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Badrinath Dham: बद्रीनाथ मंदिर प्रशासन में हड़कंप, चढ़ावा मामले की जांच के बीच निजी सचिव निलंबित
Badrinath Temple Offering Row: चढ़ावा मामले की प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद BKTC ने की बड़ी कार्रवाई।
Badrinath Temple Offering Row 2026
Badrinath Temple Offering Row: इन दिनों देश के प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थलों पर भक्तों द्वारा दान किए गए चढ़ावे को लेकर अजीबोगरीब सा मामला जोर पकड़ता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में अयोध्या राम मंदिर के साथ ही अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी ऐसा ही एक मामला खुल कर सामने आ रहा है। बद्रीनाथ धाम से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समिति ने अध्यक्ष कार्यालय में तैनात निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताओं के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। समिति का कहना है कि निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी था।
प्रारंभिक जांच के बाद हुई कार्रवाई
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अपने पद से जुड़े दायित्वों के निर्वहन में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। इन आरोपों के आधार पर 3 जुलाई 2026 को उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की गई।
समिति ने संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा और उपलब्ध दस्तावेजों तथा तथ्यों की जांच शुरू की।
जांच रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए
BKTC के अनुसार, जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट और कर्मचारी द्वारा दिए गए जवाब का परीक्षण करने के बाद आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यदि उन्हें मौजूदा पद पर बनाए रखा जाता है तो जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया गया।
ज्योतिर्मठ कार्यालय से किया गया संबद्ध
निलंबन के बाद प्रमोद नौटियाल को बीकेटीसी के ज्योतिर्मठ (चमोली) स्थित कार्यालय से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान आगे की विभागीय जांच जारी रहेगी और अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल प्रारंभिक जांच के आधार पर की गई है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत विभागीय जांच के बाद ही सामने आएंगे।
चढ़ावा चोरी मामले से जुड़ा है पूरा विवाद
हाल के दिनों में बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित गड़बड़ी और चोरी के आरोपों ने काफी चर्चा बटोरी थी। मामला सामने आने के बाद मंदिर समिति पर पारदर्शी जांच कराने का दबाव बढ़ा। इसी क्रम में प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू की गई और अब पहली बड़ी कार्रवाई के रूप में अध्यक्ष कार्यालय के निजी सचिव को निलंबित किया गया है। समिति ने अभी तक जांच से जुड़े सभी तथ्यों या कथित वित्तीय अनियमितता की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए आगे की जांच रिपोर्ट इस मामले में अहम मानी जा रही है।
BKTC ने दिया सख्त संदेश
समिति ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी कर्मचारी के खिलाफ यदि नियमों के उल्लंघन या अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
समिति का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में श्रद्धालुओं का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और उसे बनाए रखने के लिए हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
बद्रीनाथ धाम देश के सबसे प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे का प्रबंधन भी बड़ी जिम्मेदारी माना जाता है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा असर श्रद्धालुओं के भरोसे और मंदिर प्रशासन की छवि पर पड़ता है।
इसी वजह से BKTC की यह कार्रवाई केवल एक कर्मचारी के निलंबन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब इस मामले में सभी को विभागीय जांच की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। जिससे यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं की पूरी सच्चाई क्या है और आगे किन लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।


