Uttarakhand News: मुख्यमंत्री धामी ने ‘हनुमान अंश’ फिल्म को उत्तराखंड में किया टैक्स फ्री, जानिए क्या है खास

Uttarakhand News: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने नीब करौरी बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को उत्तराखंड में टैक्स फ्री करने की घोषणा की। जानिए फिल्म में क्या है खास और कैंची धाम से इसका कनेक्शन।

Aditya Kumar Verma
Published on: 4 Sept 2026 11:18 PM IST (Updated on: 4 Sept 2026 11:19 PM IST)
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Uttarakhand News (Image Credit- Newstrack)

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज के आध्यात्मिक जीवन और उनके संदेश पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को राज्य में टैक्स फ्री करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने फिल्म की विषयवस्तु और बाबा नीब करौरी महाराज के आध्यात्मिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी फिल्में उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

फिल्म बाबा नीब करौरी महाराज की आध्यात्मिक यात्रा, भगवान हनुमान के प्रति उनकी भक्ति और मानव सेवा के संदेश को केंद्र में रखती है।

भगवान हनुमान की भक्ति से जुड़ी है कहानी

‘हनुमान अंश’ को महज एक सामान्य बायोपिक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। फिल्म में बाबा नीब करौरी महाराज के आध्यात्मिक जीवन और भगवान हनुमान के प्रति उनकी गहरी आस्था को कहानी का प्रमुख आधार बनाया गया है।

कहानी एक ऐसे बच्चे से शुरू होती है, जो अपनी मां को खोने के बाद जीवन और ईश्वर की तलाश में निकल पड़ता है। उसकी यह तलाश धीरे-धीरे उसे अध्यात्म, भक्ति और मानव सेवा के रास्ते पर ले जाती है।

फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह जीवन की मोह-माया से दूर होते हुए यह बालक सेवा और भक्ति को अपने जीवन का आधार बनाता है और आगे चलकर नीब करौरी बाबा के रूप में अपनी पहचान बनाता है।

सेवा को बताया गया भक्ति का रास्ता

फिल्म की खास बात यह है कि इसमें अध्यात्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रखा गया है। कहानी में प्रेम, करुणा, सेवा और जरूरतमंदों की मदद को भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।

फिल्म का संदेश है कि ईश्वर के प्रति सच्ची आस्था केवल धार्मिक अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि इंसान के व्यवहार और उसके कर्मों में भी दिखाई देनी चाहिए। यही वजह है कि बाबा के जीवन से जुड़े सेवा और लोककल्याण के पहलू को कहानी में विशेष स्थान दिया गया है।

अभिनेता शोभिनव सतैया ने निभाया नीब करौरी बाबा का किरदार

फिल्म में नीब करौरी बाबा का किरदार अभिनेता शोभिनव सतैया ने निभाया है। वहीं पूर्णिमा तिवारी ने उनकी पत्नी रामबेटी की भूमिका निभाई है।

निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए लंबे समय तक रिसर्च की। फिल्म में बाबा के जीवन के विभिन्न पहलुओं और उनके आध्यात्मिक संदेश को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई फिल्म

‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म की कहानी खास तौर पर नीब करौरी बाबा के जीवन, उनकी हनुमान भक्ति और सेवा भावना पर केंद्रित है।

बाबा के अनुयायियों के लिए फिल्म उनकी आध्यात्मिक यात्रा और विचारों को बड़े पर्दे पर देखने का एक अलग अनुभव प्रस्तुत करती है।

उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव, कैंची धाम है प्रमुख केंद्र

नीब करौरी बाबा का उत्तराखंड से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम उनकी आध्यात्मिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है और देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री धामी का फिल्म को उत्तराखंड में टैक्स फ्री करने का फैसला राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों के माध्यम से उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत, संत परंपरा और सेवा के संदेश को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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