UP Politics: 'जिसकी जितनी आबादी, उतनी हिस्सेदारी', जाति जनगणना के सहारे यूपी में खोया जनाधार पाने की तैयारी में राहुल गांधी

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अति पिछड़ा वर्ग पर फोकस बढ़ा दिया है। राहुल गांधी सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी के मुद्दे को लेकर लगातार सक्रिय हैं, जबकि सपा और भाजपा भी चुनावी रणनीति में जुटी हैं।

Shivam Shrivastava
Published on: 23 May 2026 5:06 PM IST (Updated on: 23 May 2026 5:06 PM IST)
UP Politics: जिसकी जितनी आबादी, उतनी हिस्सेदारी, जाति जनगणना के सहारे यूपी में खोया जनाधार पाने की तैयारी में राहुल गांधी
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2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के जोर पकड़ने के साथ ही उत्तर प्रदेश में राजनैतिक बिसात बिछने लगी है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला बढ़ता दिख रहा है। सभी बड़ी पार्टियां चुनाव से पहले अपने वोट बेस को मजबूत करने के लिए एक्टिव हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही चुनावी मोड में आ चुके हैं। जबकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी राज्य में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। साथ ही, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ज़मीनी स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं। बढ़ी राजनैतिक गतिविधि के बीच कांग्रेस की नई रणनीति ने राज्य में नई राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।

विधानसभा चुनावों में एक साल से भी कम समय बचा है ऐसे में कांग्रेस ने अति पिछड़े वर्ग (EBC) वोट बैंक पर खास ध्यान देते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति को बदलना शुरू कर दिया है। अमेठी और रायबरेली के अपने हालिया दौरों के दौरान, राहुल गांधी ने कई जनसभाओं को संबोधित किया और पिछड़े समुदायों को एक मज़बूत सामाजिक न्याय का संदेश देने की कोशिश में मीरा पासी की एक मूर्ति का भी अनावरण किया।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस जून के बीच में लखनऊ में एक बड़ी मीटिंग करने की तैयारी कर रही है। जिसमें EBC समुदायों को एकजुट करने की स्ट्रेटेजी पर चर्चा की जाएगी। पार्टी का मानना है कि समाज का यह तबका 2027 के चुनावों का नतीजा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

2024 के लोकसभा चुनाव कैंपेन के दौरान राहुल गांधी ने बार-बार पिछड़े वर्गों, अति पिछड़े समूहों और दलितों से जुड़े मुद्दों पर ज़ोर दिया था। जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी जैसे नारों के जरिये उन्होंने सामाजिक न्याय और रिप्रेजेंटेशन के बारे में कांग्रेस की बात को और मजबूत करने की कोशिश की।

राहुल गांधी ने लगातार देश भर में जाति जनगणना की भी मांग की है, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम का मकसद इस मुद्दे को राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक रिप्रेजेंटेशन से जोड़कर पिछड़े समुदायों के बीच कांग्रेस की पकड़ को मज़बूत करना है।

सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस अब नाई, राजभर, निषाद, कश्यप, विश्वकर्मा और कई दूसरी अति पिछड़ी जातियों के बीच सपोर्ट बनाने की कोशिश कर रही है। माना जाता है कि राज्य में इनकी आबादी गभग 26 परसेंट हैं जबकि उत्तर प्रदेश में कुल OBC आबादी 50 परसेंट से ज़्यादा होने का अनुमान है।

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि अगर जाति जनगणना की बहस तेज़ होती है तो पार्टी को इन तबकों से काफ़ी सपोर्ट मिल सकता है। पिछले कुछ महीनों में, कांग्रेस अपने बड़े आउटरीच कैंपेन के तहत किसानों, वकीलों, जाटों, गुर्जरों, निषादों, पासियों, लोधियों और ऊंची जाति के सदस्यों के साथ रेगुलर मीटिंग भी कर रही है। पार्टी का मकसद न सिर्फ़ चुनावी गठबंधन को मजबूत करना है बल्कि जमीनी लेवल पर अपने ऑर्गेनाइज़ेशनल स्ट्रक्चर को फिर से बनाना भी है।

कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि 2027 में विपक्षी एकता से उन्हें एक बार फिर फ़ायदा हो सकता है, ठीक वैसे ही जैसे 2024 के लोकसभा चुनाव में हुआ था जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ा था और BJP के ख़िलाफ़ संविधान और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठाया था। राहुल गांधी ने BJP और केंद्र सरकार पर अपने तीखे हमले जारी रखे हैं।

रायबरेली में बहुजन स्वाभिमान सभा के दौरान उन्होंने सोशल जस्टिस और कॉन्स्टिट्यूशनल वैल्यूज के मुद्दों पर रूलिंग पार्टी पर निशाना साधा था जिससे पूरे राज्य में नई पॉलिटिकल बहस शुरू हो गई है। पॉलिटिकल जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अब अपना खोया हुआ सपोर्ट बेस वापस पाने की कोशिश में उत्तर प्रदेश में खुद को ज़्यादा अग्रेसिव अपोजिशन फोर्स के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है।

इस बीच, अखिलेश यादव पहले ही इशारा कर चुके हैं कि INDIA अलायंस उत्तर प्रदेश में एकजुट रहेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ़ किया कि अलायंस के अंदर सीट-शेयरिंग विनेबिलिटी फैक्टर पर निर्भर करेगी जिससे सीट डिस्ट्रीब्यूशन को लेकर अलायंस पार्टनर्स के बीच भविष्य में टेंशन की संभावना बढ़ गई है।

कांग्रेस गांवों में अपनी जमीनी मौजूदगी को मजबूत करने की कोशिश में पंचायत चुनाव भी अग्रेसिव तरीके से लड़ने की तैयारी कर रही है। पार्टी का मानना है कि एक मजबूत रूरल ऑर्गनाइजेशन से उसे असेंबली इलेक्शन में काफी फायदा हो सकता है।

कांग्रेस जनरल सेक्रेटरी और उत्तर प्रदेश इंचार्ज अविनाश पांडे पहले ही इशारा कर चुके हैं कि पार्टी पंचायत, ब्लॉक और डिस्ट्रिक्ट पंचायत लेवल पर बड़ी संख्या में सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान बना रही है। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस ने पहले ही कई ऐसे चुनाव क्षेत्रों की पहचान कर ली है जहां उसे मज़बूत इलेक्शन पोटेंशियल दिख रहा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच पॉलिटिकल इक्वेशन पिछले कुछ सालों में काफी बदला है। हालांकि 2017 के असेंबली इलेक्शन में अलायंस उम्मीद के मुताबिक रिजल्ट नहीं दे पाया, लेकिन 2024 के लोकसभा इलेक्शन में जॉइंट स्ट्रेटेजी ज्यादा सफल दिखी। समाजवादी पार्टी को बड़ी बढ़त मिली, जबकि कांग्रेस ने भी कई सीटों पर काफी सुधार किया।

Shivam Shrivastava

Shivam Shrivastava

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Shivam Shrivastava is Senior Content Writer

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