साफ हो गई UP राज्यसभा चुनाव की तस्वीर! दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज, किसकी होगी जीत?

UP Rajya Sabha Election: यूपी राज्यसभा चुनाव में दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज हो गए हैं। अब 10 सीटों पर बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार मैदान में हैं।

Aditya Kumar Verma
Published on: 7 Oct 2026 9:39 PM IST
UP Rajya Sabha Election
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UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की 10 सीटों को लेकर चल रही चुनावी प्रक्रिया की तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज कर दिए गए। इसके बाद अब राज्यसभा की 10 सीटों के लिए बीजेपी के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार ही मैदान में रह गए हैं।

शुरुआत में इन 10 सीटों के लिए कुल 12 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। इनमें दो निर्दलीय प्रत्याशी ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना भी शामिल थे। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दोनों के पर्चों में जरूरी प्रस्तावक संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं मिलीं। इसके बाद दोनों की उम्मीदवारी खारिज कर दी गई।

अब उम्मीदवारों की संख्या घटकर 10 रह गई है, जबकि राज्यसभा की सीटें भी 10 ही हैं। ऐसे में अगर आगे की प्रक्रिया के दौरान कोई नया बदलाव नहीं होता है तो इन सीटों पर मतदान (Voting) की जरूरत नहीं पड़ेगी।

दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे क्यों हुए खारिज?

नामांकन पत्रों की जांच के दौरान ओंकारनाथ चौरसिया और कांते सायना के पर्चों में जरूरी प्रस्तावक संबंधी शर्त पूरी नहीं मिली। राज्यसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के नामांकन के लिए 10 विधायकों के प्रस्तावक हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।

दोनों निर्दलीय प्रत्याशी यह जरूरी औपचारिकता पूरी नहीं कर सके। इसी वजह से जांच के दौरान उनके नामांकन पत्र निरस्त कर दिए गए। इसके साथ ही 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवारों से शुरू हुई चुनावी तस्वीर बदलकर 10 उम्मीदवारों तक पहुंच गई।

बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार

दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन खारिज होने के बाद अब मैदान में बीजेपी (BJP) के 8 उम्मीदवार हैं। वहीं समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) की तरफ से 2 उम्मीदवार राज्यसभा की सीटों के लिए मैदान में हैं।

दोनों पार्टियों के उम्मीदवारों की संख्या मिलाकर कुल 10 होती है। राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भी 10 ही उम्मीदवार मैदान में बचे हैं। ऐसे में अगर उम्मीदवारों की संख्या आगे भी सीटों के बराबर रहती है तो मतदान की जरूरत नहीं होगी।

इस स्थिति में सभी 10 उम्मीदवार निर्विरोध (Unopposed) चुने जा सकते हैं। हालांकि, अभी आधिकारिक तौर पर निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा नहीं हुई है और इसके लिए नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

9 अक्टूबर को खत्म होगी नाम वापसी की प्रक्रिया

अब सभी की नजर 9 अक्टूबर पर है। 9 अक्टूबर नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है। इस तारीख तक अगर कोई नया बदलाव नहीं होता है और कोई उम्मीदवार अपना नाम वापस नहीं लेता है, तो इसके बाद 10 सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

यानी अभी तक की स्थिति में उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनावी मुकाबले की जरूरत नहीं दिख रही है। दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के बाद बीजेपी के 8 और सपा के 2 उम्मीदवार ही मैदान में बचे हैं।

मतदान की जरूरत नहीं पड़ने की स्थिति

राज्यसभा चुनाव की इस प्रक्रिया में फिलहाल सीटों और उम्मीदवारों की संख्या बराबर हो गई है। 10 सीटों के लिए 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। ऐसे में अगर 9 अक्टूबर तक तस्वीर में कोई बदलाव नहीं आता है तो चुनाव के लिए मतदान नहीं कराया जाएगा।

नाम वापसी की आखिरी तारीख के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। इसके बाद अगर उम्मीदवारों की संख्या 10 ही रहती है तो सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

फिलहाल दो निर्दलीय प्रत्याशियों के पर्चे खारिज होने के बाद उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों की चुनावी तस्वीर बदल गई है। शुरुआत में जहां 12 उम्मीदवार मैदान में थे, वहीं अब बीजेपी के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार ही मुकाबले में हैं।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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