कोर्ट ने पलट दिया सजा का फैसला! 35 साल पुराने Arms Act के मामले में मंत्री Rakesh Sachan बरी

Rakesh Sachan Arms Act Case: उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान को 35 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में बड़ी राहत मिली है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने निचली अदालत की एक साल की सजा रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 10 July 2026 2:33 PM IST
Rakesh Sachan Arms Act Case
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Rakesh Sachan Arms Act Case: उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान (Rakesh Sachan) को 35 साल पुराने आर्म्स एक्ट (Arms Act) के मामले में बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट (MP/MLA Court) विजय कुमार गुप्ता (Vijay Kumar Gupta) ने उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए राकेश सचान को दोषमुक्त करार दिया।

1991 में दर्ज हुआ था मामला

आपको बताते चलें कि यह मामला 13 अगस्त 1991 का है। नौबस्ता थाना (Naubasta Police Station) में तत्कालीन थाना प्रभारी बृजमोहन उदेनिया (Brijmohan Udeniya) ने राकेश सचान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

आरोप था कि उनके पास से एक राइफल (Rifle) और नौ कारतूस (Cartridges) बरामद हुए थे, जिनका लाइसेंस वह मौके पर नहीं दिखा सके थे। इस मामले में दिनेश चंद्र सचान (Dinesh Chandra Sachan) और विनोद वर्मा (Vinod Verma) को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि इन दोनों के मामलों का फैसला पहले ही हो चुका था। जनप्रतिनिधि होने के कारण राकेश सचान की फाइल एमपी-एमएलए लोअर कोर्ट (MP/MLA Lower Court) भेजी गई थी।

2022 में हुई थी एक साल की सजा

एमपी-एमएलए लोअर कोर्ट ने 8 अगस्त 2022 को राकेश सचान को दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद और 1500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

यह फैसला अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट तृतीय (Additional Chief Metropolitan Magistrate-III) आलोक यादव (Alok Yadav) ने सुनाया था।

अपील में पलटा फैसला

जिसके बाद राकेश सचान की ओर से इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दाखिल की गई थी। अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे (Girish Narayan Dubey) ने बताया कि अपील पर सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विजय कुमार गुप्ता ने माना कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों (Evidence) का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया था। इसी आधार पर अदालत ने निचली अदालत की सजा को निरस्त कर दिया और राकेश सचान को दोषमुक्त घोषित कर दिया।

अदालत ने साथ ही सात दिनों के भीतर 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें और इतनी ही राशि का एक निजी बंधपत्र (Personal Bond) दाखिल करने का भी आदेश दिया है।

सजा सुनाए जाने से पहले कोर्ट से चले गए थे सचान

इस मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2022 में एक विवाद भी सामने आया था।

एसीजेएम तृतीय (ACJM-III) की अदालत ने 6 अगस्त 2022 को राकेश सचान को दोषी करार दिया था, लेकिन सजा सुनाए जाने से पहले ही वह अदालत से चले गए थे। उस दौरान वकीलों के हंगामे के बीच अदालत का आदेश भी गायब हो गया था। राकेश सचान पर कोर्ट का आदेश अपने साथ ले जाने का आरोप भी लगा था और मामला एफआईआर (FIR) दर्ज होने तक पहुंच गया था।

समर्पण के बाद सुनाई गई थी सजा

घटनाक्रम के बाद 8 अगस्त 2022 को राकेश सचान ने अदालत में समर्पण (Surrender) किया था।

इसके बाद अदालत ने आदेश का पुनर्गठन किया और फिर उन्हें एक साल की कैद और 1500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के खिलाफ एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट (MP/MLA Sessions Court) में अपील दायर की गई थी।

अब इस अपील पर फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश विजय कुमार गुप्ता ने राकेश सचान की अपील स्वीकार कर ली और 35 साल पुराने आर्म्स एक्ट मामले में उन्हें बरी कर दिया।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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