BHU Teachers Protest: बीएचयू में जांच कमेटी की निष्पक्षता पर उठे सवाल, शिक्षकों में नाराजगी

BHU Teacher Protest: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शिक्षकों के खिलाफ गठित जांच कमेटी की निष्पक्षता को लेकर विवाद बढ़ गया है। शिक्षक समुदाय ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Pawan Tiwari
Published on: 25 May 2026 5:21 PM IST
BHU Teachers Protest: बीएचयू में जांच कमेटी की निष्पक्षता पर उठे सवाल, शिक्षकों में नाराजगी
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BHU Teacher Protest

BHU Teacher Protest: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में शिक्षकों के विरुद्ध गठित जांच कमेटी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कमेटी की ओर से लगातार तीसरा पत्र जारी कर इसे “अंतिम अवसर” बताए जाने के बाद शिक्षक समुदाय में असंतोष और अविश्वास का माहौल बन गया है। शिक्षकों ने जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।शिक्षकों का आरोप है कि जिस तेजी से कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है, उससे यह आशंका पैदा हो रही है कि पूरी प्रक्रिया पूर्वाग्रह से प्रभावित हो सकती है। कई शिक्षकों का कहना है कि जांच कमेटी के अध्यक्ष प्रो. लखोटिया की कार्यशैली पहले से ही शिक्षक विरोधी मानी जाती रही है और वर्तमान कार्रवाई में भी वे दबाव बनाने की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

विश्वविद्यालय परिसर में इस बात की भी चर्चा है कि विश्वविद्यालय के कुछ महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। इसी बीच कुछ शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्रो. लखोटिया के पारिवारिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसके कारण जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह गहराया है। हालांकि इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन अथवा संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।जांच कमेटी के दूसरे सदस्य प्रो. महेश प्रसाद अहिरवार को लेकर भी शिक्षक समुदाय में चर्चाएं तेज हैं। कुछ शिक्षकों का कहना है कि उनका विभिन्न आंदोलनों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ाव रहा है। शिक्षकों के एक वर्ग ने आरोप लगाया कि कमेटी के सदस्यों की पृष्ठभूमि को देखते हुए निष्पक्ष जांच को लेकर संदेह की स्थिति बन रही है।

महिला शिक्षिकाओं ने भी कमेटी में एक भी महिला सदस्य शामिल न होने पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में महिला प्रतिनिधित्व आवश्यक होना चाहिए, ताकि सभी पक्ष बिना भय के अपना पक्ष रख सकें।शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, सभी पत्राचार सार्वजनिक किए जाएं और संबंधित शिक्षकों को पर्याप्त समय व अवसर दिया जाए। उनका कहना है कि “अंतिम अवसर” जैसे शब्दों का प्रयोग भय और दबाव का वातावरण तैयार करता है, जो किसी भी शैक्षणिक संस्था की गरिमा के अनुरूप नहीं है।

शिक्षकों का कहना है कि विश्वविद्यालय ज्ञान, संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र होता है। यदि वहां पक्षपात और प्रशासनिक दबाव का माहौल बनेगा तो इसका प्रतिकूल प्रभाव शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों और पूरे शैक्षणिक वातावरण पर पड़ेगा।वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। शिक्षक समुदाय ने कुलपति से मांग की है कि जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और पूर्वाग्रह रहित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा और शिक्षकों का विश्वास दोनों सुरक्षित रह सकें।

Shalini singh

Shalini singh

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उप संपादक | डिजिटल मीडिया पत्रकार

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