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UP RERA Rules: घर खरीदारों को UP RERA की बड़ी राहत, गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट्स की भी अब ऑनलाइन शिकायत
UP RERA Rules 2026: UP RERA ने नए नियम लागू किए हैं। अब गैर-पंजीकृत प्रोजेक्ट्स के खरीदार भी ऑनलाइन शिकायत कर सकेंगे। परिवार में फ्लैट ट्रांसफर शुल्क ₹1,000 तक सीमित किया गया।
UP RERA Rules 2026 (Image Credit-Social Media)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अपंजीकृत (गैर-रेरा) प्रोजेक्ट्स में फंसे घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्राधिकरण ने नियमों में संशोधन करते हुए अब ऐसे प्रोजेक्ट्स के पीड़ितों को भी पोर्टल पर सीधे ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दे दिया है जो रेरा में पंजीकृत नहीं हैं। इसके साथ ही यूपी रेरा ने वर्ष 2019 के सामान्य नियमों को 13 जुलाई 2026 तक किए गए सभी 12 संशोधनों के साथ समेकित कर नए सिरे से जारी कर दिया है।
नए नियमों के अनुसार, गैर-पंजीकृत परियोजना के आवंटियों को ऑनलाइन शिकायत दर्ज करते समय प्रोजेक्ट, साइट लोकेशन और प्रमोटर (बिल्डर) से संबंधित बुनियादी विवरण पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा, जिसके आधार पर प्राधिकरण बिल्डर के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू करेगा।
पारदर्शिता पर जोर: आर्किटेक्ट से लेकर सीए तक की जानकारी होगी सार्वजनिक
रेरा के नए नियमों के तहत अब बिल्डरों के लिए प्रोजेक्ट से जुड़े मुख्य जिम्मेदारों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया गया है।
जिम्मेदार अधिकारियों का विवरण: प्रमोटर को पोर्टल पर प्रोजेक्ट के आर्किटेक्ट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजर (CRM) का नाम, पद और संपर्क विवरण प्रदर्शित करना होगा।
हेल्पलाइन और अलग-अलग ईमेल: ग्राहकों से संपर्क और समाधान के लिए एक चालू फोन या टोल-फ्री नंबर देना होगा। इसके अलावा, प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रशासनिक कार्य, ग्राहक शिकायत और एजेंट्स/आवंटियों के लिए 4 अलग-अलग आधिकारिक ईमेल आईडी बनानी होंगी।
कंपनी प्रोफाइल व वित्तीय रिकॉर्ड: हर बिल्डर को रेरा पोर्टल पर प्रोफाइल बनाकर कंपनी के निदेशकों, भागीदारों या ट्रस्टियों का पूरा विवरण, वित्तीय स्थिति और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) नियमित अपडेट रखना होगा।
स्वीकृत नाम और निर्धारित प्रारूप में पजेशन: बिल्डर केवल उसी नाम से प्रोजेक्ट का प्रचार या बिक्री कर सकेगा जो स्वीकृत नक्शे (Sanctioned Map) में दर्ज है। साथ ही, खरीदार को कब्जा देते समय रेरा द्वारा निर्धारित मानक प्रारूप में ही 'ऑफर ऑफ पजेशन' (Offer of Possession) जारी करना अनिवार्य होगा।
परिवार में फ्लैट ट्रांसफर पर महज 1000 रुपये शुल्क
प्राधिकरण ने फ्लैट ट्रांसफर शुल्क को लेकर बिल्डरों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया है। नए नियम के अनुसार, यदि किसी आवंटी के निधन के बाद या सामान्य स्थिति में फ्लैट/प्लॉट परिवार के किसी वैध सदस्य के नाम ट्रांसफर किया जाता है, तो बिल्डर अधिकतम केवल 1,000 रुपये ही ट्रांसफर शुल्क ले सकेगा। वहीं, परिवार से बाहर किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को आवंटन ट्रांसफर करने पर यह शुल्क अधिकतम 25,000 रुपये तक ही सीमित रहेगा।
मेंटेनेंस फंड के मनमाने इस्तेमाल पर रोक, पूरा पैसा RWA को सौंपना अनिवार्य
मेंटेनेंस (रखरखाव) शुल्क को लेकर होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। खरीदारों से मेंटेनेंस और कॉर्पस फंड के रूप में वसूली गई पूरी धनराशि बिल्डर को एक अलग बैंक खाते (Escrow Account) में रखनी होगी। प्रोजेक्ट का काम पूरा होने और कॉमन एरिया की जिम्मेदारी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA/AOA) को सौंपते समय यह पूरी राशि ब्याज समेत एसोसिएशन के खाते में ट्रांसफर करनी होगी। इस पैसे का उपयोग केवल कॉमन एरिया की मरम्मत, रखरखाव और नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए ही किया जा सकेगा, जिसका पूरा वित्तीय हिसाब और वार्षिक ऑडिट कराना भी अनिवार्य होगा।


