UP रोडवेज में दिव्यांग यात्रियों को QR टिकट, 80% या अधिक दिव्यांगता पर सहयात्री भी मुफ्त

UP Roadways: यूपी रोडवेज में दिव्यांग यात्रियों के लिए नई QR कोड टिकट व्यवस्था शुरू हुई है। 40% या अधिक दिव्यांगता पर शून्य मूल्य टिकट और 80% या अधिक पर सहायक को भी मुफ्त यात्रा मिलेगी।

Newstrack Network
Published on: 26 Sept 2026 12:29 AM IST
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UP Roadways: उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की साधारण बसों में दिव्यांग यात्रियों की निश्शुल्क यात्रा अब कागजी जांच से आगे बढ़कर सीधे डिजिटल सत्यापन से जुड़ गई है। निगम ने अपनी इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीनों यानी ईटीआईएम में ऐसी सुविधा शुरू की है, जिसमें परिचालक दिव्यांग यात्री के विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र यानी यूडीआईडी कार्ड पर बने QR कोड को स्कैन करेगा और पात्रता की पुष्टि होते ही मशीन शून्य मूल्य का टिकट जारी कर देगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि मशीन कार्ड में दर्ज प्रमाणित दिव्यांगता प्रतिशत के आधार पर यह भी तय करेगी कि केवल दिव्यांग यात्री का एक निश्शुल्क टिकट बनना है या उसके साथ यात्रा कर रहे सहायक का भी दूसरा शून्य मूल्य टिकट जारी होना है। नई डिजिटल व्यवस्था 23 सितंबर से लागू होने की जानकारी सामने आई है।

नई व्यवस्था निश्शुल्क यात्रा का कोई नया अधिकार शुरू नहीं कर रही है, बल्कि पहले से उपलब्ध सुविधा को डिजिटल और सत्यापन योग्य बना रही है। उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत या उससे अधिक प्रमाणित दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्ति को परिवहन निगम की साधारण बस में निश्शुल्क यात्रा की सुविधा पहले से है। सरकारी योजना विवरण के अनुसार 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता अथवा बहुदिव्यांगता की स्थिति में पात्र सहायक को भी निश्शुल्क यात्रा का लाभ मिल सकता है। यह सुविधा वातानुकूलित, स्लीपर और वीडियो बसों पर लागू नहीं होती।

बस में चढ़ते ही परिचालक ऐसे बनाएगा शून्य मूल्य का टिकट

नई प्रक्रिया में परिचालक सबसे पहले यात्री से यह जानकारी लेगा कि वह कहां से बस में चढ़ा है और कहां तक यात्रा करेगा। इन दोनों स्थानों को ईटीआईएम में दर्ज करने के बाद मशीन पर उपलब्ध ‘दिव्यांगजन’ विकल्प चुना जाएगा। इसके बाद यात्री के यूडीआईडी कार्ड पर मौजूद QR कोड मशीन से स्कैन होगा। स्कैन सफल होते ही मशीन की स्क्रीन पर संबंधित यात्री का यूडीआईडी नंबर, नाम, जन्मतिथि, दिव्यांगता का प्रकार, प्रमाणित दिव्यांगता प्रतिशत और आधार संख्या के छिपे हुए अंक दिखाई देंगे। इसके बाद पात्रता के अनुसार शून्य मूल्य का टिकट निकलेगा।

इस व्यवस्था में यूडीआईडी कार्ड महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल सामान्य पहचान पत्र नहीं बल्कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय दिव्यांगता पहचान प्रणाली का हिस्सा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अनुसार यूडीआईडी देशभर में मान्य एकीकृत पहचान और दिव्यांगता सत्यापन दस्तावेज है। इसके माध्यम से प्रमाणित दिव्यांगता संबंधी जानकारी एक केंद्रीकृत प्रणाली से जुड़ी रहती है और विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा सुविधाओं में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

40% पर एक टिकट, 80% या अधिक होने पर सहायक को भी लाभ

इस व्यवस्था का सबसे उपयोगी हिस्सा यह है कि अब टिकटों की संख्या तय करने का काम परिचालक को अलग से नहीं करना होगा। कार्ड स्कैन होने के बाद प्रमाणित दिव्यांगता प्रतिशत देखकर ईटीआईएम स्वतः पात्रता निर्धारित करेगी। 40 प्रतिशत या उससे अधिक और 80 प्रतिशत से कम दिव्यांगता पर दिव्यांग यात्री के लिए एक शून्य मूल्य टिकट जारी होगा, जबकि 80 प्रतिशत या उससे अधिक की पात्र श्रेणी में दिव्यांग यात्री के साथ एक सहायक के लिए भी निश्शुल्क टिकट की व्यवस्था है। सरकारी योजना के उपलब्ध विवरण में 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता अथवा बहुदिव्यांगता की स्थिति में सहायक को भी निश्शुल्क यात्रा की अनुमति दी गई है।

यहां प्रकाशित रिपोर्टों में सीमा को लेकर थोड़ी अलग-अलग भाषा दिखाई देती है। कुछ रिपोर्टों में ‘80 प्रतिशत से अधिक’ लिखा गया है, जबकि पुरानी सरकारी योजना के उपलब्ध आधिकारिक विवरण में ‘80 प्रतिशत या अधिक’ दिव्यांगता पर सहायक की सुविधा दर्ज है। इसलिए पात्रता बताते समय आधिकारिक योजना की ‘80 प्रतिशत या अधिक’ सीमा को प्राथमिकता देना अधिक उचित है।

दूसरे टिकट का अर्थ यह नहीं है कि 80 प्रतिशत या अधिक दिव्यांग व्यक्ति को अपने लिए दो टिकट मिलेंगे। एक टिकट संबंधित दिव्यांग यात्री का होगा और दूसरा पात्र स्थिति में उसके साथ यात्रा कर रहे सहायक अथवा सहयात्री का होगा। नई ईटीआईएम व्यवस्था इसी पात्रता को डिजिटल रूप से पहचानकर टिकटों की संख्या निर्धारित करती है।

शून्य मूल्य का टिकट, लेकिन निगम के हिसाब में दर्ज रहेगा वास्तविक किराया

‘शून्य मूल्य टिकट’ का अर्थ यह नहीं है कि यात्रा का कोई आर्थिक मूल्य नहीं है। इसका अर्थ केवल इतना है कि पात्र दिव्यांग यात्री से उस यात्रा के लिए किराया नहीं लिया जाएगा। परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह के अनुसार टिकट पर यात्री के लिए मूल्य शून्य रहेगा, लेकिन उस यात्रा का वास्तविक किराया संबंधित परिचालक और बस सेवा के लोड फैक्टर तथा राजस्व गणना में शामिल किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कितने पात्र यात्रियों ने किस मार्ग पर कितनी दूरी तक निश्शुल्क यात्रा की और उसका वास्तविक किराया कितना था।

पुरानी व्यवस्था में भी निश्शुल्क यात्रा का खर्च अंततः सरकारी योजना के तहत निगम को प्रतिपूर्ति से जुड़ा था। उपलब्ध सरकारी योजना विवरण के अनुसार पात्र दिव्यांगजन और पात्र सहायक को यात्री कर भी नहीं देना होता और परिवहन निगम यात्रा का विवरण रखता है। नई डिजिटल व्यवस्था इसी लेखांकन को अधिक सटीक बना सकती है।

अब पता चलेगा किस मार्ग पर कितने दिव्यांग यात्रियों ने किया सफर

नई प्रणाली का दूसरा बड़ा लाभ आंकड़ों का है। दिव्यांग यात्रियों के शून्य मूल्य टिकटों की अलग रिपोर्ट एएफसी प्रणाली में उपलब्ध रहेगी। इससे निगम के पास डिजिटल रिकॉर्ड होगा कि किस बस और मार्ग पर कितने दिव्यांग यात्रियों ने निश्शुल्क यात्रा की, कितने मामलों में सहायक का टिकट जारी हुआ और इन यात्राओं का वास्तविक किराया कितना था।

यह रिकॉर्ड केवल लेखांकन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है। यदि आंकड़ों का उचित उपयोग किया जाए तो भविष्य में यह भी समझा जा सकता है कि किन मार्गों पर दिव्यांग यात्रियों की संख्या अधिक है और किन बस अड्डों या मार्गों पर सुलभता संबंधी सुविधाओं की अधिक आवश्यकता है। हालांकि परिवहन निगम ने अभी इस डेटा के ऐसे नियोजन उपयोग की कोई विस्तृत घोषणा नहीं की है, इसलिए इसे फिलहाल नई व्यवस्था की संभावित उपयोगिता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

QR कोड नहीं पढ़ा तो यात्री का अधिकार खत्म नहीं होगा

नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक सुरक्षा यह रखी गई है कि QR कोड स्कैन न होने पर दिव्यांग यात्री को निश्शुल्क यात्रा से वंचित नहीं किया जाएगा। कार्ड पुराना होने, QR कोड क्षतिग्रस्त होने, मशीन में तकनीकी समस्या आने या किसी अन्य कारण से स्कैनिंग न हो पाने की स्थिति में परिचालक को पहले से चली आ रही प्रक्रिया के अनुसार पात्र यात्री को निश्शुल्क यात्रा करानी होगी। यानी QR स्कैन सुविधा का माध्यम है, निश्शुल्क यात्रा की पात्रता की एकमात्र शर्त नहीं।

यह प्रावधान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर में मशीन, नेटवर्क, कार्ड की छपाई अथवा स्कैनर से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं हो सकती हैं। तकनीकी खराबी का बोझ यात्री पर डालने के बजाय पुरानी प्रक्रिया को विकल्प के रूप में जारी रखने से पात्र दिव्यांग व्यक्ति के यात्रा अधिकार की निरंतरता बनी रहेगी।

साधारण बसों में सुविधा, एसी और स्लीपर बसों में नहीं

इस सुविधा को लेकर एक महत्वपूर्ण सीमा भी स्पष्ट रहनी चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्ध योजना के अनुसार दिव्यांगजन की निश्शुल्क यात्रा परिवहन निगम की साधारण बसों में उपलब्ध है। योजना विवरण में वातानुकूलित, स्लीपर और वीडियो बसों को इससे बाहर रखा गया है। साधारण बस यदि उत्तर प्रदेश की सीमा पार करके अपने अंतिम गंतव्य तक जाती है तो पात्र दिव्यांग यात्री को बस के अंतिम गंतव्य तक निश्शुल्क यात्रा की अनुमति है, भले वह स्थान प्रदेश की सीमा के बाहर हो।

इसलिए नई QR आधारित व्यवस्था को ‘उत्तर प्रदेश रोडवेज की हर श्रेणी की बस में मुफ्त यात्रा’ कहना सही नहीं होगा। यह मौजूदा पात्रता नियमों के तहत साधारण बस सेवा के लिए डिजिटल टिकट जारी करने की व्यवस्था है।

फर्जी प्रमाणपत्र और मैनुअल रिकॉर्ड की समस्या घटाने की कोशिश

परिवहन निगम पिछले कुछ समय से निश्शुल्क और रियायती यात्रा को इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। पहले दिव्यांगता प्रमाणपत्र अथवा दूसरे दस्तावेज देखकर परिचालक को पात्रता तय करनी पड़ती थी। ऐसी प्रक्रिया में दस्तावेज की वास्तविकता जांचना, प्रतिशत पढ़ना और यात्रा का रिकॉर्ड रखना अधिक मैनुअल था। यूडीआईडी के QR कोड से अधिकृत विवरण सीधे मशीन पर आने से प्रमाणित प्रतिशत की जांच और टिकट जारी करने की प्रक्रिया एक ही प्रणाली में जुड़ जाती है।

इससे गलत या फर्जी दस्तावेज के आधार पर सुविधा लेने की गुंजाइश कम हो सकती है, लेकिन डिजिटल प्रणाली को अपने आप ‘पूरी तरह फर्जीवाड़ा मुक्त’ कहना भी जल्दबाजी होगी। किसी भी डिजिटल व्यवस्था की विश्वसनीयता डेटा की शुद्धता, कार्ड सत्यापन, मशीन की सुरक्षा और कर्मचारियों द्वारा सही प्रक्रिया अपनाने पर निर्भर करती है।

यूडीआईडी क्यों महत्वपूर्ण

केंद्र सरकार का Unique Disability ID Project देशभर में दिव्यांगता प्रमाणन को एकरूप बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के अनुसार यूडीआईडी एक ऐसा राष्ट्रीय पहचान और सत्यापन दस्तावेज है जिसे विभिन्न सरकारी योजनाओं और सुविधाओं के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए मान्यता प्राप्त 21 प्रकार की दिव्यांगताओं वाले भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं और प्रमाणित होने के बाद कार्ड देशभर में मान्य रहता है।

इसलिए उत्तर प्रदेश रोडवेज की नई व्यवस्था का महत्व केवल टिकट मशीन में QR स्कैनर जोड़ने तक सीमित नहीं है। यह परिवहन सुविधा को राष्ट्रीय डिजिटल दिव्यांगता प्रमाणन प्रणाली से जोड़ती है। परिचालक को अलग-अलग तरह के प्रमाणपत्रों से प्रतिशत समझने के बजाय मशीन पर प्रमाणित जानकारी मिल सकेगी और पात्रता के अनुसार टिकट स्वतः तय होगा।

यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव-बहस कम, प्रमाणित रिकॉर्ड ज्यादा

व्यवहार में इसका सबसे बड़ा फायदा उस स्थिति में हो सकता है जब बस में परिचालक और यात्री के बीच इस बात को लेकर विवाद होता है कि प्रमाणपत्र मान्य है या नहीं, दिव्यांगता कितनी है अथवा सहायक को निश्शुल्क यात्रा मिलनी चाहिए या नहीं। QR कोड स्कैन होते ही मशीन में प्रमाणित प्रतिशत और श्रेणी सामने आने से निर्णय व्यक्तिगत व्याख्या के बजाय दर्ज डेटा पर आधारित होगा।

उत्तर प्रदेश रोडवेज की यह नई व्यवस्था निश्शुल्क यात्रा की कोई नई योजना नहीं, बल्कि पुराने अधिकार को अधिक सरल, डिजिटल और दर्ज करने योग्य बनाने का प्रयास है। 40 प्रतिशत या उससे अधिक प्रमाणित दिव्यांगता वाले पात्र यात्री को साधारण बस में शून्य मूल्य का टिकट मिलेगा और 80 प्रतिशत या उससे अधिक की पात्र श्रेणी में उसके साथ एक सहायक भी निश्शुल्क यात्रा कर सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि QR कोड न पढ़ने पर भी पात्र यात्री की निश्शुल्क यात्रा बंद नहीं होगी। इस तरह यूडीआईडी कार्ड, ईटीआईएम और डिजिटल यात्रा रिकॉर्ड को जोड़ने से बस में टिकट बनाने की प्रक्रिया छोटी होगी और पात्रता को लेकर होने वाले विवाद तथा मैनुअल रिकॉर्ड की निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

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