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योगी के गढ़ में BJP के सामने अपने ही पुराने नेता की चुनौती! गोरखपुर-फैजाबाद MLC सीट पर क्या गेम प्लान?
UP MLC Election 2026: गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव 2026 में BJP के ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सामने सपा के डॉ. संजयन त्रिपाठी की चुनौती है। जानिए पुराने रिश्ते, शिक्षक राजनीति और 2027 से पहले इस मुकाबले के सियासी मायने।
UP MLC Election 2026
UP MLC Election 2026: गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला इसलिए दिलचस्प है क्योंकि भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सामने सपा ने डॉ. संजय कुमार त्रिपाठी को उतारा है, जिनका पहले भाजपा से जुड़ाव रहा है। दोनों उम्मीदवार शिक्षक राजनीति से जुड़े हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल भाजपा और सपा के बीच नहीं, बल्कि शिक्षक संगठनों की पकड़, पुराने रिश्तों और नए राजनीतिक समीकरणों की परीक्षा भी बन गया है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोरखपुर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मजबूत गढ़ माना जाता है। लेकिन गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक एमएलसी चुनाव में भाजपा को चुनौती विपक्ष के किसी पुराने दिग्गज से नहीं, बल्कि अपने ही पूर्व टिकट दावेदार से मिल रही है। भाजपा से टिकट न मिलने के बाद डॉ. संजयन त्रिपाठी पहले निर्दलीय मैदान में उतरे और फिर समाजवादी पार्टी में शामिल होकर उम्मीदवार बन गए। अब उनका मुकाबला भाजपा के मौजूदा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी से है। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होनी है। ऐसे में सवाल है कि भाजपा अपने पुराने नेता की बगावत से पैदा चुनौती पार कर पाएगी या सपा इस मौके का लाभ उठाकर पूर्वांचल की शिक्षक राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करेगी?
BJP से टिकट नहीं मिला तो SP ने बनाया उम्मीदवार
भाजपा ने 30 सितंबर को ध्रुव कुमार त्रिपाठी को उम्मीदवार घोषित किया। वह इस सीट से लगातार तीन चुनाव जीत चुके हैं और शिक्षक राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। डॉ. संजयन त्रिपाठी भी भाजपा से टिकट के दावेदार थे। टिकट न मिलने पर उन्होंने एक अक्टूबर को निर्दलीय नामांकन दाखिल किया, लेकिन 48 घंटे के भीतर सपा में शामिल हो गए। इसके बाद सपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बना दिया और पहले घोषित प्रत्याशी कमलेश यादव की उम्मीदवारी पीछे हो गई।
इस घटनाक्रम ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। शिक्षक एमएलसी चुनाव में पार्टी के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, शिक्षकों के बीच संपर्क और संगठनात्मक नेटवर्क भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
ध्रुव के सामने चौथी जीत की चुनौती
ध्रुव कुमार त्रिपाठी के पास तीन जीत का अनुभव, पुराने संगठनात्मक संपर्क और भाजपा का आधिकारिक समर्थन है। उनका संबंध उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट से रहा है। वरिष्ठ शिक्षक नेता देशबंधु शुक्ल ने भी उनके समर्थन की घोषणा की है। फिर भी चौथी जीत आसान नहीं मानी जा सकती। शिक्षक मतदाता उनके पिछले कार्यकाल और शिक्षक हितों से जुड़े कामकाज का आकलन करेंगे। पुराने संगठन का समर्थन जीत की गारंटी नहीं है, खासकर तब जब उनके सामने भाजपा से जुड़े रहे नेता को सपा का समर्थन मिल गया हो।
सपा को संजयन से कितनी उम्मीद?
संजयन त्रिपाठी की उम्मीदवारी सपा के लिए रणनीतिक लाभ हो सकती है। वह भाजपा में टिकट के दावेदार रहे हैं और संभव है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच उनका व्यक्तिगत संपर्क हो। हालांकि भाजपा से जुड़े सभी समर्थकों के उनके साथ आने की संभावना मान लेना जल्दबाजी होगी।
सपा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह संजयन के व्यक्तिगत नेटवर्क को अपने संगठनात्मक समर्थन से कितना जोड़ पाती है। भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के संजयन के समर्थन में रुख की खबरों ने भी मुकाबले को राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया है। हालांकि इससे भाजपा के पूरे संगठन में विभाजन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
17 जिलों में फैली सीट, गोरखपुर अकेला निर्णायक नहीं
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र 17 जिलों में फैला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 54 हजार शिक्षक मतदाता हैं और लगभग 200 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। गोरखपुर में 7,241 मतदाताओं के लिए 18 बूथ निर्धारित हैं। इसलिए केवल गोरखपुर में भाजपा की मजबूत स्थिति पूरे निर्वाचन क्षेत्र में जीत की गारंटी नहीं देती। सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ और अन्य जिलों के शिक्षक मतदाताओं का रुझान भी महत्वपूर्ण होगा। जिस उम्मीदवार का जिला स्तर पर संपर्क और संगठन अधिक मजबूत होगा, उसे लाभ मिल सकता है।
निर्दलीय उम्मीदवार और वरीयता मतदान भी अहम
मुकाबला केवल भाजपा और सपा तक सीमित नहीं है। नामांकन जांच के बाद 17 उम्मीदवार मैदान में थे, जबकि नाम वापसी के बाद एक रिपोर्ट में 16 उम्मीदवार बताए गए हैं। अजय सिंह, राजीव यादव समेत अन्य निर्दलीय प्रत्याशी प्रमुख उम्मीदवारों का गणित प्रभावित कर सकते हैं। शिक्षक एमएलसी चुनाव में वरीयता क्रम से मतदान होता है। इसलिए प्रथम वरीयता मतों के अलावा जरूरत पड़ने पर दूसरी और अगली वरीयताओं की गणना भी परिणाम तय कर सकती है।
शिक्षकों के मुद्दे बनेंगे निर्णायक
राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय है, लेकिन शिक्षक मतदाताओं के लिए पुरानी पेंशन, वेतन, वित्तविहीन शिक्षकों की स्थिति, नियुक्तियां, सेवा सुरक्षा और संस्थागत समस्याएं अधिक महत्वपूर्ण हैं। ध्रुव त्रिपाठी को अपने तीन कार्यकाल का हिसाब देना होगा, जबकि संजयन त्रिपाठी को यह बताना होगा कि वह मौजूदा प्रतिनिधि से अलग क्या कर सकते हैं। केवल पार्टी समर्थन या राजनीतिक समीकरण शिक्षकों को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।
2027 से पहले राजनीतिक संदेश
गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक कर्मभूमि है, लेकिन शिक्षक एमएलसी चुनाव सीमित और विशेष रूप से पंजीकृत मतदाताओं के बीच होता है। इसलिए इसके परिणाम को योगी की लोकप्रियता पर सीधा जनमत संग्रह नहीं माना जा सकता। फिर भी भाजपा के लिए यह चुनाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके टिकट दावेदार का सपा उम्मीदवार बनना संगठनात्मक चुनौती है। ध्रुव की जीत को भाजपा अपने संगठन और उम्मीदवार की मजबूती के रूप में पेश करेगी, जबकि संजयन की जीत सपा के लिए भाजपा के मजबूत क्षेत्र में सेंध का संदेश होगी।
हालांकि इस परिणाम से 2027 के विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ध्रुव त्रिपाठी लगातार चौथी जीत दर्ज करेंगे या टिकट से नाराज होकर सपा में गए संजयन त्रिपाठी नया राजनीतिक समीकरण बना देंगे।


