UP BJP: UP में BJP को लगेगा तगड़ा झटका! नवंबर में सपा पलटेगी पूरा गेम, NDA की दो-तिहाई बहुमत भी होगी फेल?

NDA Two-Third Majority: उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के समीकरण से BJP और NDA की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अखिलेश यादव की सपा नवंबर में बड़ा खेल कर सकती है। जानिए पूरा सियासी गणित।

Harsh Srivastava
Published on: 20 Jun 2026 10:27 AM IST (Updated on: 20 Jun 2026 10:28 AM IST)
NDA Two-Third Majority:
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NDA Two-Third Majority: देश की राजनीति में उच्च सदन यानी राज्यसभा को लेकर एक बहुत बड़ी और दिलचस्प जंग छिड़ गई है. केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) संसद के इस ऊपरी सदन में इतिहास रचने के बेहद करीब पहुंच चुका है. मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से एनडीए अब राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े से महज 13 सीट की दूरी पर खड़ा है. लेकिन सत्ताधारी गठबंधन के इस विजय रथ को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश से एक बहुत बड़ा रोड़ा सामने आ सकता है.

साल के अंत में देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है. यूपी विधानसभा में अपनी बढ़ी हुई ताकत और विधायकों की संख्या के दम पर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) यहां तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी है. सपा को मिलने वाला यह सीधा फायदा राज्यसभा में एनडीए की रफ्तार को धीमा कर सकता है.

हालिया चुनाव में NDA का दबदबा

संसद के ऊपरी सदन के लिए हुए हालिया चुनावों में एनडीए ने अपना परचम लहराते हुए विपक्षी खेमे को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है. कुल 26 सीटों के लिए हुए इस चुनावी मुकाबले में से 19 सीटों पर एनडीए के उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की है. इसके मुकाबले कांग्रेस की अगुवाई वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के हिस्से में केवल 6 सीटें ही आ सकीं, जबकि बची हुई 1 सीट मिजोरम की जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के खाते में गई. इन 26 सीटों में से 24 सीटों का फैसला तो 11 जून को ही निर्विरोध हो गया था, जिसमें 19 सीटें सीधे एनडीए के पाले में चली गई थीं.

बहुमत के जादुई आंकड़े का पूरा गणित

इन ताजा और सनसनीखेज नतीजों के आने के बाद 245 सदस्यों वाली राज्यसभा का पूरा समीकरण ही बदल गया है. अब सदन में एनडीए के कुल माननीय सांसदों की संख्या बढ़कर 150 तक पहुंच चुकी है. आपको बता दें कि उच्च सदन में किसी भी बड़े संवैधानिक संशोधन बिल को अकेले दम पर पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 163 सीटों की जरूरत होती है. इस जादुई आंकड़े से एनडीए अब सिर्फ 13 कदम दूर है.

झारखंड में 'क्रॉस वोटिंग' का खेला

झारखंड के रणमैदान में तो विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद एनडीए ने अपनी चाणक्य नीति से बड़ा उलटफेर कर दिया. वहां एनडीए के समर्थन से चुनावी मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी ने विपक्षी विधायकों की क्रॉस वोटिंग के सहारे एक चौंकाने वाली जीत अपने नाम कर ली. वहीं दूसरी सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैद्यनाथ राम के खाते में गई. उधर मिजोरम में सत्ताधारी जेडपीएम के के. लालतलुआंगकिमा ने अपनी पार्टी का खाता पहली बार राज्यसभा में खोलकर इतिहास रच दिया.

केजरीवाल और ममता की पार्टी में फूट से चांदी ही चांदी

विपक्षी दलों के भीतर मचे आंतरिक घमासान का सीधा फायदा भी एनडीए की झोली में जाकर गिर रहा है. आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर हुई बड़ी बगावत के बाद राघव चड्ढा अपनी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों को लेकर सीधे एनडीए के पाले में आ खड़े हुए, जिससे सरकार को अप्रत्याशित मजबूती मिली. इसके अलावा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी तगड़ा झटका लगा है, जहां उनके 3 सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. अगर आगामी उपचुनावों में एनडीए इन तीनों सीटों पर कब्जा कर लेता है, तो उनका कुल आंकड़ा 153 तक पहुंच जाएगा, जो दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ 10 सीट कम होगा. इस टूट-फूट के कारण विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की ताकत घटकर महज 64 सांसदों पर सिमट गई है.

NDA की राह का सबसे बड़ा रोड़ा

भले ही एनडीए देश के संविधान को बदलने या बड़े बिल पास कराने वाले नंबरों के पास पहुंच रहा है, लेकिन 163 का आंकड़ा पार करना इतना आसान नहीं होगा. नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कई दिग्गज सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिससे पूरा खेल पलट सकता है.

25 नवंबर 2026 को जिन बड़े चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी सूची इस प्रकार है:

उत्तराखंड से बीजेपी के नरेश बंसल.

उत्तर प्रदेश से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (बीजेपी).

यूपी से ही पूर्व डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा (बीजेपी).

बीजेपी की सीमा द्विवेदी, बृजलाल, अरुण सिंह, नीरज शेखर, गीता शाक्य और बी. एल. वर्मा (सभी उत्तर प्रदेश).

समाजवादी पार्टी के सबसे कद्दावर नेता रामगोपाल यादव (उत्तर प्रदेश).

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के रामजी गौतम (उत्तर प्रदेश).

उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायकों की बदली हुई संख्या के कारण इस बार बीजेपी के लिए अपनी ये सभी सीटें बचाना नामुमकिन होगा और अखिलेश यादव की पार्टी यहां कई सीटें झटक सकती है. इसके अलावा आने वाले समय में वाईएसआरसीपी (YSRCP) के 7 और बीजेडी (BJD) के 6 सांसद भी किंगमेकर की भूमिका में नजर आएंगे. ऊपरी सदन में मजबूत होने के बावजूद, लोकसभा के मोर्चे पर एनडीए आज भी 363 सीटों के दो-तिहाई बहुमत वाले आंकड़े से काफी पीछे है.

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