Varanasi Fuel Price Hike: "आधा वेतन तो तेल में ही..." महंगाई की मार से कराह उठी काशी! पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर क्या बोली जनता?

Varanasi Fuel Price Hike Reaction: पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने वाराणसी में मचा दी हलचल! छात्रों से लेकर नौकरीपेशा और गृहिणियों तक, हर कोई महंगाई की मार से परेशान। जानिए काशी की जनता ने ईंधन कीमतों पर क्या कहा और कैसे बिगड़ रहा है आम आदमी का बजट।

Harsh Srivastava
Published on: 15 May 2026 12:40 PM IST (Updated on: 15 May 2026 12:31 PM IST)
Varanasi Fuel Price Hike: आधा वेतन तो तेल में ही... महंगाई की मार से कराह उठी काशी! पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर क्या बोली जनता?
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Varanasi Fuel Price Hike Reaction: पिछले काफी समय से शांत पड़े पेट्रोल और डीजल के दामों में आज अचानक हुई बढ़ोतरी ने मध्यम वर्ग के रसोई के बजट से लेकर दफ्तर जाने वाले युवाओं के गणित तक को बिगाड़ दिया है। जैसे ही तेल कंपनियों ने नई दरों का ऐलान किया, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और लोगों के चेहरों पर मायूसी साफ देखी गई। इस महंगाई के 'विस्फोट' का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश के वाराणसी यानी बाबा विश्वनाथ की नगरी में देखने को मिल रहा है, जहां की सुबह अब 'हर-हर महादेव' के साथ-साथ 'महंगाई की मार' की चर्चाओं से शुरू हो रही है। हमने काशी के विभिन्न वर्गों से बात की और जानने की कोशिश की कि इस अचानक आए झटके ने उनकी जिंदगी को कैसे प्रभावित किया है।

युवाओं का गणित बिगड़ा

वाराणसी के लंका इलाके में स्थित बीएचयू (BHU) के बाहर अपनी बाइक में पेट्रोल डलवाने आए छात्र आर्यन राज के चेहरे पर साफ चिंता दिख रही थी। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में अपनी बात रखी। आर्यन ने कहा, "एक छात्र के लिए ₹100 की पॉकेट मनी में दिन गुजारना पहले ही मुश्किल था, अब पेट्रोल के बढ़ते दाम हमारे करियर की रफ्तार रोक रहे हैं। घर से जो सीमित पैसे मिलते हैं, उसमें अब या तो हम किताबें खरीद सकते हैं या अपनी बाइक में तेल डलवा सकते हैं। अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो शायद हमें वापस साइकिल पर आना पड़ेगा या फिर पैदल ही क्लासेज अटेंड करनी होंगी। सरकार को समझना चाहिए कि हर बढ़ता रुपया एक छात्र की पढ़ाई और उसके भविष्य पर बोझ बढ़ाता है।"

महिलाओं का बिगड़ता घरेलू बजट

महंगाई की इस आग से घर की 'वित्त मंत्री' यानी महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। सिगरा निवासी गृहिणी रजनी शर्मा ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, "दूध, सब्जी और दालों के दाम तो पहले ही आसमान छू रहे थे, अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ेगी, जिससे हर चीज और महंगी हो जाएगी। मुझे अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने और रोजमर्रा की खरीदारी के लिए स्कूटी का इस्तेमाल करना पड़ता है। पहले महीने में जितना खर्च होता था, अब उसमें सीधे 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। समझ नहीं आता कि बचत कहां से करें? हम महिलाएं घर चलाने के लिए पाई-पाई जोड़ती हैं, लेकिन तेल के बढ़ते दाम हमारी सारी प्लानिंग पर पानी फेर देते हैं।"

दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा वर्ग की बढ़ी मुश्किलें

रोजाना अपने काम के सिलसिले में 30 से 40 किलोमीटर का सफर तय करने वाले मनीष श्रीवास्तव, जो एक निजी कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव हैं, इस खबर से काफी हताश नजर आए। उन्होंने अपनी बाइक की टंकी की ओर इशारा करते हुए कहा, "मेरा काम ही भागदौड़ का है। अगर पेट्रोल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो मेरी आधी सैलरी सिर्फ आने-जाने के तेल में ही निकल जाएगी। कंपनी हमें फिक्स कन्वेंस अलाउंस देती है, जो पुरानी कीमतों के हिसाब से तय है। अब बढ़ी हुई कीमतों का बोझ सीधे मेरी जेब पर पड़ेगा। शाम को घर लौटते समय जब मैं ये सोचता हूं कि आज कितने का तेल जला दिया, तो तनाव और बढ़ जाता है। मध्यम वर्ग के लिए अब गाड़ी चलाना लग्जरी बनता जा रहा है।"

व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों की बढ़ती चिंताएं

सिर्फ निजी वाहन चालक ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई से जुड़े लोग भी इस बढ़ोतरी से डरे हुए हैं। वाराणसी की मंडी में सामान सप्लाई करने वाले पिकअप चालक रामू निषाद ने बताया, "डीजल महंगा होने का मतलब है कि अब हमें माल भाड़ा बढ़ाना पड़ेगा। अगर हम भाड़ा बढ़ाते हैं, तो ग्राहक कम हो जाते हैं और अगर नहीं बढ़ाते, तो हमारे पास घर ले जाने के लिए कुछ नहीं बचता। टायर, सर्विस और ऊपर से अब ये डीजल की मार। हम जैसे छोटे कामगारों के लिए तो अब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी जंग जीतने जैसा हो गया है।"

क्या है इस अचानक हुई बढ़ोतरी का कारण और समाधान?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक तनाव के कारण भारतीय तेल कंपनियों को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है। हालांकि, आम जनता का तर्क है कि जब कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरते हैं, तब उन्हें उस अनुपात में राहत नहीं दी जाती। वाराणसी के लोगों में इस बात को लेकर भी रोष है कि सरकार को टैक्स कम करके जनता को थोड़ी राहत देनी चाहिए। आज की यह बढ़ती कीमतें सिर्फ एक अंक का बदलाव नहीं हैं, बल्कि यह लाखों परिवारों की खुशियों और उनके भविष्य की प्लानिंग पर किया गया एक बड़ा समझौता है।

Harsh Srivastava

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Hi! I am Harsh Srivastava, currently working as a Content Writer and News Coordinator at Newstrack. I oversee content planning, coordination, and contribute with in-depth articles and news features, especially focusing on politics and crime. I started my journey in journalism in 2023 and have worked with leading publications such as Hindustan, Times of India, and India News, gaining experience across cities including Varanasi, Delhi and Lucknow. My work revolves around curating timely news, in- depth research, and delivering engaging content to keep readers informed and connected.

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