यूपी में 91% आरक्षण पर हाईकोर्ट की रोक, अब मायावती ने योगी सरकार को दिया बड़ा अल्टीमेटम!

UP NEET-UG Reservation Row: यूपी के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी दाखिले के लिए करीब 91% आरक्षण लागू करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। मायावती ने सरकार से तुरंत सुप्रीम कोर्ट जाने की मांग की है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 19 Sept 2026 10:01 AM IST
Mayawati Urges Government to Appeal in Supreme Court
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UP NEET-UG Reservation Row: उत्तर प्रदेश में चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी (NEET-UG) के तहत एमबीबीएस (MBBS) दाखिले में करीब 91 प्रतिशत आरक्षण के मामले ने सियासी बहस तेज कर दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इन कॉलेजों में आरक्षण के प्रावधान पर रोक लगा दी है। अब बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की मांग की है।

मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार के लिए उचित होगा कि वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तत्काल सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करे और जरूरी राहत की मांग करे। उनके मुताबिक, इस मामले में सरकार को अदालत के सामने आरक्षण की व्यवस्था को लेकर अपनी स्थिति मजबूती से रखनी चाहिए थी।

HC के आदेश के बाद मायावती की मांग

मायावती ने कहा कि चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एससी समुदाय (Scheduled Caste Community) के लिए अतिरिक्त आरक्षण का जो प्रावधान किया गया था, उसे सामान्य 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग व्यवस्था के तौर पर देखा जाना चाहिए।

उनका कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत के सामने इस बात पर मजबूती से दलील दी होती कि अनुसूचित जाति समुदाय के लिए किया गया अतिरिक्त आरक्षण सामान्य 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग है, तो अदालत इस दलील पर सकारात्मक तरीके से विचार कर सकती थी और शायद इस प्रावधान पर रोक नहीं लगती।

चार मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण का मामला

यह मामला उत्तर प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-यूजी के जरिए एमबीबीएस दाखिले से जुड़ा है। इनमें सहारनपुर, अंबेडकर नगर, कन्नौज और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

इन कॉलेजों में एससी समुदाय के लिए अतिरिक्त आरक्षण की व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। इसी मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने करीब 91 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।

अब मायावती चाहती हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करे और वहां इस व्यवस्था को लेकर अपनी दलील रखे।

मायावती ने बताई इन कॉलेजों की खास वजह

मायावती ने इन चार मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को एससी समुदाय से भी जोड़ा है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर, अंबेडकर नगर, कन्नौज और जालौन में स्थापित किए गए इन मेडिकल कॉलेजों के लिए धनराशि अनुसूचित जाति समुदाय के कल्याण और विकास के लिए बनाए गए विशेष घटक योजना (Special Component Plan) से दी गई थी।

मायावती का तर्क है कि जब इन मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए विशेष घटक योजना के तहत एससी समुदाय के कल्याण और विकास के लिए निर्धारित धन का इस्तेमाल किया गया है, तो इन संस्थानों में एससी समुदाय के लिए अतिरिक्त आरक्षण के प्रावधान को सामान्य आरक्षण से अलग देखा जाना चाहिए।

सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह

मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में समय गंवाए बिना सुप्रीम कोर्ट जाने को कहा है। उनका कहना है कि सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद तत्काल अपील दाखिल करनी चाहिए और जरूरी राहत हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।

उनके बयान का मुख्य जोर इसी बात पर है कि चार मेडिकल कॉलेजों में एससी समुदाय के लिए किया गया अतिरिक्त आरक्षण सामान्य 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि अलग प्रावधान है। इसी आधार पर वह सरकार से सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने की मांग कर रही हैं।

फिलहाल हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की ओर से करीब 91 प्रतिशत आरक्षण के क्रियान्वयन पर रोक लगाए जाने के बाद इस मामले में अगला बड़ा कदम उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से उठाया जाना है। मायावती ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपील कर इस मामले में राहत मांगने की बात कही है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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