Video: UP में बिजली पर हाहाकार! मंत्री AK sharma के दावे की खुली पोल

UP Power Cut Video: उत्तर प्रदेश में इस समय दो चीजें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं… पहली — आसमान से बरसती आग… और दूसरी — बिजली विभाग के दावों की गर्मी।

Newstrack Network
Published on: 28 May 2026 5:35 PM IST
UP Video Power CUT AK Sharma 24 Hour Electricity Claim Exposed
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UP Video Power CUT AK Sharma 24 Hour Electricity Claim Exposed

UP Power Cut Video: उत्तर प्रदेश में इस समय दो चीजें सबसे ज्यादा चर्चा में हैं… पहली — आसमान से बरसती आग… और दूसरी — बिजली विभाग के दावों की गर्मी। क्योंकि एक तरफ जनता रातभर पसीने में भीग रही है… दूसरी तरफ सरकार कह रही है — सब कंट्रोल में है। और इसी बीच… ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने 25 मई को एक्स पर एक पोस्ट किया… जिसमें दावा किया गया — उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति में नंबर 1 बन गया है… 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड सप्लाई दी गई… ग्रामीण इलाकों तक में 22 से 24 घंटे बिजली पहुंचाई जा रही है… अब जरा सोचिए… अगर सबकुछ इतना शानदार है… तो फिर बलिया के अस्पताल में डॉक्टर टॉर्च जलाकर इलाज क्यों कर रहे थे? अगर बिजली की “महाआपूर्ति” हो रही है… तो फिर लोग रात में घर छोड़कर सड़कों पर क्यों सो रहे हैं? अगर गांवों में 22 घंटे बिजली मिल रही है… तो फिर हर जिले से ट्रांसफॉर्मर फुंकने और अघोषित कटौती की खबरें क्यों आ रही हैं? सवाल बहुत हैं… और जवाब शायद सरकार के पास भी नहीं हैं। क्योंकि इस वक्त उत्तर प्रदेश में बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं रही… बल्कि जनता के गुस्से का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। और आज की इस खास रिपोर्ट में हम आपको दिखाएंगे— बलिया अस्पताल का वो वायरल वीडियो… जिसने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी। बताएंगे… कैसे पूर्वांचल से बुंदेलखंड तक लोग बिजली के लिए तरस रहे हैं। क्या यूपी में सच में बिजली संकट नहीं है… या फिर आंकड़ों की रोशनी में जनता का अंधेरा छिपाया जा रहा है?

तो शुरुआत करते हैं उस वायरल वीडियो से… जिसने पूरे प्रदेश को हिला दिया। बलिया का एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र… रात का समय… पूरा अस्पताल अंधेरे में डूबा हुआ… और उसी अंधेरे में… एक मरीज लेटा हुआ है… डॉक्टर और उनके सहयोगी… मोबाइल की टॉर्च जलाकर इलाज कर रहे हैं। जी हाँ… ये किसी फिल्म का सीन नहीं है… ये उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की असली तस्वीर है। वो भी तब… जब सरकार लगातार “बेहतर बिजली व्यवस्था” का दावा कर रही है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ… और लोगों ने सवाल पूछना शुरू कर दिया।

क्योंकि अस्पताल वो जगह होती है… जहाँ बिजली जाना मतलब जिंदगी पर खतरा। लेकिन यहां तो मरीज का इलाज ही टॉर्च के भरोसे हो रहा था। अब सरकार की तरफ से सफाई आई। CMO ने कहा— “जनरेटर में तेल था… लेकिन तकनीकी खराबी आ गई थी।” यानि बिजली भी गई… और बैकअप सिस्टम भी बैठ गया। अब जांच कमेटी बना दी गई है। लेकिन सवाल ये है… क्या हर घटना के बाद सिर्फ जांच कमेटी बना देने से सिस्टम ठीक हो जाएगा? क्योंकि जनता ये पूछ रही है— अगर अस्पतालों की ये हालत है… तो गांवों और कस्बों की स्थिति कितनी खराब होगी?

अब जरा पूरे प्रदेश की तस्वीर देखिए। पूर्वांचल से लेकर बुंदेलखंड तक… हर जगह बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सिद्धार्थनगर… झांसी… बांदा… सीतापुर… गोंडा… मऊ… लखनऊ… लगभग 43 जिलों में लोग बिजली कटौती से परेशान हैं। भीषण गर्मी… 48 डिग्री तापमान… और ऊपर से घंटों बिजली गायब। लोग रातभर घरों के बाहर बैठने को मजबूर हैं। बच्चे सो नहीं पा रहे… बुजुर्ग बेहाल हैं… किसानों की सिंचाई प्रभावित है… छोटे व्यापारी परेशान हैं… लेकिन जब शिकायत करो… तो जवाब मिलता है— जैसे ही पावर हाउस में बिजली आएगी… आप तक पहुंच जाएगी। यानि जनता परेशान है… और सिस्टम रटा-रटाया जवाब देने में व्यस्त है। अब जरा मौसम का हाल भी समझिए। उत्तर प्रदेश के 10 से ज्यादा जिलों में रेड अलर्ट जारी है। बांदा का तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया। यानी पूरा प्रदेश आग के तवे में बदल चुका है।

ऐसे समय में अगर बिजली चली जाए… तो हालत क्या होगी… ये वही समझ सकता है जिसने बिना पंखे के रात काटी हो। लेकिन सरकार कह रही है— प्रदेश में बिजली संकट नहीं है। अब सुनिए ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का दावा। उन्होंने एक्स पर लिखा— उत्तर प्रदेश बिजली आपूर्ति में नंबर 1… 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड सप्लाई… ग्रामीण इलाकों में भी 22 से 24 घंटे बिजली… तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं… अब जनता पूछ रही है— अगर सबकुछ इतना शानदार है… तो फिर ये अंधेरा कहाँ से आ रहा है? क्यों ट्रांसफॉर्मर जल रहे हैं? क्यों लाइनें ट्रिप कर रही हैं? क्यों गांवों में लोग बिजली के इंतजार में रात काट रहे हैं? और सबसे बड़ा सवाल… अगर रिकॉर्ड सप्लाई हो रही है… तो फिर रिकॉर्ड शिकायतें क्यों आ रही हैं?

अब बात सोशल मीडिया की। सोशल मीडिया पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा जबरदस्त ट्रोल हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं— मंत्री जी रील बनाने में व्यस्त हैं… लेकिन बिजली व्यवस्था संभाल नहीं पा रहे। कुछ लोग तो ये तक कह रहे हैं— योगी सरकार की सबसे ज्यादा बदनामी बिजली विभाग करा रहा है। और हैरानी की बात ये है… अब सिर्फ विपक्ष ही नहीं… बीजेपी के अपने विधायक भी नाराज हैं। गोंडा सदर से बीजेपी विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा— गोंडा जिले में बिजली की गंभीर समस्या है। बार-बार बिजली कट रही है। दुकानें प्रभावित हो रही हैं। ट्रांसफॉर्मर ओवरलोड हैं। तार टूट रहे हैं। जनता में गुस्सा बढ़ रहा है। अब सोचिए… जब सत्ता पक्ष के विधायक ही मंत्री को शिकायत पत्र लिख रहे हों… तो हालात कितने खराब होंगे। सितापुर से बीजेपी विधायक निर्मल वर्मा ने भी मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा— शहर और गांव दोनों जगह लगातार बिजली कटौती हो रही है। व्यापार प्रभावित है। खेती प्रभावित है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। यानी विपक्ष तो छोड़िए… अब बीजेपी के अंदर से भी सवाल उठने लगे हैं।

अब सुनिए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने क्या कहा। अखिलेश यादव ने यूपी के बिजली संकट को नाम दिया— महाविद्युत आपदा” उन्होंने कहा— बीजेपी की गलत नीतियों की वजह से यूपी में असहनीय बिजली संकट चल रहा है। जनता अपना गुस्सा लाइनमैन या छोटे कर्मचारियों पर न निकाले…” असल जिम्मेदार बीजेपी सरकार, बिजली मंत्री और उच्च अधिकारी हैं। अखिलेश यादव ने कहा— हजारों संविदा कर्मचारियों की छंटनी की गई… पूरा सिस्टम दबाव में काम कर रहा है… और फिर अखिलेश यादव ने एक्स पर एक बेहद तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा— यूपी में गुजरात मॉडल का ट्रांसफॉर्मर फुंक गया है… जबरदस्ती जोड़े गए तारों में चिंगारी निकल रही है… मीटर बिना बिजली के दौड़ रहे हैं… और भाजपाइयों के पीछे जनता दौड़ रही है… फिर उन्होंने तंज कसते हुए लिखा— बड़ों-बड़ों के प्रशिक्षक खुद ही फेल हो गए हैं… तो उनके शिष्यों का क्या होगा?

वहीँ मायावती ने कहा— भीषण गर्मी में बिजली न मिलने और बार-बार कटौती से गरीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारी और मेहनतकश लोग बेहद परेशान हैं। उन्होंने सरकार से अपील की— तुरंत सुधार किया जाए… और भविष्य के लिए नई बिजली परियोजनाएं शुरू की जाएं। नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने कहा— ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बिजली व्यवस्था बेहद खराब है। छात्र, किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अब सवाल ये उठता है— क्या राजधानी लखनऊ में हालात बेहतर हैं? जवाब है — नहीं। लखनऊ के विधायक नीरज वोरा और राजेश्वर सिंह ने भी बिजली कटौती की शिकायत की है। यानि राजधानी तक में हालात काबू में नहीं हैं। अब जरा जनता का गुस्सा समझिए। लोग कह रहे हैं— बिजली बिल समय पर आता है… मीटर तेजी से चलता है… लेकिन बिजली समय पर नहीं आती। कुछ लोग कह रहे हैं— इन्वर्टर जवाब दे चुका है… बच्चे बीमार हो रहे हैं… और सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर है… कि मंत्री जी हर बार दावा करते हैं— कोई संकट नहीं है

अब आइए मऊ जिले में। जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा— किसी भी कीमत पर बिजली कटौती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारी रात में गश्त करते नजर आए। मऊ में अधिशासी अभियंता महेश विश्वकर्मा देर रात ट्रांसफॉर्मरों का निरीक्षण करते दिखे। उन्होंने कहा— प्रदेश में बिजली का कोई संकट नहीं है। लेकिन फिर उन्होंने एक और बात कही। उन्होंने कहा— शाम 10 बजे तक बिजली की पीक डिमांड होती है…जिसके कारण ट्रिपिंग होती है… और फिर उन्होंने लोगों से अपील की— एक साथ सारे उपकरणों का इस्तेमाल न करें। अब जरा सोचिए… भीषण गर्मी में जनता क्या करे? पंखा बंद करे? कूलर बंद करे? AC न चलाए? यानि समस्या सिस्टम की है… लेकिन समाधान जनता से मांगा जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल… क्या यूपी में सच में बिजली संकट नहीं है? अगर नहीं है… तो फिर इतने विधायक शिकायत क्यों कर रहे हैं? इतने वीडियो वायरल क्यों हो रहे हैं? अस्पताल अंधेरे में क्यों हैं? जनता सड़क पर क्यों है? और अगर संकट है… तो फिर सरकार इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रही? देखिए… बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं है। आज बिजली मतलब— पानी… इलाज… पढ़ाई… व्यापार… खेती… और जिंदगी। ऐसे में अगर 48 डिग्री तापमान में बिजली घंटों गायब रहे… तो गुस्सा होना स्वाभाविक है।

अब जनता ये भी पूछ रही है— जब चुनाव होते हैं… तब 24 घंटे बिजली का वादा किया जाता है… तो फिर गर्मी आते ही सिस्टम क्यों बैठ जाता है? क्या बिजली व्यवस्था सिर्फ कागजों में मजबूत है? क्या जमीनी हकीकत कुछ और है? और सबसे बड़ी बात… अगर सरकार को समस्या पता है… तो उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल रहा? हर साल गर्मी आती है… हर साल ट्रांसफॉर्मर फुंकते हैं… हर साल कटौती होती है… और हर साल वही बयान आते हैं— “स्थिति नियंत्रण में है।” लेकिन अब जनता सिर्फ बयान नहीं चाहती। जनता समाधान चाहती है। क्योंकि जब अस्पताल में टॉर्च से इलाज होने लगे… तो समझ जाइए… सिस्टम सिर्फ ट्रिप नहीं हुआ… बल्कि भरोसा भी ट्रिप हो चुका है। और आखिर में… एक सवाल आपसे। अगर आपके इलाके में भी बिजली कटौती हो रही है… तो क्या आपको लगता है कि यूपी में सच में बिजली संकट नहीं है? क्या आपको लगता है कि सरकार के दावे जमीन पर दिखाई दे रहे हैं? या फिर आंकड़ों की चमक में जनता का अंधेरा छिपाया जा रहा है? अपनी राय हमें कमेंट करके जरूर बताइए।

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