यूपी राज्यसभा चुनाव: बसपा की सीट पर सपा की नजर, 8वीं सीट के लिए BJP का क्या होगा दांव?

UP Rajya Sabha Election 2026 में 10 सीटों पर मुकाबला होगा। BSP की खाली हो रही सीट पर सपा की नजर है, जबकि BJP के 8वें उम्मीदवार को लेकर वोटों का गणित दिलचस्प है। जानें पूरा समीकरण।

Alakha Singh
Published on: 22 Sept 2026 11:09 PM IST
यूपी राज्यसभा चुनाव: बसपा की सीट पर सपा की नजर, 8वीं सीट के लिए BJP का क्या होगा दांव?
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी गणित फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में असली मुकाबला सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि विधायकों के आंकड़े, दूसरी वरीयता के वोट और संभावित क्रॉस वोटिंग का भी होगा। चुनाव आयोग ने मंगलवार को कार्यक्रम जारी कर दिया है। यूपी की 10 सीटों में आठ फिलहाल बीजेपी, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है।

मौजूदा विधानसभा गणित को देखें तो सपा के सामने अपनी मौजूदा सीट बरकरार रखने के साथ-साथ बसपा की खाली होने वाली सीट पर दावा मजबूत करने का मौका है। दूसरी तरफ बीजेपी के सामने चुनौती अपनी आठवीं सीट को लेकर होगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सपा बसपा की राज्यसभा सीट अपने पाले में कर लेगी या बीजेपी आठवीं सीट के लिए फिर कोई सियासी दांव चलेगी?

37 वोट पर एक राज्यसभा सीट का गणित

यूपी विधानसभा की कुल 403 सीटों में इस समय छह सीटें खाली हैं। यानी प्रभावी तौर पर 397 विधायक राज्यसभा चुनाव में मतदान करेंगे। मौजूदा फॉर्मूले के हिसाब से एक राज्यसभा सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वाले वोट जरूरी होंगे।

यही आंकड़ा इस चुनाव को दिलचस्प बनाता है। उपलब्ध संख्या बल के आधार पर बीजेपी अपने मौजूदा आठ में से सात सदस्यों को आसानी से राज्यसभा भेजने की स्थिति में दिखाई देती है। लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। यहीं से चुनाव में सहयोगी दलों, निर्दलीय विधायकों और संभावित क्रॉस वोटिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

सपा के लिए क्यों खुल रहा है रास्ता?

सपा के पास फिलहाल कांग्रेस के साथ मिलाकर विपक्षी खेमे में 103 विधायक बताए जा रहे हैं। दो राज्यसभा सीटों के लिए 74 वोट पर्याप्त होंगे। इस गणित के बाद सपा खेमे के पास अतिरिक्त वोट बचते हैं।

यही अतिरिक्त संख्या बसपा की मौजूदा राज्यसभा सीट को लेकर सपा की रणनीति का आधार बन सकती है। बसपा के पास यूपी विधानसभा में कोई विधायक नहीं है और उसके राज्यसभा सदस्य रामजी लाल गौतम का कार्यकाल भी इस चुनाव चक्र में खत्म हो रहा है। चुनाव के बाद बसपा का यूपी से राज्यसभा प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति बन रही है।

हालांकि सपा को सीट मिलने का रास्ता संख्या बल से मजबूत दिखता है, लेकिन अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा, नामांकन और दूसरी वरीयता के वोटों के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।

बीजेपी की आठवीं सीट पर क्यों निगाह?

बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन विधानसभा में स्पष्ट बहुमत के साथ है। यही वजह है कि पार्टी के सात उम्मीदवारों की स्थिति अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जा रही है। लेकिन आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाना उसके सामने अलग चुनौती होगी।

यहीं से पिछला राज्यसभा चुनाव भी चर्चा में आ जाता है। पिछले चुनाव में बीजेपी ने अपने आठवें उम्मीदवार को पर्याप्त प्रथम वरीयता वाले वोट न होने के बावजूद विपक्षी खेमे में सेंधमारी और वोटों के प्रबंधन के जरिए जीत दिलाई थी। इस बार भी अगर बीजेपी आठवां उम्मीदवार उतारती है तो सहयोगी दलों के अलावा विपक्षी विधायकों पर नजर रह सकती है।

हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि बीजेपी आठवीं सीट के लिए उम्मीदवार उतारेगी या नहीं। अंतिम फैसला उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।

क्या फिर हो सकता है क्रॉस वोटिंग का खेल?

यूपी के राज्यसभा चुनावों में क्रॉस वोटिंग कोई नई बात नहीं है। इसलिए सिर्फ पार्टीवार संख्या बल से पूरा चुनाव समझना आसान नहीं होगा।

अगर बीजेपी आठवां उम्मीदवार उतारती है और सपा भी दो के बजाय तीसरे उम्मीदवार को मैदान में लाती है, तो मुकाबला दिलचस्प हो सकता है। ऐसी स्थिति में पहली वरीयता के साथ दूसरी वरीयता के वोट निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं।

यानी चुनाव का असली खेल नामांकन के बाद शुरू होगा। किस पार्टी के पास कितने अतिरिक्त वोट हैं, कौन किस उम्मीदवार को समर्थन देता है और कौन-से विधायक किस रणनीति के साथ मतदान करते हैं- इन सवालों पर राजनीतिक दलों की निगाह रहेगी।

राजा भैया और अन्य विधायकों की भूमिका

इस चुनाव में उन विधायकों की भूमिका भी चर्चा में रहेगी जो किसी बड़े गठबंधन के सीधे हिस्से में नहीं हैं। पिछले राज्यसभा चुनाव में जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने बीजेपी के आठवें उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में समर्थन दिया था।

इसके अलावा असंबद्ध माने जाने वाले विधायकों का रुख भी चुनावी गणित को प्रभावित कर सकता है। हालांकि मतदान से पहले किसी विधायक के रुख को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

बसपा की सीट, सपा का फायदा और बीजेपी का दांव

इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बसपा की मौजूदा राज्यसभा सीट सपा के खाते में जाएगी? मौजूदा विधानसभा संख्या बल सपा के लिए इस दिशा में मजबूत आधार बनाता है।

दूसरी तरफ बीजेपी के सामने अपने मौजूदा आठ सीटों के प्रतिनिधित्व को बरकरार रखने की चुनौती होगी। सात सीटों का गणित अपेक्षाकृत सुरक्षित दिखता है, लेकिन आठवीं सीट के लिए पार्टी को अतिरिक्त वोटों का इंतजाम करना पड़ सकता है।

इसलिए यूपी का राज्यसभा चुनाव सिर्फ बीजेपी बनाम सपा की सीधी लड़ाई नहीं रह सकता। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद सहयोगी दलों, निर्दलीय विधायकों और दूसरी वरीयता के वोटों की अहमियत बढ़ सकती है।

फिलहाल संख्या बल सपा को दो सीटों की स्थिति में रखता है और बीजेपी को आठ सीटों तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त राजनीतिक गणित साधना पड़ सकता है। लेकिन राज्यसभा चुनाव में अंतिम तस्वीर मतदान और वोटों की वरीयता से ही तय होगी।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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