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UP News: यूपी के स्वास्थ्य महकमे में बढ़ा महिला अफसरों का दबदबा, प्रमुख पदों की कमान महिलाओं के पास
UP News: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र में कई अहम प्रशासनिक और योजनागत जिम्मेदारियां महिला आईएएस अधिकारियों के पास हैं। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, एनएचएम और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में उनकी भूमिका अहम है।
UP News (Image Credit-Social Media)
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा तंत्र में महिला आईएएस अधिकारियों की मौजूदगी इस समय खास तौर पर दिखाई दे रही है। शासन से लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय के प्रशासन और आयुष्मान भारत से जुड़ी स्टेट एजेंसी तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां महिला अधिकारियों के पास हैं। हाल में हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के फेरबदल के बाद 1996 बैच की वी. हेकाली झिमोमी को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के साथ चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिलने से यह संख्या और बढ़ी है। हालांकि मूल सूचना में स्वास्थ्य महकमे के ‘सभी महत्वपूर्ण पदों’ पर महिलाओं के होने की बात पूरी तरह सही नहीं है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार अरुण और परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. हरिदास अग्रवाल हैं। इसके बावजूद नीति निर्माण और कई प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े पदों पर एक साथ इतनी महिला आईएएस अधिकारियों की तैनाती उल्लेखनीय है। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट भी महानिदेशक और परिवार कल्याण महानिदेशक के इन पदों की पुष्टि करती है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था में सबसे बड़ा हालिया बदलाव 20 सितंबर को हुए आईएएस फेरबदल में हुआ। चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ आईएएस अमित कुमार घोष को उच्च शिक्षा विभाग भेज दिया गया और उनकी जगह 1996 बैच की वी. हेकाली झिमोमी को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा बनाया गया। इससे पहले झिमोमी वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में प्रमुख सचिव थीं। स्वास्थ्य विभाग में उनके साथ सचिव के रूप में रितु माहेश्वरी की तैनाती है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट भी रितु माहेश्वरी को सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के रूप में दर्ज करती है। इस तरह शासन स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के दो प्रमुख प्रशासनिक पदों पर महिला अधिकारी काम कर रही हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की कमान भी महिला आईएएस अधिकारी डॉ. पिंकी जोवेल के पास है। एनएचएम उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट वी. हेकाली झिमोमी को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और डॉ. पिंकी जोवेल को मिशन निदेशक के रूप में दर्ज करती है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन वेबसाइट पर अगस्त 2026 तक उत्तर प्रदेश के मिशन निदेशक के रूप में भी डॉ. पिंकी जोवेल का नाम दर्ज है। एनएचएम प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण क्रियान्वयन इकाइयों में है। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, सामुदायिक स्वास्थ्य, आशा कार्यकर्ता व्यवस्था, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और केंद्र प्रायोजित अनेक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इसकी केंद्रीय भूमिका है। इस लिहाज से मिशन निदेशक का पद प्रदेश के स्वास्थ्य प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण पदों में शामिल है।
चिकित्सा शिक्षा में भी जुलाई 2026 में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ था। 2010 बैच की आईएएस अधिकारी नेहा शर्मा को चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के साथ सचिव चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले यह जिम्मेदारी डॉ. सारिका मोहन संभाल रही थीं। एसजीपीजीआई के जुलाई 2026 के दीक्षांत समारोह के आधिकारिक विवरण में भी नेहा शर्मा को सचिव चिकित्सा शिक्षा और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के रूप में दर्ज किया गया है। महानिदेशालय के अधीन प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों, चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और इससे संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था का बड़ा हिस्सा आता है। उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में नए राजकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ने के कारण महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा की जिम्मेदारी का दायरा भी पहले के मुकाबले काफी बड़ा हो चुका है।
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान जैसी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को प्रदेश में संचालित करने वाली स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज यानी साचीज की कमान भी आईएएस अधिकारी अर्चना वर्मा के पास है। उत्तर प्रदेश में आयोजित एआई एवं स्वास्थ्य नवाचार सम्मेलन के आधिकारिक विवरण में अर्चना वर्मा को साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है। सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पात्र लाभार्थियों के कैशलेस इलाज, अस्पतालों के सूचीकरण, दावों और योजना की निगरानी में इस एजेंसी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस तरह प्रदेश के स्वास्थ्य प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा जो सीधे करोड़ों लाभार्थियों की चिकित्सा सुविधा और अस्पतालों से जुड़ा है, उसकी प्रशासनिक कमान भी महिला अधिकारी के पास है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय में निदेशक प्रशासन का महत्वपूर्ण पद आईएएस अधिकारी डॉ. निधि बंसल संभाल रही हैं। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें निदेशक प्रशासन के रूप में दर्ज किया गया है। महानिदेशालय स्तर पर यह पद डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों से जुड़े प्रशासनिक मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसी व्यवस्था में महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पवन कुमार अरुण, महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ. हरिदास अग्रवाल और महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. रंजना खरे हैं। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह महिला अधिकारियों के हवाले बताने के बजाय यह कहना अधिक तथ्यपरक होगा कि शासन और स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े अनेक प्रमुख प्रशासनिक पद इस समय महिला अधिकारियों के पास हैं।
इस प्रशासनिक तस्वीर का एक दिलचस्प पहलू यह है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में महिला अधिकारियों की यह मौजूदगी केवल किसी एक स्तर तक सीमित नहीं है। वी. हेकाली झिमोमी स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा की नीति तथा शासन स्तर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, रितु माहेश्वरी स्वास्थ्य विभाग में सचिव हैं, डॉ. पिंकी जोवेल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का नेतृत्व कर रही हैं, नेहा शर्मा चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय संभाल रही हैं, अर्चना वर्मा सरकारी स्वास्थ्य बीमा से जुड़ी स्टेट एजेंसी का नेतृत्व कर रही हैं और निधि बंसल स्वास्थ्य महानिदेशालय में प्रशासन की जिम्मेदारी देख रही हैं। यानी नीति निर्माण से लेकर मेडिकल कॉलेजों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, स्वास्थ्य बीमा और विभागीय प्रशासन तक अलग-अलग स्तरों पर महिला आईएएस अधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं।
हालांकि सरकारी वेबसाइटों को अपडेट किए जाने की रफ्तार में अंतर भी दिखाई देता है। सितंबर में हुए फेरबदल के बाद एनएचएम उत्तर प्रदेश की वेबसाइट वी. हेकाली झिमोमी को प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के रूप में दिखा रही है, जबकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय की वेबसाइट के कुछ हिस्सों में अभी भी अमित कुमार घोष का नाम अपर मुख्य सचिव के रूप में दिखाई दे रहा है। इसी तरह कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों की वेबसाइटों पर भी चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव के रूप में पुराने अधिकारी का नाम बना हुआ है। इसलिए वर्तमान तैनातियों के लिए 20 सितंबर के नवीनतम तबादला आदेश और उसके बाद अपडेट हुए आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देना अधिक उचित है।
उत्तर प्रदेश जैसे करीब 24 करोड़ आबादी वाले राज्य में स्वास्थ्य प्रशासन का आकार अपने आप में बहुत बड़ा है। सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, मेडिकल कॉलेजों, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के कारण इस क्षेत्र में प्रशासनिक फैसलों का सीधा असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है। ऐसे में एक ही समय में स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा की प्रशासनिक श्रृंखला के इतने महत्वपूर्ण पदों पर महिला आईएएस अधिकारियों की मौजूदगी सामान्य तबादला प्रक्रिया से आगे एक उल्लेखनीय प्रशासनिक तस्वीर बनाती है। इसे स्वास्थ्य महकमे पर महिलाओं के ‘पूरी तरह कब्जे’ के रूप में देखने के बजाय यह कहना अधिक सही होगा कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र में इस समय नीति, प्रशासन और प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं की कमान संभालने वाली महिला अधिकारियों की भागीदारी असाधारण रूप से मजबूत दिखाई दे रही है।


