TRENDING TAGS :
UP की नई Vidhan Sabha का रास्ता साफ: टेंडर जारी, जानें कब तक बनकर तैयार होगा नया विधानभवन
UP New Vidhan Sabha: उत्तर प्रदेश की नई विधानसभा का रास्ता साफ, लखनऊ के गोमती नगर (सहारा शहर) में बनने वाले इस भव्य विधानभवन कॉम्प्लेक्स के लिए LDA ने टेंडर जारी कर दिया है।
UP New Vidhan Sabha: राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर में स्थित सहारा शहर की भूमि पर अब नए और भव्य विधानभवन कॉम्प्लेक्स के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। लंबे समय से चल रही कयासबाजियों और तलाश पर आखिरकार लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मुहर लगा दी है। एलडीए की ओर से नए विधानभवन कॉम्प्लेक्स की डिजाइन और प्लानिंग के लिए कंसल्टेंट व आर्किटेक्ट के चयन हेतु आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया गया है। जारी किए गए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के मुताबिक इच्छुक कंपनियां और कंसल्टेंसी फर्में 23 मई से 21 जून तक अपने आवेदन जमा कर सकेंगी। इस चयन प्रक्रिया के पूरा होते ही प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। जिसके बाद ही इस भव्य परिसर की कुल निर्माण लागत और काम पूरा होने की समय-सीमा का वास्तविक निर्धारण हो सकेगा।
सत्ता का यह नया केंद्र गोमती नगर के विपुल खंड स्थित सहारा शहर की लगभग दो सौ पैंतालीस एकड़ की विशाल भूमि पर आकार लेगा। इस विशाल भूखंड में से 170 एकड़ जमीन नगर निगम की है जबकि 75 एकड़ हिस्सा लखनऊ विकास प्राधिकरण का है। यह वही जमीन है जहां कभी सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय का वाइट हाउस जैसा आलीशान महल बना हुआ था। इस पूरी जमीन को लेकर दशकों तक कानूनी और प्रशासनिक विवाद चलता रहा। दरअसल, नगर निगम ने 1994 में सहारा इंडिया हाउसिंग लिमिटेड को यह जमीन 30 साल की लीज पर दिया था जिसमें आवासीय कॉलोनी और ग्रीन बेल्ट विकसित करने की शर्त शामिल थी। शासन का आरोप था कि कंपनी ने लीज की शर्तों का उल्लंघन कर इसका कमर्शियल उपयोग किया। पिछले साल लीज की अवधि पूरी होने के बाद नगर निगम और एलडीए ने लीज आगे न बढ़ाते हुए इस पूरी बेशकीमती जमीन को वापस अपने सरकारी कब्जे में ले लिया था
प्रदेश सरकार पिछले कई सालों से नई विधानसभा के निर्माण के लिए शहर में एक बड़े और उपयुक्त भूखंड की तलाश में थी जो कनेक्टिविटी और सुरक्षा के लिहाज से बेहतर हो। गोमती नगर का यह इलाका इन सभी मानकों पर पूरी तरह खरा उतरा है। सरकार की योजना सिर्फ एक विधानसभा भवन बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस 245 एकड़ के परिसर को विधानभवन कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि इसी परिसर के भीतर उत्तर प्रदेश का नया सचिवालय, मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास और अन्य सभी महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तरों को भी एक साथ स्थापित किया जाएगा ताकि प्रशासनिक कार्यों में तेजी और सुगमता आ सके। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए बताया कि आर्किटेक्ट चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बजट प्रावधान और निर्माण की समय-सीमा
इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने हालिया बजट में 100 करोड़ रुपये की शुरुआती टोकन राशि का प्रावधान किया है। आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से लैस इस पूरे परिसर की अंतिम निर्माण लागत कई सौ करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो डिजाइन फाइनल होने के बाद स्पष्ट होगी। प्रशासनिक स्तर पर इस कार्य को युद्धस्तर पर पूरा करने की तैयारी है क्योंकि देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों का नया परिसीमन होना प्रस्तावित है। नए परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में विधायकों की संख्या वर्तमान 403 से काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। भविष्य की इसी बड़ी आवश्यकता और विधायकों के बैठने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए सरकार इस नए परिसर को हर हाल में अगले कुछ वर्षों के भीतर, संभावित रूप से 2029 या 2030 पूरा करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
मौजूदा ऐतिहासिक विधानसभा का गौरवशाली इतिहास
अगर लखनऊ के हजरतगंज मार्ग पर स्थित मौजूदा ऐतिहासिक विधानभवन की बात करें, तो यह उत्तर प्रदेश की स्थापत्य कला का एक अद्भुत और बेजोड़ नमूना है। इस ऐतिहासिक इमारत की आधारशिला 15 दिसंबर 1922 को तत्कालीन यूनाइटेड प्रोविंस के गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट बटलर द्वारा रखी गई थी। लगभग छह वर्षों के अथक निर्माण कार्य के बाद यह भवन बनकर तैयार हुआ था और इसका उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को तत्कालीन गवर्नर सर विलियम मैरिस ने किया था। ब्रिटिश काल में इसे काउंसिल हाउस के नाम से जाना जाता था और उस दौर में इस शानदार बहुमंजिला इमारत को बनाने में कुल 21 रुपये की लागत आई थी। इस आलीशान भवन का नक्शा उस समय के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट सर स्विंटन जैकब और श्री हीरा सिंह ने तैयार किया था।
वास्तुकला की भव्यता और नए भवन की जरूरत
यह मौजूदा भवन मिर्जापुर से मंगाए गए हल्के भूरे रंग के चुनार के बलुआ पत्थरों से तराशकर बनाया गया है जिसका मुख्य आकर्षण इसका अष्टकोणीय विशाल गुंबद है। इसकी गोलाकार छतों पर रोमन और भारतीय शैली की बेहद खूबसूरत नक्काशी की गई है जिसमें नाचते हुए मोर की आकृतियां उकेरी गई हैं। इसके भीतर और बाहर की बारीक जालियों तथा पच्चीकारी के काम को उस दौर में वाराणसी के विशेष कारीगरों ने तैयार किया था। हालांकि, यह ऐतिहासिक इमारत अब लगभग 102 साल पुरानी हो चुकी है।
पुरानी इमारत होने की वजह से इसमें आधुनिक डिजिटल तकनीक (जैसे ई-विधानसभा), भूकंप-रोधी सुरक्षा प्रणाली और भविष्य में बढ़ने वाले विधायकों के लिए पर्याप्त जगह की भारी कमी महसूस की जा रही थी। यही वजह है कि इस ऐतिहासिक इमारत को एक धरोहर के रूप में पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए प्रदेश सरकार अब गोमती नगर में एक नए युग की आधुनिक विधानसभा की ओर कदम बढ़ा रही है।


