वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप! घाटों का संपर्क टूटा, पानी में समाया ये ऐतिहासिक मंदिर, देखें तस्वीरें

Varanasi Ratneshwar Mahadev Temple Submerged: वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पक्के घाट जलमग्न हो गए हैं और कई घाटों का संपर्क टूट गया है। मणिकर्णिका घाट के पास स्थित ऐतिहासिक रत्नेश्वर महादेव मंदिर भी गंगा के पानी में समा गया है।

Harsh Srivastava
Published on: 6 Aug 2026 5:50 PM IST (Updated on: 6 Aug 2026 5:50 PM IST)
वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप! घाटों का संपर्क टूटा, पानी में समाया ये ऐतिहासिक मंदिर, देखें तस्वीरें
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Varanasi Ratneshwar Mahadev Temple Submerged: धार्मिक नगरी वाराणसी में मोक्षदायिनी गंगा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, गंगा नदी का पानी 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार ऊपर चढ़ रहा है। इस समय वाराणसी में गंगा का जलस्तर 62.4 मीटर रिकॉर्ड किया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि वर्तमान जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से 7.86 मीटर और खतरे के निशान 71.26 मीटर से 8.86 मीटर नीचे बना हुआ है। इसके बावजूद पानी की बढ़ती रफ्तार ने तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है।

पक्के घाट जलमग्न, आपस में टूटा संपर्क

पानी के फैलाव के कारण वाराणसी के प्रसिद्ध पक्के घाटों की सीढ़ियां धीरे-धीरे जलमग्न होने लगी हैं। घाटों के किनारे स्थित कई छोटे-बड़े मंदिर पानी की चपेट में आ गए हैं। स्थानीय पुरोहितों और नाविकों का कहना है कि जलस्तर में अचानक आई इस तेजी के चलते घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह से कट गया है। एक घाट से दूसरे घाट तक पैदल जाना अब संभव नहीं रह गया है। इससे आरती, पूजा-पाठ और घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं की दैनिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा है।


पानी में डूबा पीसा की मीनार जैसा अनोखा मंदिर

मणिकर्णिका घाट के पास स्थित प्रसिद्ध रत्नेश्वर महादेव मंदिर एक बार फिर पूरी तरह से गंगा के पानी में समा गया है। 9 डिग्री के कोण पर झुका यह प्राचीन मंदिर अपनी विशेष स्थापत्य कला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। झुकाव के कारण इसकी तुलना अक्सर इटली की प्रसिद्ध 'पीसा की मीनार' से की जाती है। हालांकि यह मंदिर साल के अधिकतर महीनों में पानी के अंदर ही रहता है, लेकिन बाढ़ के दिनों में इसका जलमग्न होना पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बन जाता है।


नावों के संचालन पर रोक, प्रशासन हुआ सख्त

गंगा में जलस्तर की बढ़ोतरी और तेज हवाओं को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। पर्यटकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पतवार वाली पारम्परिक नावों के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। केवल मोटरबोट चलाने की छूट दी गई है, लेकिन उनके लिए भी कड़े नियम तय किए गए हैं। मोटरबोट चालकों को क्षमता से आधी सवारी बैठाने और लाइफ जैकेट जैसे सभी अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करने की सख्त हिदायत दी गई है।


गंगा के तटवर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एनडीआरएफ और जल पुलिस की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। जलस्तर की पल-पल की निगरानी की जा रही है।

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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