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5 साल बाद UP में बढ़ेगा हाउस टैक्स! Lucknow समेत सभी नगर निगमों के लोगों की बढ़ सकती है जेब पर मार
UP House Tax Increase: सरकार का मानना है कि नगर निकायों की आय बढ़ाने और उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।
UP House Tax Increase
UP House Tax Increase: यूपी हाउस टैक्स (UP House Tax) को लेकर उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार हाउस टैक्स (House Tax) की मौजूदा दरों में करीब 15 साल बाद संशोधन करने की तैयारी कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो लखनऊ (Lucknow) समेत प्रदेश के सभी नगर निगम (Municipal Corporations) क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। सरकार का मानना है कि नगर निकायों की आय बढ़ाने और उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।
पुरानी दरों की समीक्षा शुरू, नए प्रस्ताव पर चल रही तैयारी
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश नगर पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड (Uttar Pradesh Municipal Financial Resources Development Board) ने प्रदेश के सभी नगर निगमों में लागू मौजूदा हाउस टैक्स (House Tax) की दरों की समीक्षा शुरू करने के संकेत दिए हैं। बोर्ड का मानना है कि वर्तमान टैक्स दरें काफी पुरानी हो चुकी हैं और बदलते समय, बढ़ती आबादी, शहरी विकास कार्यों तथा महंगाई को देखते हुए नगर निकायों की आय बढ़ाना जरूरी हो गया है। इसी वजह से अब नई दरों को लेकर तैयारी शुरू की गई है।
लखनऊ में 2010 के बाद नहीं हुआ कोई बड़ा बदलाव
राजधानी लखनऊ (Lucknow) की बात करें तो यहां वर्ष 2010 के बाद से हाउस टैक्स (House Tax) की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। पिछले करीब डेढ़ दशक से लोगों से पुरानी दरों के आधार पर ही **संपत्ति कर (Property Tax)** वसूला जा रहा है। हालांकि नगर निगम ने वर्ष 2016 और 2023 में टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव तैयार किए थे, लेकिन उस समय पार्षदों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के कारण उन्हें लागू नहीं किया जा सका।
अब एक बार फिर प्रदेश सरकार स्तर पर हाउस टैक्स (House Tax) में संशोधन को लेकर कवायद तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस बार सरकार प्रदेश के सभी नगर निगमों की आर्थिक स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नया प्रस्ताव तैयार कर सकती है।
नगर निगमों की आय का सबसे बड़ा जरिया है हाउस टैक्स
संपत्ति कर (Property Tax) नगर निगमों की आय का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। इसी राशि का उपयोग शहरों में सड़क निर्माण, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी और दूसरी नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाता है।
नगर निकायों का कहना है कि वर्षों पुरानी टैक्स दरों के कारण उन्हें पर्याप्त राजस्व नहीं मिल पा रहा है। लगातार बढ़ते शहरीकरण और नागरिक सुविधाओं की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त आय की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकार का मानना है कि यदि समय के अनुसार हाउस टैक्स (House Tax) की दरों में बदलाव किया जाता है तो नगर निगम अपने क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे।
फैसले पर हो सकता है विरोध
हालांकि, हाउस टैक्स (House Tax) बढ़ाने का फैसला सरकार के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। टैक्स बढ़ने से आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है, इसलिए राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों की ओर से विरोध की संभावना भी जताई जा रही है। इससे पहले भी हाउस टैक्स (House Tax) बढ़ाने के प्रस्तावों पर पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने आपत्ति दर्ज कराई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार अंतिम फैसला लेने से पहले सभी पक्षों से चर्चा करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी।


