UP Panchayat Chunav: यूपी के ग्राम प्रधानों की बढ़ी टेंशन, सरकार के इस नए आदेश ने उड़ाई रातों की नींद

UP Panchayat Chunav: यूपी पंचायत चुनाव टलने के बाद प्रशासक बने ग्राम प्रधानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब नए विकास कार्यों और फंड के इस्तेमाल के लिए डीएम की लिखित मंजूरी अनिवार्य कर दी गई है।

Shivam Shrivastava
Published on: 6 Jun 2026 10:44 PM IST (Updated on: 6 Jun 2026 10:45 PM IST)
Kanpur News
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Kanpur News (Image Credit-Social Media)

UP Gram Pradhan News: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव स्थगित होने के बाद सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की कमान सौंप दी थी। शुरुआत में इस फैसले से प्रधानों के बीच भारी खुशी का माहौल था, लेकिन इसके तुरंत बाद जारी हुए एक नए सरकारी आदेश ने उनकी सारी खुशियां छीन ली हैं। पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार, अब ग्राम प्रधान मनमर्जी से न तो कोई नया काम शुरू करवा पाएंगे और न ही फंड का इस्तेमाल कर सकेंगे। 27 मई से प्रशासक के तौर पर कार्यभार संभाल चुके इन 57,694 निवर्तमान प्रधानों को अब किसी भी नए विकास कार्य या बजट खर्च के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए सीधे जिलाधिकारी (डीएम) से लिखित मंजूरी लेनी होगी। इस कड़े नियम ने प्रधानों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं।

पुराने और अधूरे कार्यों के भुगतान को मिली राहत

प्रशासकों के लिए जारी गाइडलाइंस में केवल एक मोर्चे पर राहत दी गई है। प्रशासक के रूप में नियुक्ति से पहले की तारीखों में जो काम पहले से स्वीकृत, निर्माणाधीन या पूरे हो चुके थे, उनका भुगतान रोका नहीं जाएगा। ऐसे दैनिक कार्यों, मरम्मत और निर्माण परियोजनाओं का भौतिक एवं तकनीकी मूल्यांकन कराने के बाद प्रशासक पुराने नियमों के तहत ही पेमेंट जारी कर सकेंगे। हालांकि, केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी नई योजना, आयोग की नई सिफारिशों या नए बजट को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासकों को पूरा प्रस्ताव तैयार करके डीपीआरओ के माध्यम से डीएम के पास भेजना होगा और वहां से हरी झंडी मिलने के बाद ही काम आगे बढ़ेगा। इसके अलावा जिन पंचायतों में प्रधान का पद पहले से खाली था या प्रशासनिक समिति काम कर रही थी, वहां प्रधानों की जगह सहायक विकास अधिकारी (एडीओ पंचायत) को प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाएगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार के अध्यादेश को चुनौती

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के सरकार के इस पूरे फैसले के खिलाफ अब कानूनी मोर्चा भी खुल गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर 25 मई को जारी उस अध्यादेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बतौर प्रशासक छह महीने के लिए बढ़ाया गया है और चुनाव टाल दिए गए हैं। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के लॉ स्टूडेंट्स युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय द्वारा दाखिल इस याचिका पर सुनवाई के दौरान एक तकनीकी पेंच फंस गया। कोर्ट ने पाया कि याचिका में सीधे तौर पर संबंधित अधिनियम की वैधता को चुनौती नहीं दी गई थी। इस पर याचिकाकर्ताओं ने अपनी गलती सुधारने और याचिका में संशोधन करने के लिए अदालत से समय मांगा। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने उन्हें एक हफ्ते का समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तारीख तय की है।

Shivam Shrivastava
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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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