए लिया गया है। नए चुनाव और नई ग्राम पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखना इस कदम का मुख्य उद्देश्य है, जिससे ग्रामीण विकास कार्य प्रभावित न हों और शासन व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

Harsh Sharma

Harsh Sharma

Content Writer Mail ID - harsha4avan@gmail.com

Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

Next Story