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डिप्टी सीएम के बयान के बीच योगी सरकार का बड़ा फैसला, मदरसा बोर्ड से कॉलेज लेवल की डिग्री देने का अधिकार वापस
Madrasa Politics in UP Elections: सरकार ने उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004 में संशोधन को मंजूरी दे दी है।
Madrasa Politics in UP Elections
Madrasa Politics in UP Elections: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में विधानसभा चुनाव 2027 (UP Assembly Election 2027) से पहले मदरसों (Madrasa) का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक तरफ उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) के मदरसा शिक्षा को लेकर दिए गए बयान ने राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट (Cabinet) बैठक में मदरसा बोर्ड (Madrasa Board) से उच्च शिक्षा की डिग्री देने का अधिकार वापस लेने का बड़ा फैसला किया गया है।
सरकार ने उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004 (UP Board of Madrasa Education Act, 2004) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के नवंबर 2024 के फैसले के अनुरूप किया गया है, जिसमें मदरसा बोर्ड के माध्यम से उच्च शिक्षा की डिग्रियों को मान्यता देने वाले प्रावधान को असंवैधानिक माना गया था।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा को लेकर उस समय सियासी विवाद और तेज हो गया, जब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि जो लोग मदरसा शिक्षा प्राप्त करते हैं, उनके भीतर आतंकवादी जैसी सोच विकसित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि मदरसा शिक्षा पाने वाले भारत माता की जय और वंदे मातरम् नहीं बोलते।
उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। इसी बीच योगी सरकार ने मदरसा बोर्ड के अधिकारों में बड़ा बदलाव करते हुए उच्च शिक्षा से जुड़े अधिकार वापस लेने का निर्णय भी कर लिया।
UP बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट में होगा संशोधन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस फैसले के बाद मदरसा एजुकेशन बोर्ड अब अंडरग्रेजुएट (Undergraduate) और पोस्टग्रेजुएट (Postgraduate) स्तर की उच्च शिक्षा के बराबर योग्यता देने या उसे नियंत्रित करने का अधिकार नहीं रखेगा।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक यह फैसला विधानसभा के मॉनसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का कहना है कि राज्य के कानून को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन आवश्यक था।
SC के फैसले के बाद लिया गया निर्णय
अधिकारियों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में दिए गए अपने फैसले में उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट को बरकरार रखा था, लेकिन कामिल (Kamil) और फाजिल (Fazil) जैसे उच्च शिक्षा से जुड़े कोर्सों को लेकर बने प्रावधानों को असंवैधानिक करार दिया था।
इसी फैसले के बाद अब राज्य सरकार ने कानून में संशोधन करते हुए इन कोर्सों को मदरसा बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से बाहर करने का रास्ता साफ कर दिया है।
अब सिर्फ 12वीं स्तर तक रहेगी मदरसा बोर्ड की जिम्मेदारी
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि संशोधित व्यवस्था के तहत मदरसा बोर्ड केवल कक्षा 12 तक के बराबर शिक्षा की निगरानी करेगा। इसमें मुंशी (Munshi), मौलवी (Maulvi) और आलिम (Alim) जैसे कोर्स पहले की तरह शामिल रहेंगे।
वहीं कामिल और फाजिल जैसे कोर्स, जिन्हें उच्च शिक्षा की श्रेणी में माना जाता है, अब अलग उच्च शिक्षा व्यवस्था के तहत संचालित किए जाएंगे।
अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (Minority Welfare Minister) दानिश आजाद अंसारी (Danish Azad Ansari) ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि कामिल और फाजिल उच्च शिक्षा के कोर्स हैं, इसलिए इन्हें मदरसा बोर्ड के तहत नहीं रखा जा सकता। इसी आदेश का पालन करते हुए आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दी गई है।
नए सिस्टम पर सरकार कर रही है काम
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार अब उस नई व्यवस्था पर काम कर रही है, जिसके तहत भविष्य में कामिल और फाजिल कोर्स संचालित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि लखनऊ (Lucknow) स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (Khwaja Moinuddin Chishti Language University) उन संस्थानों में शामिल है, जिन्हें भविष्य में इस उच्च शिक्षा ढांचे का हिस्सा बनाने पर विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों ने यह भी जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से कामिल और फाजिल कोर्स में नए प्रवेश नहीं हुए हैं, क्योंकि इनके लिए नया नियामक ढांचा तैयार किया जा रहा है।
HC और SC के फैसले का पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने मार्च 2024 में यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004 को रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ दायर अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में फैसला सुनाते हुए एक्ट को बरकरार रखा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि मदरसा बोर्ड को उच्च शिक्षा की डिग्रियां नियंत्रित करने का अधिकार देने वाले प्रावधान संविधान के अनुरूप नहीं हैं। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद कामिल और फाजिल को औपचारिक रूप से मदरसा बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से हटाया जाएगा और इनके लिए अलग व्यवस्था बनाई जाएगी।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
उधर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है।
समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) आतंकियों को संरक्षण देती है और उन्हें प्रशिक्षण भी देती है।
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन (Iqra Hasan) ने कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को बिना तथ्यों के इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों की स्थिति पहले से ही कठिन है और ऐसे बयान माहौल को और खराब करते हैं।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी जताई कड़ी आपत्ति
मुसलमानों के प्रमुख संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) ने भी उपमुख्यमंत्री के बयान की कड़ी आलोचना की है।
संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी (Maulana Arshad Madani) ने कहा कि यह बयान सांप्रदायिकता की पराकाष्ठा है। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की ओर से इस तरह का बयान देना न केवल उस पद की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि देश की धार्मिक, शैक्षिक और संवैधानिक परंपराओं का भी अपमान है।
फिलहाल मदरसा शिक्षा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, सरकार के नए संशोधन और उपमुख्यमंत्री के बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।


