अखिलेश के गुर्जर दांव का अंत! योगी-जयंत की जोड़ी ने बिछाया ऐसा जाल, क्या ढह जाएगा सपा का दुर्ग?

पश्चिमी यूपी में सियासी हलचल तेज हो गई है। मिशन-2027 के तहत मुजफ्फरनगर में भाजपा और आरएलडी की संयुक्त रैली होने जा रही है। जाट, गुर्जर और ठाकुर समीकरण साधने की कोशिशों के बीच अखिलेश यादव की रणनीति ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

Shivam
Published on: 9 April 2026 2:44 PM IST
अखिलेश के गुर्जर दांव का अंत! योगी-जयंत की जोड़ी ने बिछाया ऐसा जाल, क्या ढह जाएगा सपा का दुर्ग?
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अभी समय है, लेकिन पश्चिमी यूपी का सियासी मैदान पूरी तरह से गरम हो चुका है। जाटों और चौधरियों का गढ़ माना जाने वाला यह क्षेत्र इन दिनों राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी प्रयोगशाला बन गया है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने दादरी से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर गुर्जर-मुस्लिम समीकरण बनाने की कोशिश की, जिससे भाजपा की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी बीच मेरठ में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के बाद से क्षेत्र में जाट बनाम ठाकुर की सियासत भी तेज हो गई है।

मुजफ्फरनगर से मिशन-2027 का शंखनाद

पश्चिमी यूपी की इसी बदलती राजनीति को अपने पक्ष में करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के प्रमुख जयंत चौधरी अब एक साथ मैदान में उतर रहे हैं। 13 अप्रैल को मुजफ्फरनगर के नुमाइश ग्राउंड में एक विशाल संयुक्त जनसभा आयोजित की जा रही है। पहले यह कार्यक्रम 9 अप्रैल को एक रोजगार मेले के रूप में होना था, जहाँ 150 कंपनियों के जरिए लगभग 5000 युवाओं को नौकरियां दी जानी थीं, लेकिन अब इसे 13 अप्रैल के लिए तय किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इस रैली को 'मिशन-2027' के आगाज के तौर पर देखा जा रहा है।

जाट-ठाकुर-गुर्जर वोटों को साधने की चुनौती

भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने की है। पूर्व सांसद संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच की सियासी खींचतान ने जाट और ठाकुर समाज के बीच एक दूरी पैदा कर दी है। दूसरी तरफ, पंजाब के सीएम भगवंत मान और हनुमान बेनीवाल जैसे नेताओं के बयानों ने जाट राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। 2014 और 2017 में जाट और गुर्जर समाज भाजपा के साथ खड़ा था, लेकिन 2022 और 2024 के चुनाव परिणामों ने भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब जयंत चौधरी के साथ मिलकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन समुदायों के बीच एक नया संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे।

अखिलेश की 'गुर्जर कार्ड' और भाजपा की रणनीति

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गुर्जर बहुल दादरी में रैली कर बड़ा दांव खेला है। उन्होंने वादा किया है कि सपा की सरकार बनने पर लखनऊ में गुर्जर महानायकों मिहिर भोज, कोतवाल धन सिंह गुर्जर और विजय सिंह पथिक की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। इस 'गुर्जर कार्ड' ने भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यही कारण है कि मुजफ्फरनगर की रैली में मुख्यमंत्री योगी न केवल विकास की बात करेंगे, बल्कि गुर्जर और जाट समाज की नाराजगी दूर करने का संदेश भी दे सकते हैं।

पश्चिमी यूपी क्यों है सत्ता की चाबी?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कहावत है कि लखनऊ का रास्ता पश्चिमी यूपी से होकर गुजरता है। प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 137 सीटें इसी क्षेत्र के 26 जिलों में आती हैं। भाजपा ने 2014 से लेकर 2022 तक के चुनावों में यहाँ बढ़त बनाकर ही सत्ता हासिल की है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में कुछ सीटों पर नुकसान हुआ, जिसे भाजपा 2027 से पहले दुरुस्त करना चाहती है। जयंत चौधरी का आरएलडी गढ़ मुजफ्फरनगर इस नई पटकथा का केंद्र बनने जा रहा है।

रैली के लिए भारी तैयारी

इस साझा रैली को सफल बनाने के लिए भाजपा और आरएलडी के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को एकजुट कर रहे हैं। न केवल मुजफ्फरनगर, बल्कि शामली, कैराना, मेरठ और सहारनपुर से भी भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। यह रैली न केवल गठबंधन की ताकत दिखाएगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि आने वाले समय में पश्चिमी यूपी के समीकरण किस करवट बैठेंगे। क्या योगी और जयंत की जोड़ी इस क्षेत्र में फिर से 'कमल' खिला पाएगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

Shivam

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Shivam is a multimedia journalist.

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