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सपा की 5 सीटों पर जीत से बदला UP विधान परिषद का समीकरण! क्या अब अखिलेश को मिलेगा LoP का पद?
UP MLC Election Result: यूपी एमएलसी चुनाव में सपा ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके साथ विधान परिषद में सपा की ताकत 12 एमएलसी हो जाएगी और नेता प्रतिपक्ष के लिए जरूरी 10 सदस्यों का आंकड़ा भी पूरा हो गया है।
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UP MLC Election Result: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुए एमएलसी चुनाव को यूपी की सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा था। 11 सीटों पर हुए इस चुनाव में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने पांच सीटों पर जीत दर्ज कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की चिंता बढ़ा दी है। इन पांच सीटों के साथ विधान परिषद (Legislative Council) में सपा की कुल ताकत अब 12 एमएलसी हो जाएगी।
इसका सबसे बड़ा तत्काल फायदा सपा को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के पद के रूप में मिलता दिख रहा है। दरअसल, इस पद के लिए कम से कम 10 एमएलसी का होना जरूरी है। ऐसे में पांच सीटों की जीत के बाद सपा के पास यह संख्या पूरी हो गई है।
सपा की सीटें बढ़ीं, भाजपा ने बरकरार रखी ताकत
इस चुनाव में सपा ने विधान परिषद में अपनी ताकत बढ़ाई है, जबकि भाजपा ने अपनी कुल सीटों की संख्या को बरकरार रखा है। सपा के लिए सबसे अहम बात यह रही कि वह वाराणसी की अपनी दोनों सीटों को बचाने में सफल रही।
लेकिन भाजपा को सबसे बड़ा झटका लखनऊ में लगा, जहां सपा ने भगवा पार्टी से स्नातक सीट छीन ली। इसके साथ ही सपा ने आगरा शिक्षक सीट पर भी जीत हासिल की है। यह सीट पहले एक निर्दलीय उम्मीदवार के पास थी।
अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2020 के एमएलसी चुनाव (2020 MLC Election) में भाजपा ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में सपा को तीन सीटें मिली थीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी।
विधानसभा चुनाव से पहले सपा का बढ़ेगा मनोबल
सपा के लिए इस चुनाव में सबसे बड़ी जीत लखनऊ स्नातक सीट (Lucknow Graduates Seat) पर रही। यहां कांति सिंह ने भाजपा उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह को 14,855 वोटों के अंतर से हरा दिया।
कांति सिंह को कुल 51,168 वोट मिले, जबकि भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 36,313 वोट हासिल हुए। इस तरह सपा ने भाजपा के कब्जे वाली सीट अपने नाम कर ली।
सपा को दूसरा बड़ा फायदा आगरा शिक्षक सीट (Agra Teachers Seat) पर हुआ। यहां आकाश अग्रवाल ने 14,046 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मिली इन जीतों को सपा के लिए अहम माना जा रहा है और इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बढ़ सकता है।
शिक्षकों के बीच अब भी भाजपा का दबदबा
हालांकि शिक्षक सीटों के आंकड़े देखें तो यहां भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा है। उत्तर प्रदेश में शिक्षकों की कुल छह सीटों में से भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि दो सीटें सपा के खाते में गईं।
भाजपा के उमेश द्विवेदी ने लखनऊ शिक्षक सीट पर जीत हासिल की। श्रीचंद शर्मा ने मेरठ शिक्षक सीट अपने नाम की, जबकि हरि सिंह ढिल्लों ने बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट पर जीत दर्ज की।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। इस मुकाबले में ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत हासिल की।
सपा के लिए इन नतीजों के क्या मायने हैं?
विधानसभा चुनाव से पहले मिली इन जीतों को सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी की विधान परिषद में संख्या बढ़ने के साथ ही उसे नेता प्रतिपक्ष का पद मिलने का रास्ता भी साफ होता दिख रहा है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जल्द ही वाराणसी का दौरा कर सकते हैं। उनका मानना है कि भाजपा की हार सिर्फ चुनावी हार नहीं है, बल्कि शिक्षकों, छात्रों और शिक्षा से जुड़ी भाजपा सरकार की नीतियों की हार है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि शिक्षित बेरोजगार स्नातकों ने भाजपा के खिलाफ अपना फैसला सुना दिया है। यानी सपा इन नतीजों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षकों, छात्रों और शिक्षित युवाओं के बीच अपने समर्थन के संकेत के तौर पर देख रही है।
अखिलेश ने लगाया चुनाव में हेरफेर का आरोप
एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर अखिलेश यादव ने चुनाव में हेरफेर का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि सपा का कोई भी उम्मीदवार वास्तव में नहीं हारा है, बल्कि भाजपा की हेरफेर के सामने वे जीत नहीं सके।
अखिलेश यादव ने कहा कि पार्टी अपने उम्मीदवारों को बिना सर्टिफिकेट के भी विजेता ही मानती है। उनके इस बयान के साथ ही सपा ने एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर अपना राजनीतिक रुख भी साफ कर दिया है।
कुल मिलाकर 11 सीटों के इस एमएलसी चुनाव में सपा ने पांच सीटें जीतकर विधान परिषद में अपनी ताकत बढ़ाई है। वाराणसी की दोनों सीटें बचाने के साथ लखनऊ स्नातक सीट भाजपा से छीनना और आगरा शिक्षक सीट पर जीत दर्ज करना सपा के लिए अहम रहा। वहीं, भाजपा ने अपनी कुल सीटों की संख्या बरकरार रखी है। अब इन नतीजों के बाद विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों की रणनीति पर सबकी नजर रहेगी।


