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'यूपी में अब्दुल जीतेगा' पर योगी का ओवैसी को करारा जवाब, बोले- ऐसे लोगों के लिए जगह नहीं
यूपी में 'अब्दुल विधायक बनेगा' वाले असदुद्दीन ओवैसी के बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने पलटवार किया। ओवैसी को घेरते हुए योगी ने कांग्रेस और सपा पर भी हमला बोला। जानिए पूरा विवाद।
UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 'अब्दुल' के नाम पर सियासी घमासान तेज हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'यूपी में अब्दुल विधायक बनेगा' वाले बयान पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोरदार पलटवार किया है। योगी ने ओवैसी पर देशविरोधी, हिंदू विरोधी और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ एजेंडा चलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे लोगों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राज्य मिशिगन में अब्दुल एल-सैयद की जीत का हवाला देकर यूपी के मुसलमानों को अपनी अलग राजनीतिक ताकत खड़ी करने का संदेश दिया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि अब यूपी का 'अब्दुल' किसी के सामने सिर नहीं झुकाएगा, बल्कि विधायक बनकर विधानसभा पहुंचेगा।
ओवैसी के इसी बयान पर रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसा जवाब दिया कि यूपी की सियासत में नई बहस छिड़ गई। आजतक के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ओवैसी को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके पास उत्तर प्रदेश के लिए कोई एजेंडा नहीं है। वह जिस एजेंडे के साथ राजनीति करना चाहते हैं, वह भारत, हिंदुओं और देश के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
योगी ने साफ कहा कि देश की एकता को कमजोर करने वाले एजेंडे को उत्तर प्रदेश में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने ओवैसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी हमला बोला और कहा कि यूपी में मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाने तथा बुर्कानशीं महिला को देश का प्रधानमंत्री बनाने की उनकी इच्छा कभी पूरी नहीं होगी।
योगी बोले- ओवैसी की मंशा कभी पूरी नहीं होगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ओवैसी ऐसा एजेंडा लेकर आते हैं, जो भारत विरोधी, हिंदू विरोधी और देश के संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। ऐसे एजेंडे का मकसद देश की एकता को कमजोर करना है। इसलिए ओवैसी जैसे लोगों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। योगी ने कहा, "ओवैसी की इच्छा कभी पूरी नहीं होगी। इसीलिए वह कभी सत्ता में नहीं आएंगे।"
मुख्यमंत्री ने ओवैसी के उस बयान पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मुख्यमंत्री और बुर्का पहनने वाली महिला के प्रधानमंत्री बनने की संभावना जताई थी। योगी ने इन राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी इच्छाएं पूरी होने वाली नहीं हैं।
ओवैसी ने क्यों छेड़ा 'अब्दुल' का मुद्दा?
दरअसल, इस राजनीतिक विवाद की शुरुआत अमेरिका के मिशिगन में अब्दुल एल- सैयद की चुनावी जीत के बाद हुई। अमेरिकी डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर मिशिगन से अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीता। इस जीत को ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के उदाहरण के तौर पर पेश किया।
4 नवंबर को ओवैसी ने कहा था कि मिशिगन में एक अब्दुल जीत गया है, अब उत्तर प्रदेश के अब्दुल को भी अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करनी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग पहले अब्दुल को पंचर बनाने वाले के तौर पर पेश करते थे, जबकि समाजवादी पार्टी के शासन में मुस्लिम समुदाय को केवल दरी बिछाने और दूसरों के लिए नारे लगाने तक सीमित रखा गया।
ओवैसी ने कहा था, "अब यूपी का अब्दुल किसी के सामने सिर नहीं झुकाएगा, बल्कि विधायक बनेगा। वह आरएसएस से नहीं डरेगा और न ही किसी के सामने झुकेगा।"
उनका स्पष्ट संदेश था कि मुस्लिम मतदाता अब केवल दूसरी पार्टियों को सत्ता तक पहुंचाने का जरिया नहीं बनेंगे, बल्कि अपनी राजनीतिक नेतृत्व क्षमता भी स्थापित करेंगे।
2027 चुनाव से पहले सपा के मुस्लिम वोट बैंक पर ओवैसी की नजर
ओवैसी के बयान को केवल एक राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले AIMIM की सक्रियता समाजवादी पार्टी के पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक के लिए चुनौती बन सकती है।
ओवैसी लगातार मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निर्भर रहने के बजाय अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की अपील कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव के समय मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन तो लिया जाता है, लेकिन सत्ता और नेतृत्व में उन्हें पर्याप्त हिस्सेदारी नहीं दी जाती।
यही वजह है कि ओवैसी का 'अब्दुल विधायक बनेगा' वाला बयान सीधे तौर पर सपा की राजनीति को भी चुनौती देता है। दूसरी ओर, बीजेपी इस मुद्दे को विपक्षी दलों की राजनीति और उनके कथित तुष्टीकरण के एजेंडे से जोड़कर पेश कर रही है।
कांग्रेस और सपा ने भी दी प्रतिक्रिया
ओवैसी के बयान पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी प्रतिक्रिया दी थी। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि विदेश में किसी भारतीय की जीत उसके नाम या धर्म से ऊपर उठकर देश के लिए गर्व की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब्दुल जीते या श्रीराम, भारतीयों की जीत पर गर्व होना चाहिए।
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने अब्दुल एल-सैयदकी जीत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि एल-सैयद मिस्र मूल के अप्रवासी परिवार से आते हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते हैं। उनके मुताबिक, इस जीत को अमेरिकी लोकतांत्रिक राजनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
इस तरह ओवैसी के बयान ने बीजेपी, सपा और कांग्रेस तीनों को अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करने के लिए मजबूर कर दिया है।
कांग्रेस और सपा को भी योगी ने घेरा
आजतक पंचायत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल ओवैसी पर हमला नहीं बोला, बल्कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों की राजनीति और AIMIM के एजेंडे में कोई खास अंतर नहीं है।
योगी ने तीनों दलों को एक साथ आने की सलाह देते हुए दावा किया कि उनके राजनीतिक विचार और एजेंडे एक जैसे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन पार्टियों को देश के हितों की चिंता नहीं है और वे देश की आस्था तथा पहचान के साथ राजनीति कर रही हैं। इस बयान के जरिए योगी ने विपक्षी गठबंधन की राजनीति पर भी सवाल उठाने की कोशिश की।
यूपी की सियासत में अब 'अब्दुल' बनाम राजनीतिक प्रतिनिधित्व की लड़ाई
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले 'अब्दुल' का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। ओवैसी इसे मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी और नेतृत्व के सवाल से जोड़ रहे हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ इसे देश की एकता, संवैधानिक मूल्यों और कथित विभाजनकारी राजनीति के मुद्दे के रूप में पेश कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर समाजवादी पार्टी पर पड़ सकता है। यदि AIMIM मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल होती है, तो कई सीटों पर विपक्षी वोटों का समीकरण प्रभावित हो सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर 2027 के चुनाव में ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल इतना तय है कि चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व, वोट बैंक और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर नई जंग शुरू हो चुकी है।


