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उत्तराखंड BJP को बड़ा झटका! जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल कांग्रेस में शामिल
उत्तराखंड में भाजपा को झटका लगा है। बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल 12 साल बाद कांग्रेस में लौट आए। कुमारी सैलजा और गणेश गोदियाल की मौजूदगी में ली सदस्यता।
Uttarakhand Politics: उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी हलचल तेज होने लगी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) को झटका देते हुए वरिष्ठ नेता रामशरण नौटियाल कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। मशहूर बॉलीवुड सिंगर जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने सोमवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया। करीब 12 साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए नौटियाल की वापसी को उत्तराखंड की राजनीति में अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस इसे भाजपा से मोहभंग और अपने पुराने साथियों की घर वापसी के तौर पर पेश कर रही है।
रामशरण नौटियाल ने कांग्रेस की उत्तराखंड प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की महासचिव कुमारी सैलजा तथा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके कांग्रेस में लौटने से राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार हैं।
भाजपा में घुटन महसूस हो रही थी: कुमारी सैलजा
रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी पर कुमारी सैलजा ने इसे पुराने साथी की 'घर वापसी' बताया। उन्होंने दावा किया कि नौटियाल भाजपा में सहज महसूस नहीं कर रहे थे और पार्टी के माहौल तथा कामकाज से असंतुष्ट थे।
सैलजा ने कहा कि रामशरण नौटियाल को भाजपा में घुटन महसूस हो रही थी। वहां के माहौल और कामकाज से उनका मन खिन्न हो गया था। उन्होंने भाजपा के भीतर काम करने के तरीके को करीब से देखा है। अब वह अपनी पुरानी पार्टी और विचारधारा में लौटकर खुश हैं।
कांग्रेस नेता ने इस मौके पर उन लोगों को भी पार्टी में आने का न्योता दिया, जो कांग्रेस की विचारधारा में विश्वास रखते हैं और राहुल गांधी तथा मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में भरोसा करते हैं। हालांकि, भाजपा छोड़ने के पीछे रामशरण नौटियाल के अपने विस्तृत कारणों और भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर उनकी ओर से दिए गए बयान को अलग से देखना अहम होगा।
उत्तराखंड सरकार पर कांग्रेस का हमला
रामशरण नौटियाल की जॉइनिंग के दौरान कांग्रेस ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार को भी निशाने पर लिया। कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि राज्य के लोगों में सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। उन्होंने निवेश के नाम पर धोखे, न्याय की कमी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
सैलजा ने महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राज्य में महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं। उनके मुताबिक, भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर फैला हुआ है और सरकार के कामकाज से जनता में असंतोष है।
कांग्रेस की ओर से लगाए गए ये आरोप ऐसे समय सामने आए हैं, जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। भाजपा सरकार पर कांग्रेस के हमले और रामशरण नौटियाल की पार्टी में वापसी को इसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है।
2022 में चकराता से लड़ा था विधानसभा चुनाव
रामशरण नौटियाल उत्तराखंड की राजनीति में पहले से सक्रिय रहे हैं। वह देहरादून के जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें चकराता सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चकराता विधानसभा क्षेत्र उत्तराखंड की महत्वपूर्ण सीटों में गिना जाता है। ऐसे में रामशरण नौटियाल का राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनका संपर्क कांग्रेस के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, उनकी वापसी से पार्टी को चुनावी स्तर पर कितना फायदा होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
12 साल पहले छोड़ी थी कांग्रेस, अब फिर लौटे
रामशरण नौटियाल पहले कांग्रेस में रह चुके हैं। करीब 12 साल पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। अब इतने लंबे अंतराल के बाद उनकी कांग्रेस में वापसी ने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है।
उनकी वापसी को कांग्रेस अपने पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा जोड़ने की कोशिश के तौर पर भी पेश कर सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह सवाल अहम होगा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे नौटियाल ने आखिर कांग्रेस में लौटने का फैसला क्यों किया।
फिलहाल इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यही है कि उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबले की जमीन तैयार होने लगी है। रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी से भाजपा को कितना नुकसान और कांग्रेस को कितना लाभ होगा, इसका आकलन आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर ही किया जा सकेगा।


